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छोटे भाइयों की पत्नियों से रेप; मां ने बेटे के खिलाफ दी गवाही; जज ने किया ‘रामचरितमानस’ का जिक्र

Jodhpur Court Verdict: मां की गवाही से कोर्ट ने बड़े बेटे को अपने ही छोटे भाइयों की पत्नियों के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराया. इसके बाद 10 साल की सजा सुना दी.

Jodhpur Court Verdict: छत्तीसगढ़ की रहने वाली बहादुर कलारिन के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे, जिसने अपनी और बहू की इज्जत बचाने के लिए सगे बेटे की कुएं में धकेलकर हत्या कर दी थी. इससे मिलता-जुलता मामला राजस्थान के जोधपुर से आया है.  जोधपुर में एक सास ने अपनी बहुओं के साथ ‘गलत काम’ करने वाले बेटे को कोर्ट से सजा दिलवाई है. यह इसलिए भी संभव हो सका, क्योंकि मां ने ही अपने बेटे के खिलाफ गवाही दी. अब सोशल मीडिया पर लोग इस महिला (सास) की तारीफ कर रहे हैं.

कोर्ट ने दोषी शख्स को 10 साल जेल की सजा सुनाई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरा मामला जुलाई 2021 का है. स्थानीय पुलिस के मुताबिक, दर्ज शिकायत में सामने आया था कि एक आरोपी को अपने ही दो छोटे भाइयों की पत्नियों के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराया. इसके बाद दोषी को 10 साल जेल की सजा सुनाई. सजा सुनने के बाद जहां दोषी बेटा सहमा हुआ था,  वहीं मां के चेहरे पर संतोष का भाव था. ऐसा बहुत कम होता है जब कोई मां अपने ही बेटे के खिलाफ ऐसा सख्त निर्णय ले.

क्या था आरोप

जुलाई 2021 में जोधपुर के पीपाड़ थाने के एक गांव में परिवार की ओर से मिला शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया. इसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी (जेठ) ने परिवार की दो छोटी बहू के साथ दुराचार करने की कोशिश की, जबकि वह घर के कमरे में सो रही थी. डरी बहू अपने जेठ को दुराचार की कोशिश पर चिल्लाई तो सास की नींद टूट गई. इस पर डर कर बेटा भाग गया.  

पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की तो पता चला कि आरोपी जेठ ने कुछ समय पहले बड़ी बहू के साथ भी दुराचार की कोशिश की थी जब किसी काम से बाहर  गई थी. बड़ी बहू ने इस घटना के बारे में अपने पति को भी बताया था. उधर, लोकलाज और समाज में बदनामी के डर से यह घटना दबा दी गई. इसके बाद आरोपी का हौसला बढ़ गया. जब आरोपी ने छोटी बहू के साथ दोबारा ऐसी घटना होने के बाद दोनों बहुओं ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई. इसके बाद सारा मामला सामने आया. 

अहम मानी गई मां की गवाही

कोर्ट में सुनवाई के दौरान मां की गवाही अहम रही.  उसने अपनी बहुओं का साथ दिया. यहां तक कि खुद भी वह बहुओं के साथ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंची. इसके बाद कोर्ट में गवाही देने के दौरान भी सास अपने बयान पर टिकी रही. इसके बाद कोर्ट ने दोषी को अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराया और 10 साल की सख्त कैद और 85 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई.

पॉक्सो विशेष अदालत के न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने अपने फैसले में रामचरितमानस तथा कई श्लोकों  जिक्र किया. – ‘अनुजवधू भगिनी सुतनारी, कन्या सम एति चारि. एहि को देख कुदृष्टि से, ताहि बधे कछु पाप न होई.’ इसका मतलब है कि छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्र की पत्नी एवं स्वयं की पुत्री अपनी पुत्री के समान होती हैं. 

कौन थी बहादुर कलारिन?

बहादुर कलारिन का असली नाम कलावती था. कलावती को छत्तीसगढ़ की एक ऐतिहासिक और लोक-वीरंगना माना जाता है. बहादुर कलारिन के बारे में कहा जाता है कि उसने नारी सम्मान और न्याय के लिए अपने पुत्र छचान छाड़ू की हत्या कर दी, इसमें उसने अपनी बहू की मदद ली. बहुत कम लोग जानते होंगे की छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के चिरचारी गांव में स्थित उनकी स्मृति में ‘बहादुर कलारिन की माची’ (मंदिर) को राज्य सरकार द्वारा संरक्षित किया गया है. यहां पर बहादुर कलारिन की हर साल पूजा की जाती है.

चर्चित लोककथा के अनुसार, कलावती का पुत्र छछान मानसिक रूप से विकृत था और वह गांव की हर महिला से शारीरिक संबंध बनाता था. कलावती ने पुत्र छछान की शादी कर दी, लेकिन वह नहीं माना. एक दिन उसने अपनी मां को भी गलत नजरिये से देखा. इस पर डरी मां ने अपनी बहू से योजना बनाकर मिर्च-मसाले वाले खाना बनाया.

पूरे गांव  में सूचना दे दी दी कि कोई छछान को पानी ना दे. ऐसा हुआ. मिर्च-मसाले वाले खाना खाते ही छछान पानी मांगने लगा. मां ने बताया कि घर पर पानी नहीं है. छछान पूरे गांव में घूमा,लेकिन उसे पानी नहीं मिला. आखिर में कलावती अपने बेटे को कुंए के पास लेकर गई. जैसे ही पानी के लिए छछान झुका तो मां और बहू ने छछान को कुंए में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. 

JP YADAV

जेपी यादव डेढ़ दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में समान रूप से पकड़ रखते हैं. मनोरंजन, साहित्य और राजनीति से संबंधित मुद्दों पर कलम अधिक चलती है. अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान, लाइव टाइम्स, ज़ी न्यूज और भारत 24 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.कई बाल कहानियां भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं. सामाजिक मुद्दों पर 'रेडी स्टडी गो' नाटक हाल ही में प्रकाशित हुआ है. टीवी और थिएटर के प्रति गहरी रुचि रखते हुए जेपी यादव ने दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक 'गागर में सागर' और 'जज्बा' में सहायक लेखक के तौर पर योगदान दिया है. इसके अलावा, उन्होंने शॉर्ट फिल्म 'चिराग' में अभिनय भी किया है. वर्तमान में indianews.in में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत हैं.

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