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पिज्जा-बर्गर में देसी मिर्च का प्रयोग, विदेशों में भारतीय मसालों की धूम; 2034 तक भारत के मसाला बाजार में आएगा तूफान!

Indian Taste In Foreign Foods: भारतीय व्यंजन और उनके मसालों के फैन सिर्फ इंडियन ही नहीं, बल्कि विदेशी भी हो रहे हैं. ये हम नहीं, बल्कि एक रिपोर्ट कह रही है. यानी कि अमेरिका, न्यूयॉर्क, लंदन और बर्लिन जैसी जगहों पर लोग भारतीय खानों जैसे स्वाद को पसंद कर रहे हैं. पढ़िए पूरी खबर.

Indian Spices in Foreign Market: दुनियाभर में फूड ट्रेंड तेजी से करवट ले रहा है. अब लोग ऐसा खाना चाहते हैं जो सिर्फ स्वाद न दे, बल्कि मन को प्रसन्न कर दे. भारतीय मसाले ऐसे होते हैं, जो लोगों के मुंह में पानी ला देते हैं. इतना ही नहीं, यहां के तीखे और चटपटे व्यंजन सिर्फ भारतीय गलियारों में ही प्रसिद्ध नहीं हैं. अब इनका स्वाद विदेशों तक पहुंच चुका है. हल्के और फीके स्वाद के शौकीन विदेशी अब खाने में सुकून नहीं, रोमांच की तलाश कर रहे हैं. यानी की विदेशी रेस्तरां में भी तीखे मसालों की गूंज हो रही है. जानिए क्या कहती है रिपोर्ट. 

क्या कहती है रिपोर्ट?

हाल ही में डेटासेंशियल- 2026 फूड ट्रेंड्स की एक रिपोर्ट आई है. इसके अनुसार भारतीय क्षेत्रीय व्यंजन खासतौर पर केरल और दक्षिण भारत के तीखे मसाले अब दुनिया के लिए नेक्स्ट बिग फ्लेवर बन चुके हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि पश्चिमी देशों के लोग इस स्वाद की डिमांड कर रहे हैं. इसके अलावा 
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट बताती है कि जैसे-जैसे एशियाई देशों का वैश्विक प्रभाव बढ़ा है, वैसे-वैसे उनके खाने की पहचान भी दुनिया ने अपनाई है. भारत से लेकर थाईलैंड तक के मसाले अब अंतरराष्ट्रीय किचन का अहम हिस्सा बन चुके हैं. इससे ये कहा जा सकता है भारतीय स्वाद अब विदेशियों को दीवाना बनाएंगे. 

पिज्जा-बर्गर में देसी मसाले हो रहे प्रयोग

रिसर्च बताती है कि उत्तरी अमेरिका और यूरोप में बढ़ती भारतीय आबादी ने वहां की फूड कल्चर की दिशा ही बदल दी है. बताया जा रहा है कि अमेरिका के 95% रेस्तरां अब तीखे व्यंजन परोस रहे हैं. इसके अलावा वहां के पिज्जा-बर्गर और स्नैक्स तक में भारतीय मिर्च का इस्तेमाल किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि युवाओं को लुभाने के लिए कंपनियां अब घोस्ट पेपर और कैरोलिना रीपर जैसी दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों का इस्तेमाल कर रही हैं.

बड़ी-बड़ी कंपनियां आ रहीं आगे

पेप्सिको और मैकडॉनल्ड्स जैसी ग्लोबल कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को भारतीय फ्लेवर के साथ दोबारा लॉन्च कर रही हैं. रिसर्चर्स इसे सेंसरी इंजीनियरिंग कह रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो आईएमएआरसी की एक रिपोर्ट कहती है कि साल 2034 तक भारतीय मसाला बाजार 6.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यह भारत के लिए खुशखबरी है. 

Kamesh Dwivedi

पिछले चार वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत. जी न्यूज और अमर उजाला डिजिटल में सेवाएं दे चुके हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ मनोरंजन की खबरों में रुचि. क्रिकेट, राजनीति के अलावा कविताएं लिखने और पढ़ने का भी शौक है.

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