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Delhi: कोमा में पड़े सेना के जवान के स्पर्म को रखा जाएगा सुरक्षित, पत्नी ने की थी मांग, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

Delhi Latest News: दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी लगाकार महिला ने पति का स्पर्म निकालने और उसे सुरक्षित रखने की अनुमति देने की मांग की थी, ताकि वह आईवीएफ इलाज करवा सके. इस अर्जी पर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है.

Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने कोमा में पड़े सैनिक के स्पर्म को सुरक्षित रखने की याचिका पर अपना फैसला सुना दिया है. इस तरह लंबे समय से कोम में पड़े भारतीय सेना के एक जवान के स्पर्म निकालने और उसे सुरक्षित करने की अनुमति की कोर्ट की ओर से मिल गई है. जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने फैसले में कहा कि जवान ने अपनी पत्नी के साथ आईवीएफ इलाज करवाने के लिए पहले ही सहमति दे दी थी, जिसे असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलाॅजी (रेगुलेशन) एक्ट-2021 के तहत एक वैध सहमति माना जाएगा. 

पीठ ने कहा कि पत्नी को सिर्फ इस आधार पर इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि पति की लिखित सहमति मौजूद नहीं थी. अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया, हालांकि, अन्य कानूनी जरूरतों और पति की मेडिकल स्थिति पर भी निर्भर करेगी.

महिला ने अर्जी लगाकर की थी ये मांग

बता दें कि अदालत ने यह आदेश जवान की पत्नी की अर्जी पर दिया. महिला ने पति का स्पर्म निकालने और उसे सुरक्षित रखने की अनुमति देने की मांग की थी, ताकि वह आईवीएफ इलाज करवा सके.

महिला के पति को जुलाई-2025 में जम्मू-कश्मीर में तैनाती के दौरान सिर में गंभीर चोट लगी थी और तब से वह लगातार कोमा में हैं. इस घटना से पहले दोनों ने आईवीएफ इलाज करवाने का फैसला कर लिया था और इसके लिए जरूरी प्रक्रियाएं भी शुरू कर दी थीं.

सेना की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड ने क्या कहा?

हालांकि, यह प्रक्रिया बीच में ही रुक गई, क्योंकि पति एआरटी एक्ट की धारा-22 के तहत नई लिखित सहमति देने की स्थिति में नहीं थे. वहीं सेना की ओर से गठित एक मेडिकल बोर्ड ने अपनी राय देते हुए कहा कि स्पर्म निकालना तकनीकी रूप से तो संभव है, लेकिन उससे जीवित स्पर्म मिलने की संभावना बहुत ही कम है.

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि महिला और उसके पति ने अपनी मर्जी से आईवीएफ इलाज और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को अपनाने का फैसला किया था और यह बात भी स्वीकार की गई है कि उन्होंने इस इलाज को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदम भी उठाए थे.

कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की सहमति को उसके पति की ओर से दी गई वैध सहमति माना जाए. अदालत ने कहा कि प्रतिवादी अधिकारी केवल इस आधार पर याचिकाकर्ता को इस अधिकार से वंचित नहीं कर सकते कि याचिकाकर्ता के पति की लिखित सहमति उपलब्ध नहीं है. अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी.

Hasnain Alam

हसनैन आलम, iTV Network में चीफ सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. वह inkhabar.com और indianews.in हिंदी वेबसाइट की टीम लीड करते हैं. 9 साल से अधिक समय से पत्रकारिता में हैं. राजनीति, खेल और मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा और हेल्थ बीट पर अच्छी पकड़ है. इंडिया न्यूज़ से पहले ABP News और NYOOOZ जैसे संस्थानों में काम किया है.

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