Delhi Liquor Policy: दिल्ली में अब शराब खरीदने के लिए दुकान पर पहुंचकर ब्रांड तलाशने की जरूरत कम हो सकती है. पसंदीदा ब्रांड चाहिए तो पहले मोबाइल उठाइए, ऐप पर उपलब्धता देखिए, एडवांस पेमेंट कीजिए और फिर दुकान से अपना ऑर्डर ले लीजिए. यानी शराब की खरीदारी को भी डिजिटल बनाने की तैयारी है. दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) ने इसके लिए ‘दिल्ली लिकर बुकिंग’ ऐप तैयार किया है. हालांकि इस सुविधा ने लोगों की सहूलियत बढ़ाने के साथ-साथ राजनीति में भी नया विवाद खड़ा कर दिया है.
पहले ऐप पर बुकिंग
इस ऐप के जरिए ग्राहक DSIIDC की शराब की दुकानों पर उपलब्ध ब्रांड देख सकते हैं और अपनी पसंद की शराब पहले से रिजर्व कर सकते हैं. इसके लिए ऑनलाइन भुगतान करना होगा. इसके बाद संबंधित दुकान पर जाकर ऑर्डर लेना पड़ेगा यानी बुकिंग मोबाइल से होगी लेकिन बोतल लेने के लिए दुकान तक जाना ही होगा. अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में DSIIDC की करीब 210 शराब की दुकानें हैं. फिलहाल इस सुविधा को लोगों से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं मिली है. इसकी एक वजह यह भी बताई गई है कि कई ग्राहकों को ऐप के बारे में जानकारी ही नहीं है.
क्या होगा फायदा?
अब सवाल यह है कि जब शराब लेने के लिए दुकान पर जाना ही है, तो ऑनलाइन बुकिंग से कितनी परेशानी कम होगी? हां, इतना जरूर है कि दुकान पर पहुंचने से पहले पसंदीदा ब्रांड का स्टॉक चेक करने का विकल्प मिल जाएगा. हालांकि, यह सुविधा केवल उन्हीं ब्रांडों के लिए है, जो संबंधित DSIIDC दुकान पर उपलब्ध हैं.
खरीदारी की सीमा वही
ऐप आने से शराब खरीदने के नियम नहीं बदले हैं. मौजूदा सीमा के मुताबिक, एक व्यक्ति अधिकतम 9 लीटर व्हिस्की और 18 लीटर बीयर खरीद सकता है. दिल्ली में 700 से अधिक शराब की दुकानें चार सरकारी एजेंसियों के जरिए संचालित होती हैं. इनमें DSIIDC के अलावा दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम, दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम और दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर शामिल हैं.
आबकारी नीति पर राजनीति
डिजिटल बुकिंग की इस व्यवस्था पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए हैं. पार्टी नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने योजना को जनविरोधी बताते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से इसे 24 घंटे के भीतर वापस लेने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि फैसला नहीं बदला गया तो भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा. वहीं, कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी योजना की उपयोगिता पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग के बाद भी ग्राहक को दुकान पर जाना होगा, ऐसे में ट्रैफिक और दुकानों पर होने वाली परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी.