जब भी कुछ अच्छा खाने का मन करता है, तो पिज्जा का नाम लिस्ट में जरूर होता है. हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर पिज्जा का इतिहास क्या है? ये इटली की गलियों से भारत की प्लेट तक कैसे पहुंचा?
पिज्जा का इतिहास
Pizza History: बर्थडे पार्टी हो, दोस्तों के साथ गेट-टुगेदर हो या फिर रात में अचानक कुछ चटपटा खाने का मन करे, पिज्जा का नाम सबसे पहले याद आने लगता है. आज बच्चों से लेकर बड़े तक इसके दीवाने हैं लेकिन जिस पिज्जा को हम इतने शौक से खाते हैं, क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी शुरुआत आखिर कहां से हुई? दिलचस्प बात यह है कि पिज्जा भारत की डिश नहीं है. इसका सफर इटली से शुरू हुआ, अमेरिका पहुंचा और फिर भारत आकर इसके स्वाद में ऐसा बदलाव हुआ कि यह यहां भी लोगों की पसंद बन गया.
पिज्जा को समझने के लिए कई सदियां पीछे जाना होगा. पुराने समय में मिस्र, ग्रीस और रोम जैसी सभ्यताओं में लोग फ्लैट ब्रेड या रोटी पर तेल, हर्ब्स और मसाले लगाकर खाते थे. हालांकि, इसे आज वाला पिज्जा नहीं कहा जा सकता लेकिन इस तरह के खाने को पिज्जा की शुरुआती कड़ी माना जाता है. इसके बाद 18वीं शताब्दी में कहानी इटली के नेपल्स शहर तक पहुंची. उस समय यहां बड़ी संख्या में गरीब मजदूर रहते थे. उन्हें ऐसा खाना चाहिए था जो सस्ता होने के साथ-साथ पेट भी भर सके. ऐसे में फ्लैट ब्रेड पर टमाटर, लहसुन, तेल और चीज डालकर तैयार किया जाने लगा. धीरे-धीरे यह साधारण खाना लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया और पिज्जा ने एक अलग पहचान बनानी शुरू कर दी.
पिज्जा की कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ साल 1889 में आया. इटली के राजा उमबर्टो प्रथम और रानी मार्गेरीटा ने नेपल्स का दौरा किया. इस दौरान एक शेफ ने रानी के लिए खास पिज्जा तैयार किया. इस पिज्जा में टमाटर, चीज और तुलसी का इस्तेमाल किया गया था. खास बात यह थी कि इसके रंग इटली के राष्ट्रीय ध्वज जैसे दिखाई दे रहे थे लाल, सफेद और हरा. रानी को इसका स्वाद काफी पसंद आया. इसके बाद उनके सम्मान में इस पिज्जा का नाम ‘मार्गेरीटा पिज्जा’ रखा गया.
19वीं शताब्दी के अंत में इटली से अमेरिका पहुंचे इमिग्रेंट्स अपने साथ पिज्जा भी लेकर गए. वहां धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी. साल 1905 में न्यूयॉर्क में अमेरिका का पहला पिज्जेरिया खोला गया. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पिज्जा की लोकप्रियता और तेजी से बढ़ी. अमेरिका में कई नए पिज्जा आउटलेट्स खुले और इसके अलग-अलग रूप लोगों के बीच मशहूर होने लगे. यहीं से पिज्जा ने दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने का रास्ता बनाया.
भारत में पिज्जा का आगमन 1980 के दशक के बाद हुआ लेकिन उदारीकरण के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी. कई बड़े ब्रांड्स ने भारत में अपने आउटलेट्स खोले और पिज्जा घर-घर तक पहुंचने लगा. हालांकि, भारत आने के बाद पिज्जा का स्वाद भी बदल गया. भारतीयों ने इसे अपने स्वाद के हिसाब से ढाल लिया. पनीर मखनी, बटर चिकन और तंदूरी जैसी टॉपिंग्स के साथ पिज्जा के देसी फ्लेवर तैयार किए गए.
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