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Home > बिज़नेस > ‘सद्गुरु एन एक्स न्यूमैटिक फिटिंग’ के प्रोपराइटर रविंद्र हिरोजी साटम की प्रेरक कहानी, विदेशी फिटिंग से स्वदेशी निर्माण तक

‘सद्गुरु एन एक्स न्यूमैटिक फिटिंग’ के प्रोपराइटर रविंद्र हिरोजी साटम की प्रेरक कहानी, विदेशी फिटिंग से स्वदेशी निर्माण तक

Ravindra Hiroji Satam: कारोबार में सफलता हासिल करने के लिए मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास की जरूरत होती है. पेट्रोलियम क्षेत्र में करीब 27 वर्षों से काम कर रहे रविंद्र हिरोजी साटम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आर्थिक नुकसान, तकनीकी चुनौतियों और बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने स्वदेशी निर्माण को आगे बढ़ाने का प्रयास किया. उनके इसी सफर को अब ‘भारत की शान’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

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Published: October 27, 2026 13:58:40 IST
Last Updated: October 27, 2026 13:58:40 IST

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कारोबार में सफलता हासिल करने के लिए मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास की जरूरत होती है. पेट्रोलियम क्षेत्र में करीब 27 वर्षों से काम कर रहे रविंद्र हिरोजी साटम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आर्थिक नुकसान, तकनीकी चुनौतियों और बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने स्वदेशी निर्माण को आगे बढ़ाने का प्रयास किया. उनके इसी सफर को अब ‘भारत की शान’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

पारिवारिक कारोबार से शुरू हुआ सफर

रविंद्र हिरोजी साटम ‘सद्गुरु एन एक्स न्यूमैटिक फिटिंग’ के प्रोपराइटर हैं. उनकी कंपनी पेट्रोलियम रोड टैंकरों में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा फिटिंग और बॉटम लोडिंग फिटिंग के निर्माण से जुड़ी है. उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, उनके पिता ने वर्ष 1979 में लाइसेंस मिलने के बाद पेट्रोलियम टैंकरों के लिए सुरक्षा उपकरणों और टॉप लोडिंग फिटिंग का काम शुरू किया था. बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण रविंद्र साटम ने कारोबार की जिम्मेदारी संभाली.

समय के साथ पेट्रोलियम टैंकरों में टॉप लोडिंग की जगह बॉटम लोडिंग तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने लगा. इस बदलाव के साथ कारोबार को भी नई तकनीक अपनाने की जरूरत पड़ी. रविंद्र साटम के सामने चुनौती थी कि वह इस तकनीक को सीखकर अपने व्यवसाय को आगे कैसे बढ़ाएं.

दो कर्मचारियों तक सिमट गया था कारोबार

वर्ष 2012 तक उनका कारोबार घटकर केवल दो कर्मचारियों तक रह गया था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. नई तकनीक को समझने के लिए उन्होंने चीन और जर्मनी की यात्रा की. भारत लौटने के बाद टैंकर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को करीब से समझा और बॉटम लोडिंग फिटिंग के क्षेत्र में काम शुरू किया.

हालांकि, शुरुआती सफलता के बाद उन्हें फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ा. टेंडर प्रक्रिया में स्थापित विदेशी कंपनियों के उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से उनका कारोबार प्रभावित हुआ. कुछ फिटिंग हटाए जाने और सामग्री की कीमत लौटाने जैसी परिस्थितियों ने भी उनकी परेशानी बढ़ाई. लगातार प्रयासों के बाद उनकी कंपनी का नाम टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुआ और कारोबार को दोबारा गति मिली. लेख में दिए गए विवरण के अनुसार, इसके बाद एक साल में उनका कारोबार 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

16 लाख रुपये के नुकसान के बाद भी जारी रखे प्रयास

रविंद्र साटम के सफर में एक बड़ा झटका तब लगा, जब आग में करीब 16 लाख रुपये मूल्य के उत्पाद नष्ट हो गए. इस नुकसान के बावजूद उन्होंने स्वदेशी निर्माण की दिशा में काम जारी रखा. उनका उद्देश्य विदेश से उत्पाद मंगाने पर निर्भरता कम करना और भारत में ही जरूरी फिटिंग का निर्माण करना था.

कंपनी ने पेट्रोलियम टैंकरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बॉटम लोडिंग फिटिंग के साथ अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था और ईंधन चोरी रोकने के लिए स्वचालित लॉकिंग प्रणाली पर भी काम किया. बॉटम लोडिंग तकनीक में ईंधन भरने के लिए ऑपरेटर को टैंकर के ऊपर चढ़ने की जरूरत नहीं होती. बंद प्रणाली के कारण ईंधन के छींटे और प्रदूषण से जुड़े जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है.

‘भारत की शान’ पुरस्कार से हुए सम्मानित

रविंद्र हिरोजी साटम को उनके संघर्ष और स्वदेशी निर्माण की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए ‘भारत की शान’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इससे पहले उन्हें राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान-2024 भी मिल चुका है.

उनकी संघर्षगाथा को सामने लाने के लिए इंडिया न्यूज़ की वरिष्ठ एंकर पुनीता सिंह ने उनका विशेष इंटरव्यू किया. इस बातचीत में रविंद्र साटम ने अपने कारोबार के मुश्किल दौर, विदेशी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा और भारत में ही तकनीक विकसित करने के प्रयासों के बारे में बताया.

