Mango Annakut Vadtal Dham: गुजरात के वड़ताल धाम से भक्ति और आस्था की एक बेहद खास तस्वीर सामने आई है. गर्मी के मौसम में जहां हर तरफ आम की मिठास छाई हुई है, वहीं भगवान को भी खास तरीके से आम का महाभोग लगाया गया. स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रसिद्ध तीर्थ वड़ताल धाम में इस बार भगवान के लिए 500 किलो केसर आम से भव्य ‘मैंगो अन्नकूट’ सजाया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.
मंदिर परिसर में हर तरफ आम की खुशबू फैली हुई थी और भगवान का दिव्य स्वरूप देखकर भक्त भावुक नजर आए. यह आयोजन शनिवारी अमावस्या के शुभ अवसर पर किया गया, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला.
भगवान को लगाया गया 500 किलो केसर आम का महाभोग
वड़ताल स्थित स्वामीनारायण मंदिर में भगवान के सामने 500 किलो चुनिंदा और शुद्ध केसर आम अर्पित किए गए. सिर्फ आमों का ढेर ही नहीं लगाया गया, बल्कि भगवान को आम रस और कटे हुए आम भी भोग के रूप में चढ़ाए गए.सनातन परंपरा में मौसम के अनुसार भगवान को फल अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस खास मैंगो अन्नकूट का आयोजन किया गया.बताया जा रहा है कि इससे पहले एकादशी के मौके पर यहां 2500 किलो तरबूज का भोग भी लगाया गया था, जिसने भक्तों का ध्यान अपनी ओर खींचा था.
भक्तों की आस्था ने बनाया आयोजन खास
इस विशेष भोग को भक्त स्नेहल प्रमोद भाई पटेल द्वारा भगवान को समर्पित किया गया. उनकी गहरी श्रद्धा और भक्ति के चलते यह अनोखा आयोजन संभव हो पाया.जैसे ही मंदिर के कपाट खुले और भगवान का आमों से सजा स्वरूप भक्तों के सामने आया, हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया. पीले रंग के रसीले केसर आमों के बीच विराजमान भगवान का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई दे रहा था.
दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
भगवान के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु वड़ताल धाम पहुंचे. कई लोग इस खास पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए.मंदिर परिसर में भक्ति, उत्साह और श्रद्धा का अनोखा माहौल देखने को मिला. भक्तों का कहना था कि ऐसा दृश्य उन्होंने पहले कभी नहीं देखा.
संतों ने दिया आशीर्वाद
इस आयोजन की सफलता पर वड़ताल मंदिर के चेयरमैन डॉक्टर संत वल्लभ दास स्वामी और मुख्य कोठारी देव प्रकाश दास स्वामी ने यजमान परिवार को आशीर्वाद दिया और उनके सुख-समृद्धि की कामना की.संतों ने कहा कि इस तरह के आयोजन केवल भक्ति ही नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भी माध्यम हैं.