Can Muslims Wear Rakhi: हिंदू धर्म में हर त्योहार बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है. हर त्योहार की अपनी अलग मान्यता है. हिंदू धर्म में भाई-बहनों को दो त्योहार होते हैं: रक्षाबंधन और भाईदूज. इन दोनों त्योहारों का भाई-बहनों को बेहद इंतजार रहता है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है. वहीं भाई बहन की रक्षा का वचन देता है. केवल हिंदू धर्म के अलाना कई और धर्म के लोग भी इस त्योहार को मनाते हैं.
क्या मुस्लिम बांध सकते हैं राखी?
इस्लाम धर्म में राखी बांधने और रक्षाबंधन का पर्व को नहीं मनाया जाता है. इस धर्म में ये पर्व मनाने की इजाजत नहीं है. क्योंकि, गैर-इस्लामी धार्मिक अनुष्ठानों या रीति रिवाजों का हिस्सा माना जाता है. जानकारी के मुताबिक, इस्लाम में राखी बांधने को कोई ऐतिहासित सबूत या तथ्य नहीं है. न ही इस त्योहार को लेकर हदीस या कुरान में कोई जिक्र किया गया है. ये हिंदू धर्म का पर्व है. मुसलमानों के लिए राखी बांधना या बंधवाना बिल्कुल जायज नहीं है. इसलिए मुसलमान ये त्योहार नहीं मना सकते हैं.
क्या कहता है इस्लामिक धर्म?
इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, मुसलमान गैर-इस्लामी त्योहारों या उससे जुड़े रिवाज में हिस्सा लेना मना है. इसे इस्लाम में दूसरे धर्म के रीति रिवाजों की नकल की कैटेगरी में रखा गया है. ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा जैसे त्योहार ही इस्लाम में मनाए जाते हैं. वह हिंदू त्योहार नहीं मना सकते हैं.
2026 में कब है रक्षाबंधन?
साल 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा.
- पूर्णिमा शुरू: 27 अगस्त, सुबह 9:08 बजे
- पूर्णिमा खत्म: 28 अगस्त, सुबह 9:48 बजे
- राखी बांधने का शुभ समय: 28 अगस्त, सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक
- शुभ मुहूर्त: करीब 3 घंटे 51 मिनट