Delhi Police: दिल्ली में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के बयान के मुताबिक, वीडियो में एक प्रदर्शनकारी महिला पर कथित तौर पर हमला करते हुए कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं. वीडियो के व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया. हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक कथित पीड़ित महिला या किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन की ओर से इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है. इसके बावजूद वीडियो के वायरल होने और आरोपियों के दिल्ली एनसीआर से बाहर निकलने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने चारों को हिरासत में लिया.
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो
पुलिस के अनुसार, कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. इंडियन यूथ कांग्रेस, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े कई सोशल मीडिया हैंडल ने भी इसे रीपोस्ट किया. इसके साथ ही कथित तौर पर महिला पर हमला करते दिखाई देने वाले लोगों को निशाना बनाते हुए पोस्टर भी साझा किए गए. वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई.
शिकायत नहीं मिलने के बावजूद पुलिस ने क्यों की कार्रवाई?
पुलिस के बयान में कहा गया है कि अब तक कथित पीड़ित महिला या किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. हालांकि, पुलिस को ऐसी सूचना मिली थी कि आरोपी रात के दौरान दिल्ली एनसीआर क्षेत्र से बाहर निकलने और बाद में भूमिगत होने की योजना बना रहे हैं. इसी आशंका और वीडियो के तेजी से वायरल होने को देखते हुए पुलिस ने चारों लोगों का पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया.
चारों आरोपियों की हुई पहचान
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान 50 वर्षीय रमन सैनी, 32 वर्षीय विवेकानन्द उर्फ विवेक, 27 वर्षीय कपिल कुमार और 35 वर्षीय रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू के रूप में हुई है. पुलिस ने बताया कि जरूरत पड़ने पर दिन के दौरान मामले में आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है.
जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और आरोपियों के कथित तौर पर फरार होने की आशंका के आधार पर की गई है. फिलहाल, उपलब्ध बयान में शिकायत नहीं मिलने की बात भी कही गई है. ऐसे में घटना की परिस्थितियों, वीडियो में दिख रहे घटनाक्रम और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर पुलिस की आगे की कार्रवाई अहम होगी. आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.