Bhuvneshwar Kumar Bowling Performance: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में वापसी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही है. लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में लौटे भुवनेश्वर से नई गेंद के साथ विकेट निकालने और डेथ ओवरों में रन रोकने की उम्मीद थी. हालांकि, शुरुआती तीन मुकाबलों के आंकड़े उनकी मुश्किलों को बयां कर रहे हैं. उन्होंने 12 ओवर में 139 रन खर्च किए और सिर्फ एक विकेट हासिल किया.
पहले तीन मैचों में कैसा रहा भुवनेश्वर का प्रदर्शन?
न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के पहले मुकाबले में भुवनेश्वर कुमार को विकेट नहीं मिला. उन्होंने अपने चार ओवर में 49 रन दिए. इस मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 225 रन बनाए थे. भारतीय गेंदबाजों के लिए कीवी बल्लेबाजों को रोकना मुश्किल रहा और भुवनेश्वर भी रन गति पर लगाम लगाने में सफल नहीं हो सके.
दूसरे टी20 मुकाबले में भी उनकी गेंदबाजी में खास सुधार नजर नहीं आया. भुवनेश्वर ने चार ओवर में 50 रन खर्च किए और एक विकेट अपने नाम किया. इस तरह शुरुआती दो मैचों में ही उन्होंने 99 रन दे दिए थे. तीसरे मुकाबले के बाद उनके कुल आंकड़े 12 ओवर में 139 रन और एक विकेट तक पहुंच गए.
ये आंकड़े बताते हैं कि इस सीरीज में भुवनेश्वर को विकेट निकालने के साथ रन रोकने के मोर्चे पर भी संघर्ष करना पड़ा है.
भुवनेश्वर की सबसे बड़ी ताकत पर ही सवाल
भुवनेश्वर कुमार को अपने करियर में नई गेंद से स्विंग हासिल करने और सटीक लाइन-लेंथ के लिए पहचाना जाता रहा है. पावरप्ले में शुरुआती विकेट निकालना उनकी गेंदबाजी की अहम खासियत रही है. वह अनुभव के दम पर बल्लेबाजों को बांधकर रखने और दबाव बनाने की क्षमता भी रखते हैं.
लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में वह अपनी इन खूबियों का लगातार फायदा नहीं उठा पाए हैं. टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के आक्रामक रुख के बीच गेंदबाजों को अपनी गति, लेंथ और रणनीति में बदलाव करना पड़ता है. भुवनेश्वर के लिए भी यही चुनौती रही है.
क्या टीम इंडिया में उनकी जगह पर असर पड़ेगा?
लगातार महंगे साबित होने के बाद भुवनेश्वर कुमार के प्रदर्शन पर चर्चा होना स्वाभाविक है. टीम प्रबंधन उनके अनुभव और वापसी के बाद की लय को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय कर सकता है. हालांकि, केवल तीन मैचों के आंकड़ों के आधार पर उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के भविष्य पर अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.
भारतीय टीम के लिए भी यह जरूरी होगा कि गेंदबाजी में बेहतर नियंत्रण के साथ विरोधी बल्लेबाजों पर दबाव बनाया जाए. सीरीज के अगले मुकाबलों में भुवनेश्वर के पास अपनी गेंदबाजी में सुधार दिखाने का मौका होगा. उनकी वापसी का आकलन सिर्फ विकेटों की संख्या से नहीं, बल्कि रन रोकने, सही समय पर विकेट निकालने और टीम की जरूरत के मुताबिक प्रदर्शन करने से भी किया जाएगा.
फिलहाल, न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों में एक विकेट और 139 रन का आंकड़ा भुवनेश्वर के लिए चिंता का विषय जरूर है. अब देखना होगा कि वह आगामी मुकाबलों में अपनी पुरानी लय हासिल कर पाते हैं या नहीं.