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राष्ट्रपति के ADC कैसे बनते हैं? NDA-CDS से लेकर 14 दिन के इंटरव्यू तक, जानें पूरी चयन प्रक्रिया

President ADC: राष्ट्रपति के ADC यानी Aide-de-Camp पद को लेकर मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के इस्तीफे के बाद युवाओं की दिलचस्पी बढ़ी है. संब्याल के अनुसार, ADC के लिए तीनों सेनाओं के योग्य कमिशंड अधिकारियों में से चयन किया जाता है. NDA और CDS के जरिए सेना में अधिकारी बनने के बाद करीब 5 से 7 साल की सेवा वाले अधिकारी निर्धारित मानकों के आधार पर चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं.

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Last Updated: September 20, 2026 19:41:50 IST

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President ADC: सोशल मीडिया पर ‘नेशनल क्रश’ के नाम से चर्चित रहे मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के राष्ट्रपति के ADC पद से इस्तीफा देने के बाद इस पद को लेकर युवाओं की दिलचस्पी बढ़ गई है. आखिर राष्ट्रपति के साथ रहने वाले ADC की भूमिका क्या होती है? इस पद तक पहुंचने के लिए कौन सी परीक्षा देनी होती है और चयन प्रक्रिया कितनी कठिन होती है? मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राज शमानी के पॉडकास्ट में इस पद से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की थीं.

क्या होता है राष्ट्रपति का ADC पद?

ADC का पूरा नाम Aide de Camp (ऐड डि कैम्प) है. यह सशस्त्र बलों में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला पद है. राष्ट्रपति के ADC के लिए सेना के योग्य कमिशंड अधिकारियों में से चयन किया जाता है. इसमें सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी शामिल हो सकते हैं. इस पद पर पहुंचने के लिए कोई अलग से सीधी भर्ती नहीं होती. पहले उम्मीदवार को सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में शामिल होना पड़ता है. मेजर ऋषभ सिंह संब्याल खुद NDA के जरिए भारतीय सेना में शामिल हुए थे.

NDA और CDS के जरिए बन सकते हैं सेना में अधिकारी

राष्ट्रपति के ADC बनने की शुरुआत सैन्य अधिकारी के रूप में करियर बनाने से होती है. सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारी बनने के प्रमुख रास्तों में UPSC NDA और CDS परीक्षाएं शामिल हैं. NDA परीक्षा 12वीं के बाद दी जा सकती है, जबकि CDS परीक्षा के लिए स्नातक होना जरूरी होता है. इन परीक्षाओं के जरिए चयनित उम्मीदवार सैन्य प्रशिक्षण हासिल करते हैं और अधिकारी के रूप में सेवा शुरू करते हैं. इसके बाद ही ADC जैसे पदों के लिए चयन की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलता है.

5 से 7 साल की सेवा के बाद शुरू होती है प्रक्रिया

मेजर संब्याल के मुताबिक, राष्ट्रपति के ADC के लिए चयन प्रक्रिया लंबी और कई स्तरों वाली होती है. शुरुआत में तीनों सेनाओं में से योग्य अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है. इसमें अधिकारी की सेवा अवधि के साथ सर्विस ब्रैकेट, उम्र सीमा और अन्य निर्धारित मानकों को देखा जाता है. उन्होंने बताया कि आम तौर पर ऐसे अधिकारियों को प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, जो सेना में करीब 5 से 7 साल की सेवा पूरी कर चुके हों. शॉर्टलिस्टिंग के बाद अधिकारियों की मेरिट तैयार की जाती है और उन्हें अगले चरण के लिए आगे बढ़ाया जाता है.

सर्विस हेडक्वार्टर में होता है इंटरव्यू

शॉर्टलिस्ट किए गए अधिकारियों का इंटरव्यू उनके संबंधित सर्विस हेडक्वार्टर की ओर से लिया जाता है. इस चरण में सिर्फ ज्ञान ही नहीं, बल्कि यह भी परखा जाता है कि अधिकारी अचानक पैदा हुई परिस्थिति में किस तरह प्रतिक्रिया देता है. उम्मीदवार की सिचुएशनल अवेयरनेस यानी परिस्थितियों को समझने और उसके अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस प्रक्रिया के बाद चुने गए करीब पांच अधिकारियों को अगले चरण के लिए आगे भेजा जाता है.

