India News (इंडिया न्यूज), Mahakaleshwar Temple: मध्य प्रदेश में उज्जैन के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की आस्था का सागर उमड़ पड़ा। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर बाबा महाकाल का विशेष पूजन और भस्म आरती की गई। पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर प्रातः 4 बजे मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद पंचामृत स्नान के साथ भगवान का भव्य शृंगार किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग किया गया।
Mahakaleshwar Temple
बाबा महाकाल की भस्म आरती में उन्हें सूर्य, चंद्र और त्रिपुंड का विशेष शृंगार किया गया। भस्म रमाने के बाद भगवान को रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। भक्तों ने इस दिव्य दर्शन का लाभ लिया और मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। भस्म आरती उज्जैन की प्रमुख परंपराओं में से एक है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
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इस वर्ष श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा नौ दिवसीय नारदीय कीर्तन का आयोजन किया गया है। पुणे से आए राष्ट्रीय कीर्तनकार आयुर्वेदाचार्य डॉ. अजय अपामार्जने इस कीर्तन का नेतृत्व कर रहे हैं। यह परंपरा पिछले 115 वर्षों से चली आ रही है। हरिकीर्तन प्रतिदिन सायं 5 से 6 बजे मंदिर परिसर के नवग्रह मंदिर के पास संगमरमर के चबूतरे पर हो रहा है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। 25 फरवरी 2025 तक भगवान महाकाल विभिन्न स्वरूपों में दर्शन देंगे और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि महापर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। श्री महाकालेश्वर मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह आस्था, भक्ति और परंपरा का संगम भी है। श्रद्धालु इस पावन नगरी में पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं।श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती और हरिकीर्तन का दिव्य आयोजन
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