Ashok Kumar First Rap Song: आज रैप का नाम आते ही हनी सिंह, बादशाह, रफ्तार और डिवाइन जैसे नाम जेहन में आते हैं. तेज बीट, फास्ट बोल और अलग अंदाज में कहानी कहने वाले इन गानों ने म्यूजिक की दुनिया में रैप को एक अलग पहचान दी है. हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि कि हिंदी सिनेमा में रैप जैसा अंदाज आज से नहीं बल्कि करीब 58 साल पहले सुनाई दे चुका था? इस अनोखी कहानी के केंद्र में कोई नए जमाने का रैपर नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर अशोक कुमार थे.
अशोक कुमार को फिल्म इंडस्ट्री में प्यार से ‘दादामुनि’ कहा जाता था. साल 1968 में आई फिल्म ‘आशीर्वाद’ में उन्होंने ऐसा गीत गाया, जिसे आज भी हिंदी सिनेमा के शुरुआती रैप के तौर पर याद किया जाता है.
‘रेल गाड़ी’ ने मचाई थी धूम
गाने के बोल थे, ‘रेल गाड़ी, रेल गाड़ी, छुक-छुक…’ सुनने में यह बच्चों का एक साधारण-सा खेल लगता है लेकिन इसे जिस अंदाज में पेश किया गया, वह अपने दौर से काफी अलग था. गाने में अशोक कुमार पारंपरिक तरीके से सुर लगाकर नहीं गाते. वह तेज रफ्तार में शब्दों को बोलते हुए आगे बढ़ते हैं. उनकी आवाज में एक खास लय थी, जो आज के स्पोकन रैप की याद दिलाती है. गाने को बच्चों के उस खेल से जोड़ा गया था, जिसमें बच्चे एक-दूसरे के पीछे खड़े होकर रेलगाड़ी बनाते हैं. स्क्रीन पर यह पूरा माहौल बेहद मासूम और मनोरंजक नजर आता है.
एक गाने में 28 रेलवे स्टेशन के नाम
‘रेल गाड़ी’ की सबसे दिलचस्प बात इसके बोल थे. गाने की रफ्तार के बीच कई शहरों और रेलवे स्टेशनों के नाम सुनाई देते हैं. इसमें रायपुर, जयपुर, सोलापुर और कोल्हापुर जैसे शहरों का जिक्र किया गया था. इतना ही नहीं, गाने में करीब 28 रेलवे स्टेशनों के नामों को भी बेहद तेज अंदाज में पिरोया गया था. यानी एक तरफ बच्चों का खेल, दूसरी तरफ दौड़ती रेल और उसके साथ तेजी से बोले जाते शहरों और स्टेशनों के नाम, उस दौर के हिसाब से यह प्रयोग काफी अनोखा था. मजेदार बात यह है कि गाने का नाम भले ही रेल गाड़ी था लेकिन इसमें किसी रेलवे स्टेशन का वास्तविक दृश्य नहीं दिखाया गया.
कविता से बना गीत
इस गीत की जड़ें मशहूर कवि और लेखक हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय की कविता से जुड़ी थीं. वह इस कविता को रेडियो पर भी सुनाया करते थे. बाद में इसी रचना को फिल्म आशीर्वाद में एक अलग अंदाज में इस्तेमाल किया गया. फिल्म का निर्देशन हृषिकेश मुखर्जी ने किया था और अशोक कुमार इसमें मुख्य भूमिका में थे. फिल्म की कहानी और एक्टिंग के साथ इस गीत ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।.
गाने ने दिलाई बड़ी पहचान
अशोक कुमार के लिए आशीर्वाद सिर्फ एक फिल्म नहीं थी. उनकी एक्टिंग और इस फिल्म से जुड़े काम को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला. साल 1969 में उन्हें ‘आशीर्वाद’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था. आज भी जब रैप सॉन्ग्स के इतिहास की बात होती है, तो ये गाने चर्चा में रहते हैं.
ये भी पढ़ें: राजेश खन्ना का वो गाना, जो बाइबिल की सीख से बना था, किशोर कुमार की आवाज ने बनाया सदाबहार