बंगाल चुनाव: बंगाल चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी ने कानून मंत्रालय अपने हाथ में ले लिया है. इसके पीछे 5 बड़ी वजहें बताई जा रही हैं. बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी अपने कानून मंत्री मलॉय घटक के काम से संतुष्ट नहीं हैं. और इनके कार्यों से टीएमसी के अंदर ही नाराजगी चल रही थी.
बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी ने कानून मंत्रालय अपने हाथ में लिया
West Bengal Assembly Elections: बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर किसी भी वक्त एलान हो सकता है. इस वजह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाह रही है. इसी कड़ी में चुनाव से पहले ठीक पहले ममता बनर्जी ने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया है. इन सबके बीच सबसे चौंकाने वाली बात है कि ममता बनर्जी ने कानून मंत्रालय अपने पास रखा है. बताया जा रहा है कि मंत्री मलॉय घटक से कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी ले ली गई है. अब उनके पास सिर्फ श्रम विभाग की जिम्मेदारी रहेगी.
इसके अलावा, बाबूल सुप्रीयो जो कि अब राज्यसभा सांसद के रूप में चुने जा चुके हैं. इसलिए अब वो कैबिनेट का हिस्सा नहीं रहेंगे. ऐसे में ममता बनर्जी ने बाबुल सुप्रियो के पास रहे सूचना प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक उद्यम जैसे विभाग की भी जिम्मेदारी ले ली है.
अब सवाल ये उठता है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी ने कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने हाथ में क्यों ले ली है? ऐसे में आइए इसके पीछे के 5 कारणों के बारे में बात करते हैं. इसके पीछे की सबसे पहली वजह यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मलॉय घटक के काम करे के तरीके से खुश नहीं थीं, तो करीब 5 वर्षों से कानून मंत्रालय संभाल रहे थे. सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक कानून मंत्री मलॉय घटक के काम करने के तरीके को लेकर टीएमसी के अंदर ही कुछ समय से नाराजगी थी.
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फ्रंट-फुट रोल निभा रही हैं. वह पार्टी संगठन और सरकार को मजबूत करना चाहती हैं. अनुभवी मलॉय घटक के बजाय खुद काम संभालना, कानूनी मामलों को तेजी से निपटाने के उनके इरादे को दिखाता है. इस बार ममता बनर्जी ने सीधे कानून विभाग की जिम्मेदारी संभाली है (अब वह कानून और न्याय मंत्री हैं), जो पहले घटक के पास था.
मलॉय घटक कथित कोयला तस्करी घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेेशालय (ईडी) और सीबीआई की जांच के दायरे में हैं. उन्होंने एजेंसी के सामने पेश होने में बार-बार देरी की है. जिसकी वजह से विवाद हुआ है. हाल ही में ईडी रेड और एसआईआर जैसे मामलों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी दांव-पेंच में लगी हुई दिखीं.
पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार केंद्र द्वारा भेजी गई सेंट्रल जांच एजेंसियों ईडी और सीबीआई की भूमिका के बारे में मुखर रही है. कानून मंत्रालय अपने पास रखकर वह इन एजेंसियों के खिलाफ कानूनी रणनीति को और असरदार तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ममता बनर्जी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे सीनियर नेताओं के पोर्टफोलियो को आसान बनाने के लिए अपने कैबिनेट और संगठन में बदलाव कर रही हैं. इस फेरबदल को ममता बनर्जी द्वारा 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने और कानूनी मोर्चे पर सरकार को और आक्रामक बनाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है.
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