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Home > राज्य > पंजाब > अमृतसर में खोये बुजुर्ग पहुंच गए गया, एक अजनबी ने AI का इस्तेमाल करके ढूंढ़ा गांव, बुजुर्ग को उनके परिवार से मिलाया

अमृतसर में खोये बुजुर्ग पहुंच गए गया, एक अजनबी ने AI का इस्तेमाल करके ढूंढ़ा गांव, बुजुर्ग को उनके परिवार से मिलाया

अमृतसर में हरमंदिर साहिब दर्शन करने आये एक बुजुर्ग अपने परिवार से बिछड़ने के बाद बिहार के गया पहुंच गए. वहां के एक स्थानीय व्यक्ति ने उनकी मदद की और उनके परिवार से उन्हें मिलाया.

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Last Updated: September 20, 2026 19:55:44 IST

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पंजाब के एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने परिवार के साथ अमृतसर तीर्थयात्रा पर गए थे, लेकिन उसी बीच वो अपने परिवार से बिछड़ गए. रास्ता भटकने के बाद वो अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर बिहार के गया जिले में जा पहुंचे. 

गया में एक अजनबी व्यक्ति ने उनकी मदद की. उस व्यक्ति के निरंतर प्रयास और चैटजीपीटी की मदद से वापस अपने घर पहुंचे.

क्या है पूरा मामला 

लुधियाना जिले के फतेहगढ़ गुजरां गांव के चमन लाल पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए 11 सितंबर को अमृतसर गए थे. उनके परिवार का कहना है कि उन्हें लंबे समय से स्मृति संबंधी समस्याएं हैं. अमृतसर में कहीं वे अपने समूह से अलग हो गए और रेलवे स्टेशन के पास पहुंच गए. वहां से उन्होंने अनजाने में बिहार जाने वाली ट्रेन पकड़ी और घर से 1,200 किलोमीटर से अधिक दूर गया तक का लंबा सफर तय किया.

गया में मिले नीरज 

वहीं गया के रहने वाले नीरज ने सबसे पहले उन्हें देखा. चमन लाल परेशान और भूखे लग रहे थे, और वह मुश्किल से ही बता पा रहे  थे कि वह कौन हैं या कहाँ से आए हैं. वह बस इतना ही बता पाए कि उनके गाँव का नाम फतेहगढ़ गुजरां है. नीरज उन्हें घर ले गया. उसने उन्हें खाना खिलाया, आश्रय दिया और अगले चार दिनों तक उन्हें अपने परिवार के साथ रहने दिया, ताकि वह यह पता लगा सके कि वह बूढ़ा व्यक्ति वास्तव में कहां का है.

चमन लाल केवल पंजाबी बोलते थे, जिससे नीरज को पहला सुराग मिला. गांव के नाम को आधार बनाकर उसने ऑनलाइन खोज शुरू की, चैटजीपीटी और सामान्य इंटरनेट खोजों का सहारा लेकर पंजाब के किसी स्थान का पता लगाने की कोशिश की. तीन दिन तक खोजबीन चलती रही. आखिरकार, उन्हें लुधियाना जिले के माछीवाड़ा साहिब के पास फतेहगढ़ गुजरां नाम का एक गांव मिला. एक बार जब उसे स्थान का पता चल गया, तो नीरज ने चमन लाल को अकेले वापस भेजने के बजाय, गया से लुधियाना और फिर आगे माछीवाड़ा तक की लंबी यात्रा में व्यक्तिगत रूप से उनका साथ दिया.

नीरज ने परिवार से मिलाया 

मच्छीवाड़ा में नीरज ने चमन लाल की तस्वीर स्थानीय लोगों को दिखानी शुरू की, इस उम्मीद में कि कोई उन्हें पहचान लेगा. तभी इलाके के निवासी मास्टर कृष्ण लाल ने उस बुजुर्ग व्यक्ति की पहचान कर ली. यह खबर तुरंत परिवार तक पहुंच गई. चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह तुरंत माछीवाड़ा पहुंचे और पुष्टि की कि यह वास्तव में उनके दादा ही थे.

