हाल ही में एक शिक्षक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर वायरल इस वीडियो में एक शिक्षक कुत्ते के रोने के पीछे के वैज्ञानिक कारण को आसान भाषा में समझाते हैं और कुत्तों के इस व्यवहार का स्पष्टीकरण देते हैं.
आपने अक्सर रात में नोटिस किया होगा कि कुत्ते रोने लगते हैं. कई लोग इसे अपशकुन भी मानते हैं. लेकिन हाल ही में एक शिक्षक ने इसे लेकर भ्रम को दूर किया है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर वायरल इस वीडियो में एक शिक्षक कुत्ते के रोने के पीछे के वैज्ञानिक कारण को आसान भाषा में समझाते हैं और कुत्तों के इस व्यवहार का स्पष्टीकरण देते हैं.
शिक्षक वीडियो में बताते हैं कि कुत्ते अक्सर जो रात में रोते हैं, उसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं. पहला तो ये कि कुत्तों को पंजों की सहायता से सीस्मोग्राफिक हलचल का पता चल जाता है. इसलिए जब पृथ्वी के कोई ऐसी हलचल होती है तो वो उनको डिस्टर्ब करती है, जिसकी वजह से कुत्ते रोने लगते हैं. इसके अलावा शिक्षक ने बताया कि कुत्ते है फ्रीक्वेंसी की आवाज सुन सकते हैं. रात में जब चूहे एक्टिव होते हैं तो वो आपस में बातें करते हैं, जिसकी ध्वनि 8000 से 10000 हर्ट्ज़ अल्ट्रासोनिक फ्रीक्वेंसी पर होती है. इस वजह से भी कुत्ते परेशान हो जाते हैं. साथ ही टीचर ने वीडियो में ये भी बताया कि रात में ही चमगादड़ भी एक्टिव होते हैं जो काफी उच्च आवृत्ति की अल्ट्रा सोनिक तरंगें उत्पन्न करते हैं और इससे भी कुत्तों की नींद में व्यवधान पड़ता है.
शिक्षक ने बताया कि नींद डिस्टर्ब होने की वजह से कुत्ते के अमाग्डेला और हाइपोथैलेमस क्षेत्र में इमोशनल सेंटर हिल जाता है, जिसकी वजह से वो रोने लगते हैं. साथ ही टीचर ने उनके पूर्वजों से कनेक्शन जोड़ते हुए भी बताया कि भेड़िये कुत्तों के पूर्वज हैं. तो रात में हूट करने या रोने की आदत के पीछे उनके अनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं.
कुत्ते अक्सर अपने मालिक की बात मानते हैं या जो सिखाया जाये जल्दी सीख लेते हैं क्योंकि कुत्ते अक्सर सुरक्षित महसूस करने और समूह की गतिविधियों में शामिल होने के लिए मनुष्यों का अनुसरण करते हैं. इसी तरह जब कुत्ते अचानक खुदाई करने लगे तो यह आमतौर पर सहज प्रवृत्ति (शिकार की तलाश, चीजों को छिपाना), ऊब, या ठंडी जगहों की खोज करने को प्रदर्शित करता है. इसी तरह कभी-कभी कुत्ते हांफते हैं. यह प्रक्रिया उनके शरीर का तापमान नियंत्रित करने में उनकी मदद करती है, लेकिन यह तनाव, दर्द या चिंता का संकेत भी हो सकता है.
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