Science Behind Rituals: भारत में पुराने समय से ही सूर्यदेव और शिवलिंग की पूजा का विधान है. इसलिए आज भी लोग सुबह-सुबह सूर्यदेव और शिवलिंग को जल अर्पित करके फूल, बेलपत्र अर्पित करते हैं. इसके पीछे ज्यादातर लोगों की गहरी आस्था छिपी होती है, लेकिन सूरज और शिवलिंग को जल चढ़ाने के पीछे साइंस की थ्योरी है. इससे आपकी हेल्थ को भी बेनेफिट मिलते हैं, यहां जानिए कैसे-
शिवलिंग और सूर्यदेव को जल क्यों चढ़ाते हैं लोग, आस्था के पीछे छिपी है साइंस की इंट्रस्टिंग थ्योरी!
Science Behind Rituals: हिंदू धर्म की ज्यादातर मान्यताएं विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती हैं. बेशक लोग आस्था और विश्वास रखते हुए भगवान की पूजा आराधना करते हैं, लेकिन हर एक काम के पीछे लॉजिक और साइंस होता ही है. जो लोग सुबह-सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करते हैं, शंकर के शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं वो शायद न जानते हों, लेकिन ऐसा करने से आंखों की दृष्टि और शरीर का संतुलन कायम होता है. यहां जानिए विस्तार से-
हमारे घर में आज भी कई सदस्य ऐसे होंगे, जो सुबह सूर्यदेव को जल जरूर अर्पित करते हैं. इसके पीछे उनकी गहरी आस्था हो सकती है, लेकिन आज इसका कारण जान लीजिए. स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीता वर्मा ने अपने ब्लॉग में बताया है कि सूर्योदय के समय सूरज की किरणें तिरछी होती हैं, जो विटामिन-डी का बेहतरीन स्रोत होती हैं. ये हड्डियों की मजबूती और सेहत के लिए भी जरूरी है. इसलिए सूर्योदय के समय सूर्यदेव को जल देने का प्रावधान है.
हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आचार्य रवींद्र भारद्वाज ने भी सूर्य को जल चढ़ाने से जुड़े फायदे बताए हैं, जिसके मुताबिक, हमारे शरीर में रंगों का संतुलन बिगड़ने से इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में सूर्योदय के समय सूर्य को जल चढ़ाने से शरीर को विटामिन डी की एंटीबैक्टीरियल डोज मिलती है. इस दौरान सूर्य की किरणों को एकाग्रता से देखने पर आंखों को तरावट मिल जाती है.
हिंदू धर्म में शिवलिंग को भगवान शिव का प्रतीक मानते हैं और इसी आस्था के साथ उन पर जल, दूध, बेलपत्र और भांग धतूरा अर्पित किया जाता है. इसके पीछे का साइंस समझाते हुए आचार्य रवींद्र भारद्वाज ने बताया कि शिवलिंग अपने आप में न्यूक्लीयर रिएक्टर का प्रतीक है. पुराणों में शिवलिंग को ब्रह्मांड का प्रतिनिधि बताया गया है. भारत के बड़े ज्योतिर्लिंगों के आस पास सबसे ज्यादा न्यूक्लिएयर एक्टीवनेस दर्ज की है. ऐसे में दूध, जल, भांग और धतूरा आदि रेडियो तरंगों को अवशोषित करते हैं.
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