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Arundhati Chaudhary: पिता IIT भेजना चाहते थे, बेटी ने चुनी बॉक्सिंग; अब कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत लिया गोल्ड

Arundhati Chaudhary: अरुंधति चौधरी का जन्म कोटा, राजस्थान में हुआ था. वह इंडियन आर्मी में हवलदार हैं. उनके पिता सुरेश चौधरी प्रॉपर्टी के बिजनेस में हैं और चाहते थे कि अरुंधति IIT में जाएं. हालांकि, अरुंधति स्पोर्ट्स में जाना चाहती थीं.

Arundhati Chaudhary: अरुंधति चौधरी ने एक बार फिर अपनी पहचान बनाई है. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 70 kg कैटेगरी में इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया. अरुंधति ने गोल्ड मेडल जीता. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने न्यूजीलैंड की मॉर्गन हेंडरसन को हराया. सेमीफाइनल में उन्होंने वेल्स की रोज़ी एक्लेस को हराया, जो मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन हैं. फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की बॉक्सर चैंटेल को हराकर गोल्ड जीता.

अरुंधति चौधरी बॉक्सर कैसे बनीं?

अरुंधति चौधरी का जन्म कोटा, राजस्थान में हुआ था. वह इंडियन आर्मी में हवलदार हैं. उनके पिता सुरेश चौधरी प्रॉपर्टी के बिजनेस में हैं और चाहते थे कि अरुंधति IIT में जाएं. हालांकि, अरुंधति स्पोर्ट्स में जाना चाहती थीं. उन्होंने शुरुआत में बास्केटबॉल खेला और अपनी टीम की कैप्टन भी रहीं, लेकिन 15 साल की उम्र में उन्होंने बॉक्सिंग को चुना. कोच अशोक गौतम के गाइडेंस में उन्होंने अपनी बॉक्सिंग को एक अलग लेवल पर पहुंचाया.

अरुंधति कभी हार नहीं मानतीं

अरुंधति चौधरी कभी हार नहीं मानतीं. बचपन में झगड़ालू और जिद्दी होने के बावजूद वह एक अच्छी खिलाड़ी बनीं. खास बात यह है कि अरुंधति को अपने करियर में कई गंभीर चोटें लगीं. उनकी कलाई में फ्रैक्चर हो गया और उन्हें प्लेट्स लगाने की ज़रूरत पड़ी. उन्हें टखने और सिर में भी चोट लगी. वह डेढ़ साल तक बाहर रहीं, लेकिन वापसी के बाद उन्होंने कई गोल्ड मेडल जीते. अरुंधति का असली लक्ष्य लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स में गोल्ड मेडल जीतना है. कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपनी तैयारी साबित कर दी है.

भारत की बेटियों ने बढ़ाया मान

भारत की महिला बॉक्सर्स ने कई गोल्ड मेडल जीते हैं. शनिवार, 1 अगस्त को अरुंधति चौधरी के अलावा साक्षी चौधरी ने 51 kg कैटेगरी में गोल्ड और प्रीति पवार ने 54 kg कैटेगरी में गोल्ड जीता. जैस्मीन लैम्बोरिया ने भी 57 kg कैटेगरी में गोल्ड जीता. प्रिया घनघस ने भी 60 kg वर्ल्ड कप में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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Divyanshi Singh

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