सुखचैन सिंह ने बताया कि परिवार ने अमृतसर में चमन लाल की व्यापक खोज की थी और पुलिस को भी सूचित कर दिया था. ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर साझा की थी, इस उम्मीद में कि शायद कोई उन्हें कहीं देख ले. चमन लाल के घरवालों ने नीरज के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने उनके दादाजी को सुरक्षित रखा, गया से पंजाब तक की लंबी यात्रा की और उन्हें सुरक्षित घर पहुँचाया. बाद में चमन लाल के परिवार ने नीरज का अपने घर में पुष्पांजलि अर्पित कर स्वागत किया और उन्हें धन और वस्त्र भेंट किए.

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पंजाब के एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने परिवार के साथ अमृतसर तीर्थयात्रा पर गए थे, लेकिन उसी बीच वो अपने परिवार से बिछड़ गए. रास्ता भटकने के बाद वो अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर बिहार के गया जिले में जा पहुंचे. 

गया में एक अजनबी व्यक्ति ने उनकी मदद की. उस व्यक्ति के निरंतर प्रयास और चैटजीपीटी की मदद से वापस अपने घर पहुंचे.

क्या है पूरा मामला 

लुधियाना जिले के फतेहगढ़ गुजरां गांव के चमन लाल पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए 11 सितंबर को अमृतसर गए थे. उनके परिवार का कहना है कि उन्हें लंबे समय से स्मृति संबंधी समस्याएं हैं. अमृतसर में कहीं वे अपने समूह से अलग हो गए और रेलवे स्टेशन के पास पहुंच गए. वहां से उन्होंने अनजाने में बिहार जाने वाली ट्रेन पकड़ी और घर से 1,200 किलोमीटर से अधिक दूर गया तक का लंबा सफर तय किया.

गया में मिले नीरज 

वहीं गया के रहने वाले नीरज ने सबसे पहले उन्हें देखा. चमन लाल परेशान और भूखे लग रहे थे, और वह मुश्किल से ही बता पा रहे  थे कि वह कौन हैं या कहाँ से आए हैं. वह बस इतना ही बता पाए कि उनके गाँव का नाम फतेहगढ़ गुजरां है. नीरज उन्हें घर ले गया. उसने उन्हें खाना खिलाया, आश्रय दिया और अगले चार दिनों तक उन्हें अपने परिवार के साथ रहने दिया, ताकि वह यह पता लगा सके कि वह बूढ़ा व्यक्ति वास्तव में कहां का है.

चमन लाल केवल पंजाबी बोलते थे, जिससे नीरज को पहला सुराग मिला. गांव के नाम को आधार बनाकर उसने ऑनलाइन खोज शुरू की, चैटजीपीटी और सामान्य इंटरनेट खोजों का सहारा लेकर पंजाब के किसी स्थान का पता लगाने की कोशिश की. तीन दिन तक खोजबीन चलती रही. आखिरकार, उन्हें लुधियाना जिले के माछीवाड़ा साहिब के पास फतेहगढ़ गुजरां नाम का एक गांव मिला. एक बार जब उसे स्थान का पता चल गया, तो नीरज ने चमन लाल को अकेले वापस भेजने के बजाय, गया से लुधियाना और फिर आगे माछीवाड़ा तक की लंबी यात्रा में व्यक्तिगत रूप से उनका साथ दिया.

नीरज ने परिवार से मिलाया 

मच्छीवाड़ा में नीरज ने चमन लाल की तस्वीर स्थानीय लोगों को दिखानी शुरू की, इस उम्मीद में कि कोई उन्हें पहचान लेगा. तभी इलाके के निवासी मास्टर कृष्ण लाल ने उस बुजुर्ग व्यक्ति की पहचान कर ली. यह खबर तुरंत परिवार तक पहुंच गई. चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह तुरंत माछीवाड़ा पहुंचे और पुष्टि की कि यह वास्तव में उनके दादा ही थे.

सुखचैन सिंह ने बताया कि परिवार ने अमृतसर में चमन लाल की व्यापक खोज की थी और पुलिस को भी सूचित कर दिया था. ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर साझा की थी, इस उम्मीद में कि शायद कोई उन्हें कहीं देख ले. चमन लाल के घरवालों ने नीरज के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने उनके दादाजी को सुरक्षित रखा, गया से पंजाब तक की लंबी यात्रा की और उन्हें सुरक्षित घर पहुँचाया. बाद में चमन लाल के परिवार ने नीरज का अपने घर में पुष्पांजलि अर्पित कर स्वागत किया और उन्हें धन और वस्त्र भेंट किए.

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