Durg Opium Farming: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती करने का बड़ा मामला सामने आया है. जिले के सामोदा गांव में करीब साढ़े 9 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती किए जाने का खुलासा हुआ है. जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस पूरे मामले का भंडाफोड़ किया है.
9.5 एकड़ में हो रही थी अफीम की खेती
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. दुर्ग जिले के समोदा गांव में करीब नौ एकड़ खेत में अफीम की फसल लहलहाती हुई पाई गई, जिसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. खेत में लगे अफीम के पौधों में गोल-गोल फल भी आ चुके थे. इन फलों पर चीरा लगाने से सफेद तरल पदार्थ निकलता है, जो बाद में अफीम के रूप में तैयार होता है. हालांकि जानकारी के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जमीन के मालिक को हिरासत में ले लिया है. जानें पूरा मामला.
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में समोदा गांव का बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक खेत को छिपाने के लिए उसके चारों ओर बाउंड्री वॉल और गेट लगाया गया था. सुरक्षा के लिए वहां बाउंसर भी तैनात किए गए थे. खेत में मक्का, पपीता और केला की फसल के बीच अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि बाहर से देखने पर यह सामान्य खेती लगे.
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि करीब तीन दिन पहले अफीम के फल कंटेनर के जरिए कहीं और भेज दिए गए थे. गांव के लोगों का कहना है कि यहां पिछले करीब चार साल से अफीम की खेती हो रही थी, लेकिन इसकी जानकारी किसी को नहीं थी. पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर खेत की नाप-जोख कराई, जिसमें करीब 9.5 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती की पुष्टि हुई. मामले में जमीन के मालिक और भाजपा से जुड़े नेता विनायत तमराकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
बताया जा रहा है कि इस खेती के लिए मध्य प्रदेश के खंडवा से मजदूर बुलाए गए थे, जबकि कपास की फसल की देखरेख के लिए राजस्थान के मजदूरों को लगाया गया था. हालांकि, पुलिस ने दो राजस्थानी मजदूरों को भी हिरासत में लिया है. दुर्ग के एएसपी मणि शंकर चंद्रा के अनुसार यह मामला उस समय सामने आया, जब होली के दिन बच्चों द्वारा खींची गई एक फोटो गांव के व्हाट्सएप ग्रुप में डाली गई. इसके बाद गांव के सरपंच अरुण गौतम ने गूगल पर फोटो का मिलान किया, जिससे अफीम की खेती का शक हुआ और पुलिस को सूचना दी गई.
ग्रामीणों के अनुसार यह खेती विनायक ताम्रकार, उसके भाई विमल और ब्रजेश ताम्रकार द्वारा संचालित की जा रही थी. वहीं जमीन प्रीति बाला और मधुमति ताम्रकार के नाम पर पंजीकृत बताई जा रही है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जारी है.
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