UP Election 2027: लखनऊ में बुधवार को बहुजन समाज पार्टी की बैठक हुई. ये बैठक सिर्फ चुनावी तैयारियों तक सीमित नहीं रही. उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अगली रणनीति तैयार कर रहीं मायावती ने पार्टी संगठन में एक और बड़ा बदलाव कर दिया. उन्होंने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दे दी है. इससे उन्होंने साफ कर दिया है कि परिवार के भीतर अब उनकी राजनीतिक पसंद किस दिशा में आगे बढ़ रही है.
यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं. बीएसपी अपने संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है. पार्टी की लखनऊ स्थित बैठक में यूपी के अलावा उत्तराखंड और पंजाब की चुनावी तैयारियों पर भी चर्चा हुई. अलग-अलग राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और संभावित उम्मीदवार बैठक में पहुंचे.
आकाश के बाद ईशान पर भरोसा
ईशान आनंद का नाम पिछले कुछ दिनों से लगातार बीएसपी की राजनीति में चर्चा में है. इससे पहले मायावती ने उन्हें यूपी और उत्तराखंड को छोड़कर करीब 15 राज्यों में संगठन की समीक्षा की जिम्मेदारी दी थी. ईशान को पार्टी के कामकाज की रिपोर्ट तैयार कर मायावती तक पहुंचानी थी. अब राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिलने से उनका पार्टी संगठन में कद और बढ़ गया है. यह बदलाव खास इसलिए है क्योंकि कुछ समय पहले तक आकाश आनंद को मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी और पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था. हालांकि पिछले कुछ सालों में आकाश को कई बार पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया गया और वापस भी लाया गया. सितंबर 2026 में मायावती ने उन्हें फिर पार्टी से अलग कर दिया.
परिवार को लेकर बदली रणनीति
ईशान को जिम्मेदारी देने का फैसला मायावती के हालिया बयानों के बीच आया है. 20 सितंबर को उन्होंने कहा था कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. परिवार में से सिर्फ ईशान को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा. मायावती ने अपने फैसले को पार्टी हित और कांशीराम की राजनीतिक परंपरा से जोड़कर भी समझाया था.
2027 की तैयारी पर नजर
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव बीएसपी के लिए संगठन को मजबूत करने की एक बड़ी परीक्षा भी है. पार्टी की हालिया बैठकों में बूथ स्तर तक संगठन, राज्यों में पार्टी की स्थिति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक लेने पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे में ईशान आनंद को मिली जिम्मेदारी को केवल पारिवारिक बदलाव के तौर पर नहीं बल्कि बीएसपी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है.