LPG संकट की आहट! मिडिल ईस्ट तनाव के कारण अगले 4 साल तक महंगी हो सकती है रसोई गैस. जानें क्यों सप्लाई चेन में आई रुकावट आपकी जेब पर भारी पड़ेगी और क्या है सरकार का 'प्लान-B'.
LPG Price Today
Israel Iran US War: मिडिल ईस्ट के हालातों ने केवल सीमाओं पर ही तनाव नहीं बढ़ाया है, बल्कि इसका सीधा असर भारतीय रसोई के बजट पर भी पड़ता दिख रहा है. वर्तमान भू-राजनीतिक संकट और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में मची हलचल की वजह से भारत समेत पूरी दुनिया गैस की किल्लत से जूझ रही है. लेकिन रिपोर्ट जो सामने आ रही है उससे भारत के लिए चिंता की बात यह है कि यह संकट अल्पकालिक नहीं, बल्कि अगले 3 से 4 साल तक बरकरार रह सकता है.
Money Control की रिपोर्ट के मुताबिक, नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि वैश्विक LPG सप्लाई चेन को दोबारा पटरी पर लौटने में कम से कम 3 से 4 साल का वक्त लगेगा. संकट गहरा इसलिए है क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि तेल के कुओं और प्रोडक्शन यूनिट्स को जो नुकसान पहुँचा है, वह अस्थायी है या स्थायी. सप्लायर्स का कहना है कि बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई करना रातों-रात मुमकिन नहीं है.
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से मंगाता है. युद्ध से पहले हमारी कुल गैस का 90% हिस्सा उसी रास्ते यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता था, जिसे अब ब्लॉक कर दिया गया है. इस सप्लाई चेन के टूटने का असर हमारी जेब पर दिखना शुरू हो चुका है जैसे घरेलू सिलेंडर, मार्च के मध्य से अब तक करीब 60 रुपये महंगा हो चुका है. कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी हुई है.
भारत में LPG की सालाना मांग 33 मिलियन टन है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मार्च के मध्य तक हमारे पास केवल 15 दिनों का ही रिजर्व स्टॉक बचा था. कम स्टोरेज होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाला जरा सा भी बदलाव सीधा आम आदमी की रसोई तक पहुंच जाता है.
हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन सरकार ने हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय वैकल्पिक रास्तों पर काम शुरू कर दिया है. खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए नए देशों से आयात की कोशिशें जारी हैं. रिफाइनरीज को निर्देश दिया गया है कि वे देश के भीतर ही LPG का उत्पादन बढ़ाएं. जिस तरह कोरोना काल में सप्लाई चेन को मैनेज किया गया था, उसी तर्ज पर जहाजों के रूट बदलकर गैस लाने की योजना बनाई जा रही है.
सप्लाई के नए रास्ते खोजने के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई में 40-50% की कमी का असर बना रह सकता है. आने वाले कुछ साल भारत के लिए एनर्जी सिक्योरिटी के लिहाज से अग्निपरीक्षा की तरह होंगे. सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल इस बात पर है कि चाहे कीमतें बढ़ें, लेकिन घरों में गैस की किल्लत न होने पाए. फिलहाल, मिडिल ईस्ट का धुंआ भारतीय घरों की चिमनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
डिस्क्लेमर: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और वैश्विक हालातों के विश्लेषण पर आधारित है. कृपया ध्यान दें कि गैस किल्लत को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक सूचना नहीं है.
Gold Rate Today 20 October 2026: दशहरे पर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है.…
Mandsaur Ravan Tradition: मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण को मंदोदरी का मायका होने के…
Salman Khan vs Lawrence Bishnoi: देवेंद्र बुढ़िया ने सलमान खान को मुकाम जाकर माफी मांगने…
Happy Dussehra 2026 Wishes in Hindi: दशहरा 2026 बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक…
Delhi Dussehra Traffic Advisory 20 Oct 2026: दशहरा पर दिल्ली-NCR में सुरक्षा कड़ी रहेगी और…
Petrol Diesel Price Today 20 October 2026: 20 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में…