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Who is Neal Katyal: नील कत्याल कौन हैं? भारतीय मूल के वकील जिन्होंने ट्रंप के टैरिफ फैसले को दी चुनौती

नील कत्याल कौन हैं: भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के 15% ग्लोबल टैरिफ लगाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि वकील नील कत्याल कौन हैं.

Who is Neal Katyal: भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के 15% ग्लोबल टैरिफ लगाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि प्रेसिडेंट ऐसे उपायों के लिए US कांग्रेस को बायपास नहीं कर सकते. कत्याल ने तर्क दिया कि अगर ट्रंप को लगता है कि टैरिफ एक ‘अच्छा आइडिया’ है, तो उन्हें संविधान का पालन करना चाहिए. कत्याल की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले में ट्रंप के पहले के ज़्यादातर टैरिफ एक्शन को खारिज करने के तुरंत बाद आई. कोर्ट ने कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत अपने अधिकार का उल्लंघन किया है और इस बात की पुष्टि की कि टैक्स लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि वकील नील कत्याल कौन हैं.

नील कत्याल कौन हैं?

शिकागो में भारतीय इमिग्रेंट माता-पिता एक डॉक्टर और एक इंजीनियर के घर जन्मे कत्याल ने हाई-स्टेक्स कॉन्स्टिट्यूशनल लड़ाइयों के आस-पास अपना करियर बनाया है. वह डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट हैं और US सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क थे. 2010 में प्रेसिडेंट बराक ओबामा द्वारा एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए कत्याल ने सुप्रीम कोर्ट और देश भर में कोर्ट ऑफ अपील्स के सामने फेडरल सरकार का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सामने 50 से ज़्यादा केस लड़े हैं और माइनॉरिटी एडवोकेट्स के लिए रिकॉर्ड तोड़े हैं.

अभी मिलबैंक LLP में पार्टनर और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में पॉल सॉन्डर्स प्रोफेसर, कट्याल संवैधानिक और मुश्किल अपील केस में माहिर हैं. उनके पिछले केस में 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट की संवैधानिकता का बचाव करना, ट्रंप के 2017 के ट्रैवल बैन को चुनौती देना और बड़े पर्यावरण और राष्ट्रीय सुरक्षा विवादों में एकमत से फैसले जीतना शामिल है.

ट्रंप के 15% टैरिफ पर सवाल उठाया

कत्याल, जिन्होंने हाल ही में ट्रंप के पहले के ट्रेड उपायों के खिलाफ एक बड़ा केस जीता है, ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत नए 15% टैरिफ के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाया. उन्होंने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) ने पहले कोर्ट को बताया था कि सेक्शन 122 ट्रेड घाटे वाली स्थितियों के लिए सही नहीं है, जो बैलेंस-ऑफ-पेमेंट घाटे से अलग हैं.

X पर नील कत्याल ने किया पोस्ट

X पर एक पोस्ट में नील कत्याल ने लिखा प्रेसिडेंट के लिए 15 परसेंट कानून (sec 122) पर भरोसा करना मुश्किल लगता है, जबकि हमारे मामले में उनके DOJ ने कोर्ट को इसके उलट बताया था: न ही का यहां कोई साफ इस्तेमाल होता है, जहां प्रेसिडेंट ने इमरजेंसी घोषित करते समय जिन चिंताओं की पहचान की, वे ट्रेड डेफिसिट से पैदा होती हैं, जो कॉन्सेप्ट के हिसाब से बैलेंस-ऑफ-पेमेंट डेफिसिट से अलग हैं.

कत्याल ने आगे कहा कि अगर वह बड़े टैरिफ चाहते हैं, तो उन्हें अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए और कांग्रेस के पास जाना चाहिए. अगर उनके टैरिफ इतने अच्छे आइडिया हैं, तो उन्हें कांग्रेस को मनाने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. हमारे संविधान में यही चाहिए.

कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप के तेज़ी से टैरिफ बढ़ाने के कदमों के बाद यह आलोचना हुई. ट्रंप ने पहले सेक्शन 122 के तहत 150 दिनों तक के लिए टेम्पररी सरचार्ज के तौर पर 10% ग्लोबल टैरिफ जारी किया. फिर उन्होंने इसे पूरी तरह से मंज़ूर, और कानूनी तौर पर टेस्ट किए गए, 15% लेवल तक बढ़ा दिया, और ट्रुथ सोशल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बहुत ज़्यादा एंटी-अमेरिकन कहा.

Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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