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Home > क्राइम > टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस, तीनों आरोपियों की भूमिका की जांच, पुलिस को 28 अक्टूबर तक मिली कस्टडी

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस, तीनों आरोपियों की भूमिका की जांच, पुलिस को 28 अक्टूबर तक मिली कस्टडी

Tiger shroff firing case: टाइगर श्रॉफ से जुड़े मुंबई फायरिंग मामले में सोनीपत से गिरफ्तार अंकित, समीर और जतिन पांचाल को अदालत ने 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है. पुलिस ने कथित रेकी, हथियार उपलब्ध कराने और अन्य आरोपियों से संपर्क की जांच के लिए कस्टडी मांगी थी. मामले में होटल के CCTV फुटेज, रजिस्टर और आरे कॉलोनी में 17 अक्टूबर को कथित फायरिंग प्रैक्टिस के पहलू की भी जांच की जा रही है. बचाव पक्ष ने लंबी पुलिस हिरासत की मांग का विरोध किया.

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Last Updated: October 23, 2026 19:49:27 IST

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Tiger shroff firing case: मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में हरियाणा के सोनीपत से गिरफ्तार तीन आरोपियों को अदालत ने 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. आरोपियों को आज एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया था. पुलिस ने उनकी कथित भूमिका, अन्य आरोपियों से संपर्क और आपराधिक साजिश की कड़ियों का पता लगाने के लिए हिरासत मांगी. सरकारी पक्ष ने 31 अक्टूबर तक कस्टडी देने की मांग की थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत का आदेश दिया.

अंकित, समीर और जतिन पांचाल की क्या है भूमिका?

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित, समीर और जतिन पांचाल के रूप में हुई है. जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि अंकित कथित तौर पर रेकी करने के लिए मुंबई आया था. वहीं, समीर सीधे अनिल पंडित के संपर्क में था. पुलिस का आरोप है कि जतिन पांचाल ने फायरिंग करने वाले आरोपी को हथियार उपलब्ध कराया था. जांच एजेंसी अब तीनों के आपसी संबंधों और अन्य संदिग्धों से उनके संपर्कों की पड़ताल कर रही है.

सरकारी पक्ष ने क्यों मांगी लंबी कस्टडी?

सरकारी वकील क्रांति कुंभार ने अदालत में कहा कि मामले के कई वांछित आरोपी अभी महाराष्ट्र से बाहर हैं. ऐसे में कथित साजिश की पूरी कड़ी और आरोपियों के बीच संपर्कों का पता लगाने के लिए विस्तृत पूछताछ जरूरी है. अभियोजन पक्ष ने 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत की मांग की और कहा कि कम अवधि में जांच का उद्देश्य पूरा करना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, अदालत ने तीनों आरोपियों को 28 अक्टूबर तक कस्टडी में भेजने का फैसला सुनाया.

CCTV फुटेज और होटल का रजिस्टर जब्त

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों के साथ उस होटल के भी कई CCTV फुटेज बरामद किए हैं, जहां कथित तौर पर फायरिंग का अभ्यास किया गया था. घटना से पहले और बाद के होटल के फुटेज हासिल किए गए हैं. इसके अलावा होटल का रजिस्टर भी जब्त किया गया है. पुलिस इन सबूतों की जांच कर आरोपियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाना चाहती है.

बचाव पक्ष ने कस्टडी की मांग पर उठाए सवाल

तीनों आरोपियों की ओर से पेश वकील अजिंक्य मिरगल ने पुलिस हिरासत की मांग का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि तीनों में से कोई भी कथित फायरिंग के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं था. बचाव पक्ष ने यह सवाल भी उठाया कि जब पुलिस आरोपियों को दो दिनों में हरियाणा से मुंबई ला सकती है, तो लंबी हिरासत की जरूरत क्यों है. वकील ने पुलिस की मांग को अनुचित बताते हुए कस्टडी की अवधि पर आपत्ति जताई.

