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तांबे की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट, AI कंपनियों की चिंता ने बिगाड़ा बाजार का मूड

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Published: November 7, 2026 13:52:52 IST
Last Updated: November 7, 2026 13:52:52 IST

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Copper Price:  दुनियाभर के बाजारों में तांबे की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन तांबा सस्ता हुआ. इसकी बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी और इस सेक्टर में हो रहे भारी निवेश को लेकर बढ़ती चिंता है. निवेशकों को अब सवाल सताने लगा है कि AI पर कंपनियां जितना पैसा खर्च कर रही हैं, क्या भविष्य में उससे उतना फायदा मिल पाएगा?

इस चिंता का असर तांबे की मांग को लेकर बाजार की उम्मीदों पर भी पड़ रहा है. लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में तांबे का भाव जुलाई के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. मौजूदा रुझान के मुताबिक, इस सप्ताह इसकी कीमतों में करीब 2.9% की गिरावट आ सकती है. ऐसा हुआ तो मार्च के बाद तांबे के लिए यह सबसे खराब सप्ताह साबित होगा.

लगातार चौथे दिन टूटा तांबे का भाव

शुक्रवार को लंदन मेटल एक्सचेंज में तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट वाला तांबा 0.8% गिरकर 13,738 डॉलर प्रति टन पर आ गया. कारोबार के दौरान इसमें गिरावट और बढ़ गई थी. एक समय भाव 1.5% टूटकर 13,636 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया. 30 जुलाई के बाद यह तांबे का सबसे निचला स्तर है. हालांकि, बाद में खरीदारी आने से कीमतों में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली.

AI सेक्टर की चिंता से तांबे पर दबाव

तांबे की कीमतों में कमजोरी के पीछे टेक्नोलॉजी सेक्टर का प्रदर्शन भी एक अहम वजह है. हाल के दिनों में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है. इसके साथ ही निवेशक इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि AI के क्षेत्र में कंपनियों की ओर से किया जा रहा भारी-भरकम खर्च कितना फायदेमंद साबित होगा.

दरअसल, AI के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं. इन डेटा सेंटरों के निर्माण और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे में तांबे की काफी जरूरत होती है. ऐसे में अगर AI सेक्टर में निवेश की रफ्तार या भविष्य की ग्रोथ को लेकर बाजार का भरोसा कमजोर होता है, तो तांबे की मांग को लेकर भी आशंकाएं बढ़ जाती हैं.

विश्लेषक क्रेग लैंग के मुताबिक, डेटा सेंटर के विस्तार को लेकर बाजार की सोच अब तांबे की कीमतों को प्रभावित करने वाले अहम कारकों में शामिल हो गई है.

मार्च के बाद सबसे बड़ी वीकली गिरावट की आशंका

इस पूरे सप्ताह में तांबे की कीमत करीब 2.9% नीचे जाने की ओर है. अगर सप्ताह का कारोबार इसी रुख के साथ खत्म होता है, तो 20 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के बाद यह सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट होगी.

हालांकि, मौजूदा गिरावट को तांबे की कीमतों में लंबे समय तक चलने वाली कमजोरी मानना अभी जल्दबाजी होगी. इसकी वजह यह है कि दुनिया के कई देशों में तांबे की खदानों से सप्लाई प्रभावित है. वहीं, अमेरिका के बाहर तांबे की उपलब्धता भी सीमित बनी हुई है. ऐसे में सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां कीमतों को दोबारा सहारा दे सकती हैं.

चीन में तांबे का भंडार तीन साल के निचले स्तर पर

दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे की कीमतें गिर रही हैं, लेकिन चीन में इसका स्टॉक तेजी से कम हो रहा है.शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के गोदामों में तांबे का भंडार इस सप्ताह 24% से ज्यादा घटकर सिर्फ 33,848 टन रह गया. यह लगभग तीन साल का सबसे निचला स्तर है. बताया जा रहा है कि चीन में उपलब्ध यह स्टॉक एक दिन की खपत से भी कम है.

चीन दुनिया के सबसे बड़े तांबा उपभोक्ताओं में शामिल है. ऐसे में वहां भंडार में इतनी बड़ी गिरावट से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है. इसका असर आने वाले दिनों में कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

एल्युमीनियम, जिंक और निकल भी हुए सस्ते

शुक्रवार को सिर्फ तांबा ही नहीं, बल्कि दूसरी औद्योगिक धातुओं में भी गिरावट देखने को मिली. एल्युमीनियम की कीमत 0.8% टूटकर 3,039 डॉलर प्रति टन पर आ गई. वहीं, जिंक 1.7% गिरकर 3,730 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करता दिखा.

इसके अलावा लेड और निकल दोनों की कीमतों में 0.6% की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, इस कमजोरी के बीच टिन ने अलग रुख दिखाया. इसकी कीमत 0.9% बढ़कर 45,890 डॉलर प्रति टन पहुंच गई.

(डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है. इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह न समझें। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.)

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Published: November 7, 2026 13:52:52 IST
Last Updated: November 7, 2026 13:52:52 IST

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Copper Price:  दुनियाभर के बाजारों में तांबे की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन तांबा सस्ता हुआ. इसकी बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी और इस सेक्टर में हो रहे भारी निवेश को लेकर बढ़ती चिंता है. निवेशकों को अब सवाल सताने लगा है कि AI पर कंपनियां जितना पैसा खर्च कर रही हैं, क्या भविष्य में उससे उतना फायदा मिल पाएगा?

इस चिंता का असर तांबे की मांग को लेकर बाजार की उम्मीदों पर भी पड़ रहा है. लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में तांबे का भाव जुलाई के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. मौजूदा रुझान के मुताबिक, इस सप्ताह इसकी कीमतों में करीब 2.9% की गिरावट आ सकती है. ऐसा हुआ तो मार्च के बाद तांबे के लिए यह सबसे खराब सप्ताह साबित होगा.

लगातार चौथे दिन टूटा तांबे का भाव

शुक्रवार को लंदन मेटल एक्सचेंज में तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट वाला तांबा 0.8% गिरकर 13,738 डॉलर प्रति टन पर आ गया. कारोबार के दौरान इसमें गिरावट और बढ़ गई थी. एक समय भाव 1.5% टूटकर 13,636 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया. 30 जुलाई के बाद यह तांबे का सबसे निचला स्तर है. हालांकि, बाद में खरीदारी आने से कीमतों में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली.

AI सेक्टर की चिंता से तांबे पर दबाव

तांबे की कीमतों में कमजोरी के पीछे टेक्नोलॉजी सेक्टर का प्रदर्शन भी एक अहम वजह है. हाल के दिनों में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है. इसके साथ ही निवेशक इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि AI के क्षेत्र में कंपनियों की ओर से किया जा रहा भारी-भरकम खर्च कितना फायदेमंद साबित होगा.

दरअसल, AI के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं. इन डेटा सेंटरों के निर्माण और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे में तांबे की काफी जरूरत होती है. ऐसे में अगर AI सेक्टर में निवेश की रफ्तार या भविष्य की ग्रोथ को लेकर बाजार का भरोसा कमजोर होता है, तो तांबे की मांग को लेकर भी आशंकाएं बढ़ जाती हैं.

विश्लेषक क्रेग लैंग के मुताबिक, डेटा सेंटर के विस्तार को लेकर बाजार की सोच अब तांबे की कीमतों को प्रभावित करने वाले अहम कारकों में शामिल हो गई है.

मार्च के बाद सबसे बड़ी वीकली गिरावट की आशंका

इस पूरे सप्ताह में तांबे की कीमत करीब 2.9% नीचे जाने की ओर है. अगर सप्ताह का कारोबार इसी रुख के साथ खत्म होता है, तो 20 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के बाद यह सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट होगी.

हालांकि, मौजूदा गिरावट को तांबे की कीमतों में लंबे समय तक चलने वाली कमजोरी मानना अभी जल्दबाजी होगी. इसकी वजह यह है कि दुनिया के कई देशों में तांबे की खदानों से सप्लाई प्रभावित है. वहीं, अमेरिका के बाहर तांबे की उपलब्धता भी सीमित बनी हुई है. ऐसे में सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां कीमतों को दोबारा सहारा दे सकती हैं.

चीन में तांबे का भंडार तीन साल के निचले स्तर पर

दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे की कीमतें गिर रही हैं, लेकिन चीन में इसका स्टॉक तेजी से कम हो रहा है.शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के गोदामों में तांबे का भंडार इस सप्ताह 24% से ज्यादा घटकर सिर्फ 33,848 टन रह गया. यह लगभग तीन साल का सबसे निचला स्तर है. बताया जा रहा है कि चीन में उपलब्ध यह स्टॉक एक दिन की खपत से भी कम है.

चीन दुनिया के सबसे बड़े तांबा उपभोक्ताओं में शामिल है. ऐसे में वहां भंडार में इतनी बड़ी गिरावट से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है. इसका असर आने वाले दिनों में कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

एल्युमीनियम, जिंक और निकल भी हुए सस्ते

शुक्रवार को सिर्फ तांबा ही नहीं, बल्कि दूसरी औद्योगिक धातुओं में भी गिरावट देखने को मिली. एल्युमीनियम की कीमत 0.8% टूटकर 3,039 डॉलर प्रति टन पर आ गई. वहीं, जिंक 1.7% गिरकर 3,730 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करता दिखा.

इसके अलावा लेड और निकल दोनों की कीमतों में 0.6% की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, इस कमजोरी के बीच टिन ने अलग रुख दिखाया. इसकी कीमत 0.9% बढ़कर 45,890 डॉलर प्रति टन पहुंच गई.

(डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है. इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह न समझें। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.)

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