ISRO: इसरो के प्रोग्राम डायरेक्टर इम्तियाज़ अहमद ने सोमवार को कहा कि भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.
इसरो बनायगा स्पेस स्टेशन
ISRO: इसरो के प्रोग्राम डायरेक्टर इम्तियाज़ अहमद ने सोमवार को कहा कि भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, साथ ही गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन पर भी काम चल रहा है. सीनियर ISRO अधिकारी ने बताया कि अभी लगभग 80 सैटेलाइट पर काम चल रहा है. यह वैज्ञानिक रिसर्च, इनोवेशन, आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, नेविगेशन और गगनयान मिशन के लिए ज़रूरी सिग्नल को पृथ्वी पर वापस भेजने में अहम भूमिका निभाएंगे. भारत के पहले स्वदेशी रूप से विकसित सैटेलाइट आर्यभट्ट की स्वर्ण जयंती के मौके पर अहमद ने कहा कि ऐसे मिशन भारत की अंतरिक्ष-आधारित क्षमताओं और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मज़बूत करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं.
उन्होंने कहा कि ISRO अभी कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसमें अर्थ ऑब्ज़र्वेशन मिशन, नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NVS), इंडियन डेटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (IDRSS), गगनयान और वीनस ऑर्बिटर मिशन शामिल हैं. ये सभी पहलें मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान, खोज और एप्लाइड टेक्नोलॉजी में भारत की बढ़ती मौजूदगी को दिखाती हैं. 19 अप्रैल, 1975 को आर्यभट्ट के ऐतिहासिक लॉन्च को याद करते हुए, अहमद ने कहा कि प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री के नाम पर रखा गया यह सैटेलाइट भारत की वैज्ञानिक यात्रा में एक मील का पत्थर था. शीत युद्ध के दौर में सीमित तकनीकी संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद, आर्यभट्ट की सफलता ने भविष्य के अंतरिक्ष मिशन की नींव रखी और ISRO को एक विश्व स्तर पर सम्मानित अंतरिक्ष एजेंसी के रूप में उभरने में मदद की.
उन्होंने कहा कि इसकी विरासत वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है. आर्यभट्ट की स्वर्ण जयंती मनाने के लिए, ISRO ने स्कूली छात्रों के लिए देशव्यापी आउटरीच कार्यक्रम शुरू किया है. इस पहल के तहत, बिहार में पहला कार्यक्रम सोमवार को समस्तीपुर के होली मिशन हाई स्कूल में आयोजित किया गया. इसमें पांच अलग-अलग 10+2 स्कूलों के छात्रों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान, छात्रों को ISRO के काम और अंतरिक्ष क्षेत्र में भविष्य के अवसरों के बारे में बताया गया. वैज्ञानिकों ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए और बताया कि उनमें से कई ने हिंदी मीडियम स्कूलों में पढ़ाई की थी. जिससे छात्रों को बड़े सपने देखने और अंतरिक्ष विज्ञान और टेक्नोलॉजी में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया. छात्रों के लिए क्विज का आयोजन भी किया गया, जिसमें उनसे अंतरिक्ष, रॉकेट से जुड़े सवाल पूछे गए.
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