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Amalaki Ekadashi 2026: 26 या 27, कब है आमलकी एकादशी? पंडित से जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Amalaki Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में हर महीने पड़ने वाली एकादशी का अपना अलग ही महत्व होता है. एकादशी को व्रतों का राजा कहा जाता है. जानिए इस दिन आंवले की पूजा का क्या महत्व है? पूजा विधि और पारण कब करें?

Amalaki Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में हर महीने पड़ने वाली एकादशी का अपना अलग ही महत्व होता है. एकादशी को व्रतों का राजा कहा जाता है. एकादशी पर भगवान नारायण की पूजा की जाती है. यह दिन जप और तप के लिए बेहद खास होता है. फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष में पड़ने वाली आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सबसे अच्छा व्रत बताया गया है.

ऐसी मान्यता है कि इस दिन शरीर में अलग तरह के रिएक्शन भी होते हैं, जिन्हें योगीजन ही समझ सकते हैं. इसलिए तो एकादशी पर अन्न खाने के लिए मना किया जाता है. भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का उपवास रखकर पूजा की जाती है. इससे भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आमलकी एकादशी को आंवले के पेड़ से जोड़कर देखा जाता है. आमलकी एकादशी का व्रत की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित प्रमोद पांडेय से विस्तार में जानते हैं. 

आमलकी एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पं. प्रमोद पांडेय बताते हैं कि पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष की एकादशी 26 फरवरी की रात 12:33 बजे लग रही है यानी 12 के बाद दूसरा दिन माना जाता है तो यह 27 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 12:33 बजे प्रारंभ होकर 27 फरवरी 2026 की रात्रि को 10:32 बजे तक रहने वाली है. ऐसे में उदया तिथि को आधार मानकर 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. वहीं, पारण की बात की जाए तो यह पंचांग के मुताबिक आमलकी एकादशी के अगले दिन 28 फरवरी 2026 शनिवार को सुबह 06:47 से 09:06 बजे के बीच होगा. शास्त्रों के अनुसार, पारण के पूरा किए बिना एकादशी व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है.

एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

पंडित प्रमोद पांडेय बताते हैं कि आमलकी एकादशी को मोक्षदायनी कहा गया है. आयुर्वेद के अनुसार, आंवला सबसे अच्छा फल होता है. इसे अमृत फल कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले को भगवान नारायण ने आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया था. इसकी विशेष पूजा होती है और इसके प्रत्येक भाग में देवताओं का वास माना जाता है. इस दिन आंवले का सेवन और दान करना शुभ माना जाता है. इससे स्वास्थ्य और सम्पन्नता की प्राप्ति होती है. इस आमलकी एकादशी को आंवले की पूजा करने से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. श्रध्दा के साथ किया गया यह व्रत मनुष्यों को आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है. आमलकी एकादशी को बनारस या वाराणसी में रंगभरी एकादशी के तौर पर मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव, माता पार्वती को काशी लेकर आए थे. इसी परंपरा की वजह से यहां से होली का औपचारिक प्रारंभ माना जाता है.

पूजा विधि में यह करें

  • इस दिन आप जल्दी सूर्य उगने से पहले उठें और स्नान करके साफ कपड़े पहनें, हो सके तो पीले वस्त्र पहनें.
  • इसके बाद तांबे के पात्र से सूर्य नारायण को जल चढ़ाएं. जल में कुमकुम और लाल फूल मिलाना अच्छा माना जाता है.
  • इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे ही भगवान नारायण की पूजा करने का महत्व है. अगर आपके आसपास कहीं आंवला का पेड़ नहीं है तो घर पर पूजा वाली जगह पर विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित कर पूजन करें.
  • भगवान का शंख से दूध और जल से अभिषेक करना चाहिए. साथ ही फूल, चंदन, माला, धूप, दीप और प्रसाद से पूजन करें.
  • भगवान को आंवला का फल चढ़ाना चाहिए और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का दिनभर मन में जाप करें.
  • आंवले के पेड़ की पूजा 11 या 108 परिक्रमा करनी चाहिए.
  • वृक्ष की जड़ में जल, दूध, फूल, अक्षत, और चंदन अर्पित करें.
  • आंवले के पेड़ में कलावा भी लपेटने का महत्व है.
  • घी का दीपक जलाकर एकादशी व्रत कथा सुनकर आरती करनी चाहिए.
  • व्रत का पारण अगले दिन 9 बजे के पहले कर लें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी  जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. इंडिया न्यूज सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. 

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