राष्ट्रपति भवन में करीब 14 दिन तक होती है परीक्षा

अगले चरण में चयनित अधिकारियों को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बुलाया जाता है. संब्याल के अनुसार, यहां करीब 14 दिनों तक इंटरव्यू और अलग अलग स्तर पर परख की जाती है. इस दौरान वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और राष्ट्रपति के सचिव की मौजूदगी में उम्मीदवारों को विभिन्न स्तरों पर आंका जाता है. उनकी जानकारी, दबाव में काम करने की क्षमता, स्वभाव और नई जानकारी को तेजी से सीखने की क्षमता जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है. इसके साथ ही उम्मीदवार की सेवा पृष्ठभूमि, चरित्र और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच तथा सुरक्षा सत्यापन की प्रक्रिया भी होती है. इन सभी चरणों के बाद अंतिम उम्मीदवार का चयन किया जाता है.

राष्ट्रपति के ADC के लिए करंट अफेयर्स की जानकारी जरूरी

ADC की जिम्मेदारी सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होती. राष्ट्रपति के साथ लगातार रहने वाले अधिकारी के लिए देश दुनिया की घटनाओं और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण है. मेजर संब्याल ने बताया था कि ADC नियमित रूप से समाचार देखते हैं और करंट अफेयर्स से अपडेट रहते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी विषय से जुड़ी जानकारी तुरंत दी जा सके. उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि स्पेशल फोर्सेज में दूरदराज के इलाकों में तैनाती के दौरान जियोपॉलिटिक्स और करंट अफेयर्स उनके लिए चुनौती रहे थे. राष्ट्रपति भवन की चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने रात में पढ़ाई करके इस कमी को दूर करने की कोशिश की थी. इस तरह राष्ट्रपति के ADC तक पहुंचने का रास्ता किसी एक परीक्षा से पूरा नहीं होता. पहले सशस्त्र बलों में अधिकारी बनना, फिर सेवा अनुभव हासिल करना और उसके बाद कई स्तरों वाली चयन, इंटरव्यू, मूल्यांकन और सुरक्षा जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

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Last Updated: September 20, 2026 19:41:50 IST

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President ADC: सोशल मीडिया पर ‘नेशनल क्रश’ के नाम से चर्चित रहे मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के राष्ट्रपति के ADC पद से इस्तीफा देने के बाद इस पद को लेकर युवाओं की दिलचस्पी बढ़ गई है. आखिर राष्ट्रपति के साथ रहने वाले ADC की भूमिका क्या होती है? इस पद तक पहुंचने के लिए कौन सी परीक्षा देनी होती है और चयन प्रक्रिया कितनी कठिन होती है? मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राज शमानी के पॉडकास्ट में इस पद से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की थीं.

क्या होता है राष्ट्रपति का ADC पद?

ADC का पूरा नाम Aide de Camp (ऐड डि कैम्प) है. यह सशस्त्र बलों में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला पद है. राष्ट्रपति के ADC के लिए सेना के योग्य कमिशंड अधिकारियों में से चयन किया जाता है. इसमें सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी शामिल हो सकते हैं. इस पद पर पहुंचने के लिए कोई अलग से सीधी भर्ती नहीं होती. पहले उम्मीदवार को सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में शामिल होना पड़ता है. मेजर ऋषभ सिंह संब्याल खुद NDA के जरिए भारतीय सेना में शामिल हुए थे.

