Fatty Liver And Liver Cancer Risk: फैटी लिवर की बीमारी, जिसका हाल ही में नाम बदलकर मेटाबोलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज कर दिया गया है, दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन गई है
Fatty Liver And Liver Cancer Risk
अमेरिका के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर के अनुसार, MASLD एक ज़्यादा गंभीर स्थिति में बदल सकता है जिसे MASH (मेटाबोलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस) कहा जाता है. इस स्टेज पर, लिवर में सूजन आ जाती है और लिवर की कोशिकाएं खराब हो जाती हैं, जिससे लिवर फाइब्रोसिस और हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा का खतरा काफी बढ़ जाता है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ज़्यादातर मरीज़ों को इस स्थिति के बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि लिवर को काफी नुकसान नहीं हो जाता.
डॉक्टरों और न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, कुछ रोज़ाना की आदतें फैटी लिवर की बीमारी को और खराब कर देती हैं. इनमें शामिल हैं:
ज़्यादा मात्रा में चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स, चिप्स, बिस्कुट और फास्ट फूड खाने से लिवर में फैट तेज़ी से जमा होता है. एक्सपर्ट्स मेडिटेरेनियन डाइट अपनाने की सलाह देते हैं, जिसमें सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स, जैतून का तेल और मछली शामिल हैं. इस डाइट को लिवर के फैट को कम करने में फायदेमंद माना जाता है.
लंबे समय तक बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि की कमी से लिवर की फैट को प्रोसेस करने की क्षमता कमज़ोर हो जाती है. डॉक्टर हर हफ़्ते कम से कम 150 मिनट की हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ या 75 मिनट की ज़ोरदार एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना या फोन पर बात करते समय टहलना भी फायदेमंद हो सकता है.
मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल फैटी लिवर की बीमारी को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं. वजन कंट्रोल, पर्याप्त नींद और रेगुलर मेडिकल चेक-अप से इस जोखिम को काफी कम किया जा सकता है.
फैटी लिवर को अक्सर “साइलेंट बीमारी” कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण हमेशा साफ नहीं होते हैं. हालांकि, कुछ संकेतों में लगातार थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द, रूटीन टेस्ट में लिवर एंजाइम का बढ़ा हुआ लेवल, या स्कैन में लिवर का बढ़ा हुआ दिखना शामिल हो सकता है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि ज़्यादा जोखिम वाले लोगों को रेगुलर स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. अच्छी खबर यह है कि फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में काफी हद तक ठीक हो सकता है. शरीर के वजन में 5 से 10 प्रतिशत की कमी से भी लिवर की चर्बी में काफी सुधार देखा गया है. कई स्टडीज से पता चलता है कि कॉफ़ी पीने से भी खतरा कम हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लिवर को फायदा पहुंचाते हैं.
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