M&M Share Price: धनतेरस के दिन ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली. शुक्रवार, 6 नवंबर को कंपनी का शेयर करीब 5.2 फीसदी उछलकर दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. शेयरों में इस तेजी के पीछे कंपनी के दूसरी तिमाही के मजबूत नतीजे और SUV के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती बिक्री अहम वजह रही. हालांकि, बीते एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो शेयर अब भी दबाव में है.
शुक्रवार सुबह 9:55 बजे M&M का शेयर 3,265.35 रुपये पर कारोबार कर रहा था. पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें 5.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. इसके बावजूद एक साल में कंपनी का शेयर 14.4 फीसदी टूट चुका है. इसी अवधि में BSE 500 इंडेक्स में 2.2 फीसदी की गिरावट आई है. कंपनी का कुल मार्केट कैप करीब 3.86 लाख करोड़ रुपये रहा.
दूसरी तिमाही में 25 फीसदी बढ़ा मुनाफा
M&M के दूसरी तिमाही के नतीजों में कंपनी की मजबूत ग्रोथ साफ नजर आई. वित्त वर्ष 2027 की जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 57,553 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा भी 25 फीसदी की बढ़त के साथ 4,588 करोड़ रुपये रहा.
पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा. इस अवधि में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 26 फीसदी बढ़कर 1,15,741 करोड़ रुपये और मुनाफा 29 फीसदी बढ़कर 10,042 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. कंपनी ने इस दौरान 21 फीसदी का सालाना रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) दर्ज किया.
हालांकि, स्टैंडअलोन नतीजों में मुनाफे की रफ्तार थोड़ी धीमी रही. दूसरी तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 26 फीसदी बढ़कर 44,282 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन मुनाफे में केवल 13 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के मुख्य मैन्युफैक्चरिंग कारोबार में लागत का दबाव बना हुआ है.
SUV कारोबार बना मुनाफे की सबसे बड़ी ताकत
कंपनी के मजबूत नतीजों में सबसे बड़ी भूमिका ऑटो कारोबार की रही. दूसरी तिमाही में इस सेगमेंट का रेवेन्यू 39 फीसदी बढ़कर 37,756 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वहीं, ब्याज और टैक्स से पहले का मुनाफा यानी PBIT 31 फीसदी बढ़कर 3,319 करोड़ रुपये रहा.
SUV सेगमेंट में कंपनी की पकड़ और मजबूत हुई है. दूसरी तिमाही में M&M की SUV बिक्री 26 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख यूनिट हो गई. इसके साथ ही SUV की बिक्री से होने वाली कमाई के आधार पर कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 24.3 फीसदी रही.
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया. 3.5 टन से कम वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इस कैटेगरी में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 52.3 फीसदी पर पहुंच गई.
इलेक्ट्रिक SUV की बिक्री ने भी बढ़ाया दम
M&M के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट भी ग्रोथ का अहम इंजन बनकर उभर रहा है. दूसरी तिमाही में कंपनी ने 23,345 इलेक्ट्रिक SUV की बिलिंग की. इस सेगमेंट में बिक्री के आधार पर कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 23.2 फीसदी रही.
बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी में है. M&M का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के अंत तक SUV और इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल उत्पादन क्षमता बढ़ाकर हर महीने 82,000 यूनिट करना है. वित्त वर्ष 2026 के अंत में यह क्षमता 64,500 यूनिट थी.
हालांकि, बिक्री में शानदार बढ़ोतरी के बावजूद ऑटो कारोबार के मार्जिन पर दबाव बना हुआ है. SUV और हल्के कमर्शियल वाहनों का PBIT मार्जिन घटकर 9.8 फीसदी रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 11 फीसदी था. कच्चे माल की बढ़ती कीमतें कंपनी के मार्जिन के लिए चुनौती बनी हुई हैं.
ट्रैक्टर कारोबार में बिक्री बढ़ी, लेकिन रेवेन्यू में गिरावट
ऑटो कारोबार के मुकाबले कंपनी के फार्म इक्विपमेंट यानी ट्रैक्टर सेगमेंट की तस्वीर थोड़ी अलग रही. दूसरी तिमाही में ट्रैक्टर की बिक्री 6 फीसदी बढ़कर 1.16 लाख यूनिट हो गई. इस दौरान कंपनी की बाजार हिस्सेदारी भी 1.5 फीसदी बढ़कर 41.5 फीसदी पर पहुंच गई.
लेकिन बिक्री में बढ़ोतरी के बावजूद इस सेगमेंट का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6 फीसदी घटकर 9,572 करोड़ रुपये रह गया. यानी ट्रैक्टर की ज्यादा यूनिट बिकने के बावजूद कंपनी इस कारोबार से रेवेन्यू बढ़ाने में सफल नहीं रही.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कुल मिलाकर M&M के दूसरी तिमाही के नतीजे कंपनी के SUV और इलेक्ट्रिक व्हीकल कारोबार की मजबूत स्थिति को दिखाते हैं. बढ़ती बिक्री, बाजार हिस्सेदारी में सुधार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना कंपनी की आगे की ग्रोथ के लिए सकारात्मक संकेत हैं.
हालांकि, कच्चे माल की महंगाई, ऑटो कारोबार के मार्जिन में गिरावट और ट्रैक्टर सेगमेंट के रेवेन्यू में कमजोरी पर नजर रखना जरूरी होगा. ऐसे में शेयरों में आई तेजी के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में बिक्री की रफ्तार के साथ अपने मुनाफे के मार्जिन को कितना बेहतर बना पाती है.
(डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है. इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह न समझें। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.)
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