कोलकाता से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां फर्जी पहचान के सहारे रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक ने नौकरी का लालच देकर गरीब और बेबस लोगों के साथ जो खेल खेला, उसे जानकर आप दंग रह जाएंगे.
दरअसल, बिधाननगर पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए इसके मुख्य मास्टरमाइंड सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है. यह गैंग गरीब और जरूरतमंद युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनकी किडनी निकाल लेता था. आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला.
मास्टरमाइंड और एजेंट गिरफ्तार
बिधाननगर दक्षिण थाने की पुलिस ने न्यूटाउन इलाके से रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड रसेल अहमद को गिरफ्तार किया. आरोपी बांग्लादेशी नागरिक है, जो पिछले 4 महीनों से कोलकाता में फर्जी भारतीय दस्तावेजों (आधार और वोटर कार्ड) के सहारे अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था. इससे पहले पुलिस ने प्रभास मंडल नाम के एक स्थानीय एजेंट को पकड़ा था, जिसकी पूछताछ के आधार पर मुख्य सरगना का सुराग मिला.
ठगी का तरीका
यह गिरोह मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को निशाना बनाता था. पीड़ितों को पंजाब (लुधियाना) या हरियाणा जैसे राज्यों में मोटी कमाई वाली नौकरी का लालच देकर बुलाया जाता था. वहां पहुंचने पर उन्हें नशीली दवा देकर बेहोश कर दिया जाता और उनकी सहमति के बिना अस्पतालों की मिलीभगत से ऑपरेशन करके किडनी निकाल ली जाती थी.
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
कोलकाता के सुकांतनगर निवासी ‘मंगल मंडल’ के पिता ने बिधाननगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. उनके बेटे को नौकरी का झांसा देकर लुधियाना ले जाया गया था, जहां उसकी किडनी निकाल ली गई. होश आने पर पेट पर टांके देखकर युवक को अपने साथ हुए इस अपराध का पता चला.
रेट चार्ट और दस्तावेज बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस को रसेल अहमद के पास से किडनी की बिक्री का रेट चार्ट और कई राज्यों के बड़े निजी अस्पतालों के दस्तावेज मिले हैं. पुलिस फिलहाल इस बात की जांच कर रही है कि इस रैकेट में कौन-कौन से अस्पताल और डॉक्टर शामिल हैं.