रविंद्र साटम के मुताबिक, उनकी कंपनी की फिटिंग से लैस एसएस बॉटम लोडिंग टैंकर भी तैयार किया गया है, जिसका इस्तेमाल अत्यधिक ज्वलनशील रसायनों के परिवहन में किया जाएगा.

उनकी कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रयासों से कारोबार को नई दिशा दी जा सकती है. स्वदेशी निर्माण पर उनका जोर आत्मनिर्भर भारत की सोच से भी जुड़ता है.

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Published: October 27, 2026 13:58:40 IST
Last Updated: October 27, 2026 13:58:40 IST

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कारोबार में सफलता हासिल करने के लिए मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास की जरूरत होती है. पेट्रोलियम क्षेत्र में करीब 27 वर्षों से काम कर रहे रविंद्र हिरोजी साटम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आर्थिक नुकसान, तकनीकी चुनौतियों और बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने स्वदेशी निर्माण को आगे बढ़ाने का प्रयास किया. उनके इसी सफर को अब ‘भारत की शान’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

पारिवारिक कारोबार से शुरू हुआ सफर

रविंद्र हिरोजी साटम ‘सद्गुरु एन एक्स न्यूमैटिक फिटिंग’ के प्रोपराइटर हैं. उनकी कंपनी पेट्रोलियम रोड टैंकरों में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा फिटिंग और बॉटम लोडिंग फिटिंग के निर्माण से जुड़ी है. उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, उनके पिता ने वर्ष 1979 में लाइसेंस मिलने के बाद पेट्रोलियम टैंकरों के लिए सुरक्षा उपकरणों और टॉप लोडिंग फिटिंग का काम शुरू किया था. बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण रविंद्र साटम ने कारोबार की जिम्मेदारी संभाली.

समय के साथ पेट्रोलियम टैंकरों में टॉप लोडिंग की जगह बॉटम लोडिंग तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने लगा. इस बदलाव के साथ कारोबार को भी नई तकनीक अपनाने की जरूरत पड़ी. रविंद्र साटम के सामने चुनौती थी कि वह इस तकनीक को सीखकर अपने व्यवसाय को आगे कैसे बढ़ाएं.

दो कर्मचारियों तक सिमट गया था कारोबार

वर्ष 2012 तक उनका कारोबार घटकर केवल दो कर्मचारियों तक रह गया था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. नई तकनीक को समझने के लिए उन्होंने चीन और जर्मनी की यात्रा की. भारत लौटने के बाद टैंकर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को करीब से समझा और बॉटम लोडिंग फिटिंग के क्षेत्र में काम शुरू किया.

हालांकि, शुरुआती सफलता के बाद उन्हें फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ा. टेंडर प्रक्रिया में स्थापित विदेशी कंपनियों के उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से उनका कारोबार प्रभावित हुआ. कुछ फिटिंग हटाए जाने और सामग्री की कीमत लौटाने जैसी परिस्थितियों ने भी उनकी परेशानी बढ़ाई. लगातार प्रयासों के बाद उनकी कंपनी का नाम टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुआ और कारोबार को दोबारा गति मिली. लेख में दिए गए विवरण के अनुसार, इसके बाद एक साल में उनका कारोबार 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

16 लाख रुपये के नुकसान के बाद भी जारी रखे प्रयास

रविंद्र साटम के सफर में एक बड़ा झटका तब लगा, जब आग में करीब 16 लाख रुपये मूल्य के उत्पाद नष्ट हो गए. इस नुकसान के बावजूद उन्होंने स्वदेशी निर्माण की दिशा में काम जारी रखा. उनका उद्देश्य विदेश से उत्पाद मंगाने पर निर्भरता कम करना और भारत में ही जरूरी फिटिंग का निर्माण करना था.

कंपनी ने पेट्रोलियम टैंकरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बॉटम लोडिंग फिटिंग के साथ अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था और ईंधन चोरी रोकने के लिए स्वचालित लॉकिंग प्रणाली पर भी काम किया. बॉटम लोडिंग तकनीक में ईंधन भरने के लिए ऑपरेटर को टैंकर के ऊपर चढ़ने की जरूरत नहीं होती. बंद प्रणाली के कारण ईंधन के छींटे और प्रदूषण से जुड़े जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है.

‘भारत की शान’ पुरस्कार से हुए सम्मानित

रविंद्र हिरोजी साटम को उनके संघर्ष और स्वदेशी निर्माण की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए ‘भारत की शान’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इससे पहले उन्हें राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान-2024 भी मिल चुका है.

उनकी संघर्षगाथा को सामने लाने के लिए इंडिया न्यूज़ की वरिष्ठ एंकर पुनीता सिंह ने उनका विशेष इंटरव्यू किया. इस बातचीत में रविंद्र साटम ने अपने कारोबार के मुश्किल दौर, विदेशी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा और भारत में ही तकनीक विकसित करने के प्रयासों के बारे में बताया.

रविंद्र साटम के मुताबिक, उनकी कंपनी की फिटिंग से लैस एसएस बॉटम लोडिंग टैंकर भी तैयार किया गया है, जिसका इस्तेमाल अत्यधिक ज्वलनशील रसायनों के परिवहन में किया जाएगा.

उनकी कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रयासों से कारोबार को नई दिशा दी जा सकती है. स्वदेशी निर्माण पर उनका जोर आत्मनिर्भर भारत की सोच से भी जुड़ता है.

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