सोशल मीडिया पर जूता चुराई की रस्म की रोचक वीडियो वायरल होती रहती हैं, जहां स्टेज या मंडप पर जा रहे दूल्हे को जूते जबरदस्ती छीन लिए जाते हैं या दुल्हे के भाई बहन दूल्हे के जूतों को उठाके भाग जाते हैं और इन्हें वापस लौटाने के बदले में अच्छा खासा नेग भी मांगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये रस्म सिर्फ मस्ती मजाक के लिए या कमाई के लिए नहीं होती, बल्कि जूता चुराई की रस्म के पीछे एक खास वजह है-
पगड़ी, तलवार, माला छोड़के.. 'दूल्हे का जूता' ही क्यों चुराती हैं सालियां, वजह जानकर कहेंगे 'वाह क्या बात है!'
शादियों में जूता चुराई की रस्म कई पीढ़ियों से चली आ रही है. इस रस्म में दुल्हन की बहनें दूल्हे यानी अपने जीजा जी के जूतों को मंडप से चुपचाप उठाके ले जाते है, जिसके लिए दुल्हन की बहनों को विदाई से पहले नेग मिलता है. इस रस्म का क्रेज बॉलीवुड फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ से ज्यादा बढ़ गया. फिल्म में ‘जूते दे दो, पैसो ले लो’…. गाना भी जूता चुराई की रस्म को बेहद रोमांचक तरीके से दर्शाता है, जिसमें दुल्हन की बहनें दूल्हे के जूते चुराने के लिए प्लानिंग करती है और दूल्हे के भाई जूते पहले ही छिपा देते हैं. हालांकि, इस फिल्म की तरह आजकल की शादियों में जूता चुराई की रस्म मस्ती मजाक में बदलती जा रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये महज एक रस्म नहीं है, इसके पीछे की वजह और भी हैरान कर देने वाली है.
भारतीय परंपरा में दूल्हे असली पहचान उसकी पगड़ी, तलवार और जूते से होती है. लेकिन चुराते सिर्फ जूता है, ऐसा इसलिए भी करते हैं, क्योंकि पगड़ी और तलवार को भारतीय परंपरा में शौर्य और सम्मान का प्रतीक मानते हैं, जिसके खोने या चोरी होने पर अपमानजनक हो सकता है. इस चीजों को भूल जाने पर व्यक्ति को मूर्ख या लापरवाह समझते हैं, जबकि दूसरी तरफ जूता व्यवहार का सूचक है, जिसके चोरी होने या खो जाने पर इंसान का असली व्यवहार देखने को मिल सकता है. इसलिए शादी में सालियां अपने जीजा जी का व्यवहार और मिज़ाज चेक करने के लिए जूते चुराती हैं.
कुछ ऐसी मान्यताएं के आधार पर दूल्हे को विष्णु और दुल्हन को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं. ऐसे में उनकी पादुकाओं को लांघना अच्छा नहीं मानते. यही वजह है कि पहले समय में दुल्हन के परिजन दूल्हे की पादुकाओं को उठाकर रख देते हैं. हालांकि शादी के कामों में दुल्हन के माता पिता व्यस्त रहते थे, इसलिए दुल्हन के भाई बहनों को ये जिम्मेदारी दी जाती थी, जहां दूल्हे की पादुकाओं को पूरे सम्मान के साथ उठाकर रख दिया जाता था और विदाई से पहले दूल्हे को पहलाते थे, लेकिन समय बदलने के साथ साथ ये जिम्मेदारी एक रस्म बन गई और सालियां अपने जीजाजी के जूते संभालने के बजाए चुपचाप उठाके के ले जाने लगीं और वापस करने से पहले नेग मांगने लगीं.
अक्सर ऐसा कहा जाता है कि शादी में दूल्हे की उदारता और जिंदादिली का टेस्ट लेने के लिए जूते चुराए जाते हैं, जबकि कुछ जूते चुराई की रस्म के पीछे दुल्हन के भाई बहन दुल्हे का पर्सनैलिटी टेस्ट करते हैं कि दूल्हा कितनी समझदारी और पेशेंस के साथ जूते वापस लेता है और बदले में क्या देता है? अब वो व्यवहार भी हो सकता है, बहन को खुश रखने का वादा या नेग भी हो सकता है.
जाहिर है कि शादी में जब दुल्हन की विदाई का समय करीब आ जाता है तो पूरा माहौल गममीन हो जाता है. इस समय दूल्हन के भाई बहन काफी उदास हो जाते हैं. इससे ठीक पहले माहौल जमाने के लिए जूते चुराई की रस्म की जाती है, जिससे जीजा, साली और दुल्हे के भाई बहन की नोंकझोंक होती है. एक तरफ मस्ती मजाक होता है, दूसरी तरफ दूल्हा अफने जूते वापस लेने के लिए बोलियां लगाता है. फिर सालियां दोनों पक्षों की सहमति से नेग डिसाइड करती है और जूते लौटा देती हैं.
आसान शब्दों में समझें तो जूता चुराई की रस्म दोनों परिवारों के बीच हिचकिचाहट को खोलने का एक तरीका भी है. क्योंकि इस रस्म के दौरान दोनों परिवार आपस में हंसी खुशी बातें शेयर करते हैं और सभी लोग खिलखिला उठते हैं.
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