अदालत ने आरोपियों से पूछी शिकायत

सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों आरोपियों से पूछा कि क्या उन्हें पुलिस के खिलाफ कोई शिकायत है. उन्होंने किसी शिकायत से इनकार कर दिया. अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों को कोर्ट रूम में ही पांच मिनट तक आरोपियों से मुलाकात करने की अनुमति भी दी. वहीं, जांच में मुंबई की आरे कॉलोनी में कथित फायरिंग प्रैक्टिस का पहलू भी सामने आया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फायरिंग की घटना से एक दिन पहले, 17 अक्टूबर को, तीनों आरोपियों ने वहां प्रैक्टिस की थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित अभ्यास का घटना से क्या संबंध था और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं.

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Tiger shroff firing case: मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में हरियाणा के सोनीपत से गिरफ्तार तीन आरोपियों को अदालत ने 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. आरोपियों को आज एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया था. पुलिस ने उनकी कथित भूमिका, अन्य आरोपियों से संपर्क और आपराधिक साजिश की कड़ियों का पता लगाने के लिए हिरासत मांगी. सरकारी पक्ष ने 31 अक्टूबर तक कस्टडी देने की मांग की थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत का आदेश दिया.

अंकित, समीर और जतिन पांचाल की क्या है भूमिका?

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित, समीर और जतिन पांचाल के रूप में हुई है. जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि अंकित कथित तौर पर रेकी करने के लिए मुंबई आया था. वहीं, समीर सीधे अनिल पंडित के संपर्क में था. पुलिस का आरोप है कि जतिन पांचाल ने फायरिंग करने वाले आरोपी को हथियार उपलब्ध कराया था. जांच एजेंसी अब तीनों के आपसी संबंधों और अन्य संदिग्धों से उनके संपर्कों की पड़ताल कर रही है.

सरकारी पक्ष ने क्यों मांगी लंबी कस्टडी?

सरकारी वकील क्रांति कुंभार ने अदालत में कहा कि मामले के कई वांछित आरोपी अभी महाराष्ट्र से बाहर हैं. ऐसे में कथित साजिश की पूरी कड़ी और आरोपियों के बीच संपर्कों का पता लगाने के लिए विस्तृत पूछताछ जरूरी है. अभियोजन पक्ष ने 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत की मांग की और कहा कि कम अवधि में जांच का उद्देश्य पूरा करना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, अदालत ने तीनों आरोपियों को 28 अक्टूबर तक कस्टडी में भेजने का फैसला सुनाया.

CCTV फुटेज और होटल का रजिस्टर जब्त

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों के साथ उस होटल के भी कई CCTV फुटेज बरामद किए हैं, जहां कथित तौर पर फायरिंग का अभ्यास किया गया था. घटना से पहले और बाद के होटल के फुटेज हासिल किए गए हैं. इसके अलावा होटल का रजिस्टर भी जब्त किया गया है. पुलिस इन सबूतों की जांच कर आरोपियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाना चाहती है.

बचाव पक्ष ने कस्टडी की मांग पर उठाए सवाल

तीनों आरोपियों की ओर से पेश वकील अजिंक्य मिरगल ने पुलिस हिरासत की मांग का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि तीनों में से कोई भी कथित फायरिंग के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं था. बचाव पक्ष ने यह सवाल भी उठाया कि जब पुलिस आरोपियों को दो दिनों में हरियाणा से मुंबई ला सकती है, तो लंबी हिरासत की जरूरत क्यों है. वकील ने पुलिस की मांग को अनुचित बताते हुए कस्टडी की अवधि पर आपत्ति जताई.

अदालत ने आरोपियों से पूछी शिकायत

सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों आरोपियों से पूछा कि क्या उन्हें पुलिस के खिलाफ कोई शिकायत है. उन्होंने किसी शिकायत से इनकार कर दिया. अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों को कोर्ट रूम में ही पांच मिनट तक आरोपियों से मुलाकात करने की अनुमति भी दी. वहीं, जांच में मुंबई की आरे कॉलोनी में कथित फायरिंग प्रैक्टिस का पहलू भी सामने आया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फायरिंग की घटना से एक दिन पहले, 17 अक्टूबर को, तीनों आरोपियों ने वहां प्रैक्टिस की थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित अभ्यास का घटना से क्या संबंध था और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं.

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