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Home > देश > ना अंतिम संस्कार, ना विदाई… 4 साल तक पिता के शव को संभालती रही बेटी, क्यों था चमत्कार का इंतजार?

ना अंतिम संस्कार, ना विदाई… 4 साल तक पिता के शव को संभालती रही बेटी, क्यों था चमत्कार का इंतजार?

Mumbai News: मुंबई से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक पिता की 4 साल पहले मौत हो गई थी. हैरानी की बात ये है कि परिवार ने 4 साल तक उनका शव संभाल कर रखा. इस मामले ने सबको हैरान कर दिया है.

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Last Updated: September 30, 2026 16:23:56 IST

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Mumbai News: मुंबई के मलाड इलाके में एक बंद पड़े डे-केयर सेंटर का दरवाजा खुला, तो पुलिस के सामने जो मंजर था, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. अंदर एक फ्रीजर में करीब चार साल पुराना शव रखा था. पहली नजर में मामला किसी गंभीर अपराध की तरफ इशारा करता दिखा लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी हत्या या किसी साजिश की नहीं, बल्कि एक परिवार के गहरे भावनात्मक लगाव और भविष्य में चमत्कार की उम्मीद से जुड़ी निकली.

मामला मलाड ईस्ट के कुरार इलाके का है. पुलिस को बंद पड़े परिसर से तेज दुर्गंध आने की सूचना मिली थी. मौके पर पहुंची टीम ने जब तलाशी ली तो फ्रीजर के अंदर एक बुजुर्ग व्यक्ति का शव मिला. पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि उनकी मौत जून 2022 में हुई थी. परिवार के दस्तावेजों के मुताबिक उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और उस समय डॉक्टर ने मृत्यु प्रमाणित की थी.

मौत को स्वीकार नहीं कर पाया परिवार

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक की बेटी अपने पिता से बेहद भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई थी. पिता की मौत के बाद परिवार ने सामान्य तरीके से अंतिम संस्कार करने के बजाय उनके शव को सुरक्षित रखने का रास्ता चुना. परिवार भविष्य में शरीर को विदेश भेजकर लंबे समय तक संरक्षित रखने की संभावनाएं भी तलाश रहा था.

क्रायोनिक्स की जानकारी ले रहा था परिवार

पुलिस के मुताबिक परिवार ने क्रायोनिक्स के बारे में जानकारी जुटाई थी. इसमें मृत व्यक्ति के शरीर को बेहद कम तापमान पर संरक्षित करने की कोशिश की जाती है, इस उम्मीद के साथ कि भविष्य की तकनीक कभी शरीर या मस्तिष्क को हुए नुकसान की मरम्मत करने में सक्षम हो सकती है. हालांकि, आज तक किसी मृत इंसान को क्रायोनिक्स के जरिए सफलतापूर्वक दोबारा जीवित करने का प्रमाण नहीं है.

परिवार की मानसिक स्थिति भी जांच का हिस्सा

इस पूरे मामले में सबसे भावुक पहलू बेटी का अपने पिता को खोने के बाद उनकी मौत को स्वीकार न कर पाना बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार परिवार भावनात्मक रूप से इस कदर जुड़ा हुआ था कि वह शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहता था. यह फैसला उनके लिए महज शरीर को संरक्षित करने का नहीं, बल्कि पिता को अपने पास बनाए रखने की कोशिश जैसा था. हैरानी की बात ये है कि परिवार में एक डॉक्टर और एक वैज्ञानिक भी है, इसके बावजूद उन्होंने शव को इतने लंबे समय तक संभाल कर रखा. बताया जा रहा है कि परिवार शव को क्रायोनिक्स के लिए अमेरिका ले जाने की तैयारी में था.

पुलिस ने क्या कहा?

कुरार पुलिस ने फिलहाल किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि नहीं की है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक मौत के दस्तावेजों की जांच की जा रही है और मामले के कानूनी पहलुओं को समझने के लिए विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है. फिलहाल पुलिस ने कोई FIR दर्ज नहीं की है.

ये भी पढ़ें: Noida Sleeper Bus Rape Case: 11 ट्रैफिक चालान, CCTV कैमरा बंद; खिड़कियों पर पर्दे; 398 पन्नों की चार्जशीट; दिल्ली स्लीपर बस कांड में बड़ा खुलासा

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Mumbai News: मुंबई के मलाड इलाके में एक बंद पड़े डे-केयर सेंटर का दरवाजा खुला, तो पुलिस के सामने जो मंजर था, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. अंदर एक फ्रीजर में करीब चार साल पुराना शव रखा था. पहली नजर में मामला किसी गंभीर अपराध की तरफ इशारा करता दिखा लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी हत्या या किसी साजिश की नहीं, बल्कि एक परिवार के गहरे भावनात्मक लगाव और भविष्य में चमत्कार की उम्मीद से जुड़ी निकली.

मामला मलाड ईस्ट के कुरार इलाके का है. पुलिस को बंद पड़े परिसर से तेज दुर्गंध आने की सूचना मिली थी. मौके पर पहुंची टीम ने जब तलाशी ली तो फ्रीजर के अंदर एक बुजुर्ग व्यक्ति का शव मिला. पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि उनकी मौत जून 2022 में हुई थी. परिवार के दस्तावेजों के मुताबिक उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और उस समय डॉक्टर ने मृत्यु प्रमाणित की थी.

मौत को स्वीकार नहीं कर पाया परिवार

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक की बेटी अपने पिता से बेहद भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई थी. पिता की मौत के बाद परिवार ने सामान्य तरीके से अंतिम संस्कार करने के बजाय उनके शव को सुरक्षित रखने का रास्ता चुना. परिवार भविष्य में शरीर को विदेश भेजकर लंबे समय तक संरक्षित रखने की संभावनाएं भी तलाश रहा था.

क्रायोनिक्स की जानकारी ले रहा था परिवार

पुलिस के मुताबिक परिवार ने क्रायोनिक्स के बारे में जानकारी जुटाई थी. इसमें मृत व्यक्ति के शरीर को बेहद कम तापमान पर संरक्षित करने की कोशिश की जाती है, इस उम्मीद के साथ कि भविष्य की तकनीक कभी शरीर या मस्तिष्क को हुए नुकसान की मरम्मत करने में सक्षम हो सकती है. हालांकि, आज तक किसी मृत इंसान को क्रायोनिक्स के जरिए सफलतापूर्वक दोबारा जीवित करने का प्रमाण नहीं है.

परिवार की मानसिक स्थिति भी जांच का हिस्सा

इस पूरे मामले में सबसे भावुक पहलू बेटी का अपने पिता को खोने के बाद उनकी मौत को स्वीकार न कर पाना बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार परिवार भावनात्मक रूप से इस कदर जुड़ा हुआ था कि वह शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहता था. यह फैसला उनके लिए महज शरीर को संरक्षित करने का नहीं, बल्कि पिता को अपने पास बनाए रखने की कोशिश जैसा था. हैरानी की बात ये है कि परिवार में एक डॉक्टर और एक वैज्ञानिक भी है, इसके बावजूद उन्होंने शव को इतने लंबे समय तक संभाल कर रखा. बताया जा रहा है कि परिवार शव को क्रायोनिक्स के लिए अमेरिका ले जाने की तैयारी में था.

पुलिस ने क्या कहा?

कुरार पुलिस ने फिलहाल किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि नहीं की है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक मौत के दस्तावेजों की जांच की जा रही है और मामले के कानूनी पहलुओं को समझने के लिए विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है. फिलहाल पुलिस ने कोई FIR दर्ज नहीं की है.

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