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Choti Diwali 2026 Date: 7 या 8 कब है छोटी दिवाली? दूर करें कन्फ्यूजन; जानें क्यों करते हैं इस दिन अभ्यंग स्नान

Choti Diwali 2026 Date: इस साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या दो अलग-अलग दिन पड़ रही हैं. इससे यह सवाल उठता है कि छोटी दिवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी या 8 नवंबर को? आइए कैलेंडर के हिसाब से छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की सही तारीखें जानते हैं.

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Published: November 6, 2026 13:28:06 IST
Last Updated: November 6, 2026 13:28:06 IST

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Choti Diwali 2026 Date: हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है. इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका अंत भाई दूज के साथ होता है. इस दौरान छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. हर त्योहार का अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व होता है. हालांकि, 2026 में छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की तारीखों को लेकर लोगों में कंफ्यूजन है. इस साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या दो अलग-अलग दिन पड़ रही हैं. इससे यह सवाल उठता है कि छोटी दिवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी या 8 नवंबर को? आइए कैलेंडर के हिसाब से छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की सही तारीखें जानते हैं.

छोटी दिवाली 2026 कब है?

कैलेंडर के अनुसार, 2026 में कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शनिवार, 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे शुरू होगी. यह तिथि रविवार, 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे खत्म होगी. इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू होगी. हिंदू धर्म में छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाने की एक खास परंपरा है. इसे अभ्यंग स्नान कहते हैं. चूंकि इस साल चतुर्दशी तिथि और सूर्योदय बड़ी दिवाली के दिन ही हैं, यानी 8 नवंबर की सुबह, इसलिए उदया तिथि के आधार पर छोटी दिवाली, या नरक चतुर्दशी का त्योहार रविवार, 8 नवंबर, 2026 को मनाया जाएगा.

छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है?

छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा सदियों पुरानी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शरीर पर तेल लगाकर सूर्योदय से पहले नहाना शुभ माना जाता है. इस स्नान को नरक से मुक्ति दिलाने वाला स्नान भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने इसी दिन राक्षस नरकासुर का वध करके हजारों लड़कियों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था. इसी जीत की खुशी में नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है. माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से स्नान और पूजा करने से नेगेटिविटी दूर होती है और जीवन में पॉजिटिविटी आती है.

दिवाली 2026 कब है? (Diwali 2026 Date)

पंचांग के अनुसार, 2026 में कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रविवार, 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी. यह सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे खत्म होगी. वैसे तो 9 नवंबर को उदया तिथि में अमावस्या तिथि भी होगी, लेकिन दिवाली पर प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना खास महत्व रखता है. इसलिए, 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण, लक्ष्मी पूजा का त्योहार रविवार, 8 नवंबर, 2026 को मनाया जाएगा.

दिवाली पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में, दिवाली को सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. इस दिन, घरों की सफाई की जाती है और शाम को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीये जलाए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी दिवाली की रात धरती पर घूमती हैं और साफ-सुथरे और रोशनी वाले घरों में निवास करती हैं. इसलिए, इस दिन घरों को दीयों और रंगोली से सजाया जाता है. भगवान गणेश को सबसे पहले पूजने वाले और विघ्नहर्ता माना जाता है. इसी वजह से, दिवाली पर देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने का रिवाज है. ऐसा माना जाता है कि दोनों की पूजा करने से घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि आती है.

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Published: November 6, 2026 13:28:06 IST
Last Updated: November 6, 2026 13:28:06 IST

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Choti Diwali 2026 Date: हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है. इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका अंत भाई दूज के साथ होता है. इस दौरान छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. हर त्योहार का अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व होता है. हालांकि, 2026 में छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की तारीखों को लेकर लोगों में कंफ्यूजन है. इस साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या दो अलग-अलग दिन पड़ रही हैं. इससे यह सवाल उठता है कि छोटी दिवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी या 8 नवंबर को? आइए कैलेंडर के हिसाब से छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की सही तारीखें जानते हैं.

छोटी दिवाली 2026 कब है?

कैलेंडर के अनुसार, 2026 में कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शनिवार, 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे शुरू होगी. यह तिथि रविवार, 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे खत्म होगी. इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू होगी. हिंदू धर्म में छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाने की एक खास परंपरा है. इसे अभ्यंग स्नान कहते हैं. चूंकि इस साल चतुर्दशी तिथि और सूर्योदय बड़ी दिवाली के दिन ही हैं, यानी 8 नवंबर की सुबह, इसलिए उदया तिथि के आधार पर छोटी दिवाली, या नरक चतुर्दशी का त्योहार रविवार, 8 नवंबर, 2026 को मनाया जाएगा.

छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है?

छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा सदियों पुरानी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शरीर पर तेल लगाकर सूर्योदय से पहले नहाना शुभ माना जाता है. इस स्नान को नरक से मुक्ति दिलाने वाला स्नान भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने इसी दिन राक्षस नरकासुर का वध करके हजारों लड़कियों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था. इसी जीत की खुशी में नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है. माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से स्नान और पूजा करने से नेगेटिविटी दूर होती है और जीवन में पॉजिटिविटी आती है.

दिवाली 2026 कब है? (Diwali 2026 Date)

पंचांग के अनुसार, 2026 में कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रविवार, 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी. यह सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे खत्म होगी. वैसे तो 9 नवंबर को उदया तिथि में अमावस्या तिथि भी होगी, लेकिन दिवाली पर प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना खास महत्व रखता है. इसलिए, 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण, लक्ष्मी पूजा का त्योहार रविवार, 8 नवंबर, 2026 को मनाया जाएगा.

दिवाली पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में, दिवाली को सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. इस दिन, घरों की सफाई की जाती है और शाम को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीये जलाए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी दिवाली की रात धरती पर घूमती हैं और साफ-सुथरे और रोशनी वाले घरों में निवास करती हैं. इसलिए, इस दिन घरों को दीयों और रंगोली से सजाया जाता है. भगवान गणेश को सबसे पहले पूजने वाले और विघ्नहर्ता माना जाता है. इसी वजह से, दिवाली पर देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने का रिवाज है. ऐसा माना जाता है कि दोनों की पूजा करने से घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि आती है.

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