<
Categories: बांग्ला

3 से 77 सीटों तक, बीजेपी बंगाल में TMC के लिए मुख्य चैलेंजर कैसे बनी, राज्य में स्टेबल वोट बैंक बनना क्यों है पार्टी के लिए अब भी बड़ी चुनौती? समझे पूरा गणित

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: 3 सीटों से 77 तक भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के लिए मुख्य चैलेंजर कैसे बनी, और एक स्टेबल वोट बेस बनाना उसकी सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? बंगाल अलग क्यों है? ऐसे में चलिए विस्तार से समझे जाति, समुदाय, रिफ्यूजी और शहरी-ग्रामीण चुनावी गणित.

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल में बहुत जल्द विधानसभा चुनाव होने वाले है और अगर बंगाल की राजनीति के बारे में बात करे तो, राज्य में लंबे समय तक दो बड़े दौरों से गुजरी है. सबसे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी की वामपंथी शासन जो कि साल 1977 से लेकर 2011 तक रहा और उसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दौर. इस राजनीतिक इतिहास के बीच बीजेपी का सफर बहुत छोटा या न के बराबर ही था. 

एक वक्त था जब बंगाल में बीजेपी का नाम कोई भी मुश्किल से लेता था, लेकिन आज वह राज्य के TMC की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है. लेकिन फिर भी मन में एक सवाल खड़ा हतो है कि क्या बीजेपी बंगाल में एक स्थायी और स्थिर वोट बेस बन पाएगी? बंगाल अलग क्यों है? ऐसे में चलिए विस्तार से समझे जाति, समुदाय, रिफ्यूजी और शहरी-ग्रामीण चुनावी गणित को.

बंगाल में बीजेपी का शुरुआती दौर कैसा था?

अगर बंगाल में बीजेपी के शुरुआती दौर की बात करें तो, 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में बंगाल का राजनीतिक प्रभाव काफी सीमित तौर पर था. उस समय राज्य की राजनिति मुख्य रूप से लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती थी. साल 2014 के लोकसभा चुनान में जब बीजेपी सत्ता में आई, तब भी बीजेपी बंगाल में कोई बड़ी ताकत नहीं थी. हालांकि इसी चुनाव में पार्टी को पहली बड़ी राजनितिक पहचान मिली, जब उसे लगभग 2 लोकसभआ सीटें और लगभग 17 प्रतिशत वोट शेयर बंगाल से हासिल हुए.

2016 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में तेजी से उभरी बीजेपी

साल 2016 में जब बंगाल विधानसभा चुनाव हुआ तब भी बीजेपी को सीमित सफलता मिली और उसे 3 सीट मिली, लेकिन पार्टी ने राज्य के कई हिस्सों में संगठन मजबूत करना शुरू कर दिया था. फिर आया 2019 लोकसभा चुनाव, जिसने बंगाल की राजनीति को बदल दिया. इस चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में 18 लोकसभा सीटें जी लीं और लगभग 40 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया. यह पहली बार था जब पार्टी सीधे तौर पर TMC के सामने एक मजबूत विपक्ष के तौर पर उभरी.

2021 विधानसभा चुनाव में कैसे बीजेपी ने 3 से 77 सीटों तक का सफर तय किया?

अब बात करते है, सबसे अहम बात की कि बीजेपी ने कैसे 3 से 77 सीटों तक का सफर तय किया. बीजेपी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 था. 2016 के विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी को महज 3 सीटें हासिल हुईस लेकिन 2021 में यह बढ़त 77 सीटों तक पहुंच गई. ममता ने उस दौरान यह भी कहा था कि बंगाल में खेला करना बीजेपी के लिए काफी मुश्किल है. जो उस वक्त काफी ममता बनर्जी का काफी लोकप्रिय डायलॉग बना खेला न होतो. जैसा कि ममता ने कहा कि बंगाल में खेला नहीं होगा और वह फिर से जीती और ममता सरकार ने अपनी सत्ता बरकरार रखी. लेकिन इस चुनाव के बाद बीजेपी राज्य में मुख्य तौर पर विपक्षी पार्टी बन गई.