NDA और CDS के जरिए बन सकते हैं सेना में अधिकारी

राष्ट्रपति के ADC बनने की शुरुआत सैन्य अधिकारी के रूप में करियर बनाने से होती है. सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारी बनने के प्रमुख रास्तों में UPSC NDA और CDS परीक्षाएं शामिल हैं. NDA परीक्षा 12वीं के बाद दी जा सकती है, जबकि CDS परीक्षा के लिए स्नातक होना जरूरी होता है. इन परीक्षाओं के जरिए चयनित उम्मीदवार सैन्य प्रशिक्षण हासिल करते हैं और अधिकारी के रूप में सेवा शुरू करते हैं. इसके बाद ही ADC जैसे पदों के लिए चयन की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलता है.

5 से 7 साल की सेवा के बाद शुरू होती है प्रक्रिया

मेजर संब्याल के मुताबिक, राष्ट्रपति के ADC के लिए चयन प्रक्रिया लंबी और कई स्तरों वाली होती है. शुरुआत में तीनों सेनाओं में से योग्य अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है. इसमें अधिकारी की सेवा अवधि के साथ सर्विस ब्रैकेट, उम्र सीमा और अन्य निर्धारित मानकों को देखा जाता है. उन्होंने बताया कि आम तौर पर ऐसे अधिकारियों को प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, जो सेना में करीब 5 से 7 साल की सेवा पूरी कर चुके हों. शॉर्टलिस्टिंग के बाद अधिकारियों की मेरिट तैयार की जाती है और उन्हें अगले चरण के लिए आगे बढ़ाया जाता है.

सर्विस हेडक्वार्टर में होता है इंटरव्यू

शॉर्टलिस्ट किए गए अधिकारियों का इंटरव्यू उनके संबंधित सर्विस हेडक्वार्टर की ओर से लिया जाता है. इस चरण में सिर्फ ज्ञान ही नहीं, बल्कि यह भी परखा जाता है कि अधिकारी अचानक पैदा हुई परिस्थिति में किस तरह प्रतिक्रिया देता है. उम्मीदवार की सिचुएशनल अवेयरनेस यानी परिस्थितियों को समझने और उसके अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस प्रक्रिया के बाद चुने गए करीब पांच अधिकारियों को अगले चरण के लिए आगे भेजा जाता है.

राष्ट्रपति भवन में करीब 14 दिन तक होती है परीक्षा

अगले चरण में चयनित अधिकारियों को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बुलाया जाता है. संब्याल के अनुसार, यहां करीब 14 दिनों तक इंटरव्यू और अलग अलग स्तर पर परख की जाती है. इस दौरान वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और राष्ट्रपति के सचिव की मौजूदगी में उम्मीदवारों को विभिन्न स्तरों पर आंका जाता है. उनकी जानकारी, दबाव में काम करने की क्षमता, स्वभाव और नई जानकारी को तेजी से सीखने की क्षमता जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है. इसके साथ ही उम्मीदवार की सेवा पृष्ठभूमि, चरित्र और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच तथा सुरक्षा सत्यापन की प्रक्रिया भी होती है. इन सभी चरणों के बाद अंतिम उम्मीदवार का चयन किया जाता है.

राष्ट्रपति के ADC के लिए करंट अफेयर्स की जानकारी जरूरी

ADC की जिम्मेदारी सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होती. राष्ट्रपति के साथ लगातार रहने वाले अधिकारी के लिए देश दुनिया की घटनाओं और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण है. मेजर संब्याल ने बताया था कि ADC नियमित रूप से समाचार देखते हैं और करंट अफेयर्स से अपडेट रहते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी विषय से जुड़ी जानकारी तुरंत दी जा सके. उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि स्पेशल फोर्सेज में दूरदराज के इलाकों में तैनाती के दौरान जियोपॉलिटिक्स और करंट अफेयर्स उनके लिए चुनौती रहे थे. राष्ट्रपति भवन की चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने रात में पढ़ाई करके इस कमी को दूर करने की कोशिश की थी. इस तरह राष्ट्रपति के ADC तक पहुंचने का रास्ता किसी एक परीक्षा से पूरा नहीं होता. पहले सशस्त्र बलों में अधिकारी बनना, फिर सेवा अनुभव हासिल करना और उसके बाद कई स्तरों वाली चयन, इंटरव्यू, मूल्यांकन और सुरक्षा जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

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