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इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत, ‘इंडियन स्टेट लड़ाई’ वाले बयान पर नहीं होगी FIR, याचिका खारिज

Rahul Gandhi Statement Indian State: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिमरन गुप्ता की एक याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी. यह मांग राहुल गांधी के उस बयान को लेकर की गई थी, जिसमें उन्होंने 'भारतीय राज्य' के खिलाफ लड़ने की बात कही थी.

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Last Updated: 2026-05-01 15:15:19

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Allahabad High Court Relief Rahul Gandhi: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिमरन गुप्ता की एक याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी. यह मांग राहुल गांधी के उस बयान को लेकर की गई थी, जिसमें उन्होंने ‘भारतीय राज्य’ (Indian State) के खिलाफ लड़ने की बात कही थी.
 
याचिकाकर्ता ने संभल जिले की चंदौसी कोर्ट द्वारा जारी एक आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने इस मामले में अपना फैसला पहले ही सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने पाया कि याचिका में कोई दम नहीं है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें पूरा मामला.
 

क्या है पूरा मामला?

जनवरी, 2025 को दिल्ली में नए कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के मौके पर, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और संवैधानिक संस्थाओं पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने जोर देकर कहा था कि कांग्रेस पार्टी का संघर्ष अब सिर्फ राजनीतिक पार्टियों तक ही सीमित नहीं रह गया है. उनके शब्दों में: अगर आपको लगता है कि हम BJP या RSS जैसे किसी राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं, तो आप स्थिति को समझ ही नहीं रहे हैं. BJP और RSS ने देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है. हमारी लड़ाई अब BJP, RSS और खुद ‘भारतीय राज्य’ के खिलाफ है.
 
इसके अलावा, इन संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश को यह पता ही नहीं है कि ये संस्थाएं असल में काम कर भी रही हैं या वे पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी हैं. उन्होंने मीडिया की आजादी को लेकर भी चिंता जताई थी. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी का बयान देश की संप्रभुता के लिए नुकसानदायक है और यह सीधे तौर पर ‘राज्य’ (State) के ही खिलाफ है.
 

संभल में उठी थी सबसे पहले FIR दर्ज करने की मांग

FIR दर्ज करने की मांग सबसे पहले संभल की MP/MLA कोर्ट में की गई थी. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शुरुआत में ही इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. इसके बाद, याचिकाकर्ता ने जिला न्यायाधीश की अदालत में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी. मई 2025 में, संभल ज़िला अदालत ने राहुल गांधी को एक नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें अप्रैल 2026 में अदालत में पेश होने या अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, 7 नवंबर 2025 को, चंदौसी में अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला ‘कमज़ोर’ है. इसके बाद, सिमरन गुप्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इसी फैसले को चुनौती दी.

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Allahabad High Court Relief Rahul Gandhi: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिमरन गुप्ता की एक याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी. यह मांग राहुल गांधी के उस बयान को लेकर की गई थी, जिसमें उन्होंने ‘भारतीय राज्य’ (Indian State) के खिलाफ लड़ने की बात कही थी.
 
याचिकाकर्ता ने संभल जिले की चंदौसी कोर्ट द्वारा जारी एक आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने इस मामले में अपना फैसला पहले ही सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने पाया कि याचिका में कोई दम नहीं है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें पूरा मामला.
 

क्या है पूरा मामला?

जनवरी, 2025 को दिल्ली में नए कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के मौके पर, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और संवैधानिक संस्थाओं पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने जोर देकर कहा था कि कांग्रेस पार्टी का संघर्ष अब सिर्फ राजनीतिक पार्टियों तक ही सीमित नहीं रह गया है. उनके शब्दों में: अगर आपको लगता है कि हम BJP या RSS जैसे किसी राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं, तो आप स्थिति को समझ ही नहीं रहे हैं. BJP और RSS ने देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है. हमारी लड़ाई अब BJP, RSS और खुद ‘भारतीय राज्य’ के खिलाफ है.
 
इसके अलावा, इन संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश को यह पता ही नहीं है कि ये संस्थाएं असल में काम कर भी रही हैं या वे पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी हैं. उन्होंने मीडिया की आजादी को लेकर भी चिंता जताई थी. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी का बयान देश की संप्रभुता के लिए नुकसानदायक है और यह सीधे तौर पर ‘राज्य’ (State) के ही खिलाफ है.
 

संभल में उठी थी सबसे पहले FIR दर्ज करने की मांग

FIR दर्ज करने की मांग सबसे पहले संभल की MP/MLA कोर्ट में की गई थी. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शुरुआत में ही इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. इसके बाद, याचिकाकर्ता ने जिला न्यायाधीश की अदालत में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी. मई 2025 में, संभल ज़िला अदालत ने राहुल गांधी को एक नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें अप्रैल 2026 में अदालत में पेश होने या अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, 7 नवंबर 2025 को, चंदौसी में अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला ‘कमज़ोर’ है. इसके बाद, सिमरन गुप्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इसी फैसले को चुनौती दी.

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