बंगाल की राजनीति बाकि राज्यों के मुकाबले इतनी अलग क्यों है?

अगर हम पश्चिम बंगाल के चुनावी गणित के बारे में बात करें तो यह बाकि राज्यों से काफी अलग है. यहां चुनाव सिर्फ जाति के आधार पर तय नहीं होते, बल्कि समुदाय, शरणार्थी पहचान और शहरी-ग्रामीण संतुलन भी सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाते है.
जाति की राजनीति- बंगाल में यूपी और बिहार के मुकाबले जाति की राजनीति उतनी मजबूत नही है. यहां सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान अक्सर जातीय समीकरणों से ज्यादा असर डालती है.
समुदाय और धार्मिक ध्रवीकरण- बंगाल में करीब 27 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जिसका परंपरागत रूप से ममता सरकार को वोटा जाता है. जबकि हिंदू वोटों क ध्रुवीकरण की रणनीति बीजेपी ने अपनाई है.
रिफ्यूजी राजनीति- राज्य में बड़ी संख्या में बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थी, खासकर मतुआ समुदाय रहते हैं. बीजेपी ने नागरिकता संसोधन कानून (CAA) के जरिए इन समुदायों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है.
शहरी और ग्रामीण वोटिंग पोर्टन- बीजेपी की बात करें तो, पार्टी को ज्यादा समर्थन शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मिला है, जबकि TMC का वोट बैंक ग्रामीण इलाकों में काफी मजबूत है.

बीजेपी के लिए बंगाल में स्थायी वोट बेस क्यों चुनौती है?

बीजेपी ने राज्य में यूं तो तेजी से राजनीतिक विस्तार किया है, लेकिन उसके सामने अब भी स्थायी वोट बेस की एक बड़ी चुनौती है. जिसमें सबसे पहले आता है, TMC की तरह एक मजबूत संगठन बनाना, राज्य में बीजेपी के पास कुछ बड़े चेहरों का होना, क्योंकि स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर के नेताओं की कमी अक्सर महसूस होती है. कई विश्लेषकों का मानना है क बीजेपी को मिले कुछ वोट एंटी TMC है, जो कि स्थायी समर्थन में बदलना अभी भी बाकी है. TMC अक्सर बीजेपी को बाहरी पार्टी बताकर बंगाली अस्मिता का मुद्दा उठाती है, जो कि चुनावों में काफी असर डालती है.
Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

Share
Published by
Shristi S

Recent Posts

Homemade Shampoo: महंगे शैम्पू छोड़िए! गुड़हल से पाएं हेल्दी और चमकदार बाल; ऐसे बनता है रियल Shampoo

Homemade Shampoo: बालों का झड़ना आजकल हर उम्र के लोगों की आम समस्या बन गई…

Last Updated: July 31, 2026 13:55:47 IST

Atifa Arshad’s Spider-Man Saree: देसी स्टाइल में स्पाइडर-मैन का जादू, लंदन की क्रिएटर का लुक हुआ वायरल

Spider-Man Saree Look: ज़ेंडाया ने 'मेथड ड्रेसिंग' में महारत हासिल कर ली है. उन्होंने हॉलीवुड…

Last Updated: July 31, 2026 13:40:24 IST

अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, अब पेंशन में कितना पैसा देगी BCCI, और क्या क्या मिलेंगी सुविधाएं?

भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को 30 जुलाई को अलविदा…

Last Updated: July 31, 2026 12:46:51 IST

School Holiday on 31st July 2026? बारिश के कारण क्या कल बंद रहेंगे स्कूल, जानें अपने राज्य का हाल

31 July 2026 School Holiday Update: भारी बारिश की चेतावनी के बीच क्या 31 जुलाई…

Last Updated: July 30, 2026 22:42:08 IST

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम सैलरी पर सरकार का बड़ा बयान, जानिए क्या बदली शर्तें?

8th Pay Commission के तहत फिटमेंट फैक्टर और बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांगों पर सरकार…

Last Updated: July 30, 2026 21:59:09 IST