मुलायम सिंह यादव कॉलेज पहुंचने से पहले दो बार क्यों नहाते थे? छात्र जीवन के पीछे का अनोखा संघर्ष जान चौंक जाएंगे
मुलायम सिंह यादव का जन्म इटावा में हुआ था
मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर, 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम सुघर सिंह और माता का नाम मूर्ति देवी था. 1954 में, महज़ 15 साल की कम उम्र में, मुलायम सिंह यादव ने जाने-माने नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के आह्वान पर 'नहर रेट आंदोलन' में हिस्सा लिया था यह एक ऐसा कदम था जिसके कारण उन्हें पहली बार जेल जाना पड़ा.
मुलायम सिंह यादव आठ किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते थे
मुलायम का शिकोहाबाद से गहरा जुड़ाव था; उन्होंने अपनी पढ़ाई वहीं के स्थानीय आदर्श कृष्ण कॉलेज से की थी. कहा जाता है कि मुलायम हर दिन अपने गांव, इटोली से आठ किलोमीटर पैदल चलकर अपने स्कूल पहुंचते थे. उनके साथ हमेशा साथियों का एक समूह होता था. यहीं पर मुलायम ने न केवल कुश्ती की बारीकियों में महारत हासिल की, बल्कि राजनीति के मूलभूत दांव-पेच भी सीखे.
मुलायम सिंह यादव कुश्ती के बाद करते थे पहला स्नान
अपनी किशोरावस्था से ही, मुलायम सिंह यादव कुश्ती के बहुत बड़े शौकीन थे और अपने आप में एक ज़बरदस्त पहलवान थे. वह सुबह बहुत जल्दी उठकर खेतों में या किसी पारंपरिक मिट्टी के अखाड़े (कुश्ती के मैदान) में कुश्ती का अभ्यास करते थे. इस ज़ोरदार कसरत और कुश्ती के सत्र के बाद, वह अपने शरीर पर जमा धूल और पसीना धोने के लिए पहला स्नान करते थे.
मुलायम सिंह यादव कॉलेज जाने से पहले करते थे दूसरी बार स्नान
हर दिन, वह अपने गांव, इटोली से शिकोहाबाद में स्थित आदर्श कृष्ण कॉलेज (ए.के. कॉलेज) तक लगभग 8 किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे. ग्रामीण इलाकों के कच्चे रास्तों पर इतनी लंबी दूरी तय करने के कारण, उनका शरीर धूल और मिट्टी से पूरी तरह सन जाता था. नतीजतन, शिकोहाबाद पहुंचने पर, कॉलेज कैंपस में दाखिल होने से पहले वह दूसरी बार नहाते थे, ताकि यह पक्का हो सके कि वह अपनी क्लास में साफ़-सुथरे और अच्छे दिखते हुए जा सकें.
मुलायम सिंह यादव का चरखा दांव
कॉलेज के दिनों में, मुलायम अक्सर अपने मुकाबलों के दौरान 'चरखा दांव' कुश्ती का एक खास घूमने वाला दांव का इस्तेमाल करते थे. चाहे करहल में होने वाले कुश्ती के मुकाबले हों या उनके छात्र जीवन के दौरान शिकोहाबाद में आयोजित होने वाले दंगल (कुश्ती टूर्नामेंट), जब भी कोई पहलवान मुलायम सिंह का सामना करने के लिए अखाड़े में उतरता था, तो वह अपने खास 'चरखा दांव' का इस्तेमाल करके अपने सबसे मज़बूत विरोधियों को भी कुछ ही मिनटों में चित कर देते थे.
मुलायम सिंह यादव का संघर्ष भरा जीवन
मुलायम सिंह का छात्र जीवन अनुशासन और कड़ी शारीरिक मेहनत से भरा था. उन्होंने शिकoहाबाद के ए.के. कॉलेज से 'बैचलर ऑफ़ टीचिंग' (BT) की डिग्री हासिल की ठीक उसी संस्थान से जहां उन्होंने राजनीति और कुश्ती, दोनों ही क्षेत्रों में अपने कौशल को निखारा था.