Chantra Grahan on Holika 2026: ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार होलिका दहन 3 मार्च होगा. इसलिए होली 4 मार्च को होगी. ध्यान देने की बात यह है कि, होली के दिन ही चंद्र ग्रहण और भद्रा भी लगेगी. ऐसे में लोगों का सवाल है कि, चंद्र ग्रहण होने के कारण होली पर पूजन का समय क्या रहेगा? ग्रहण का समय क्या रहेगा? सूतक कब शुरू होगा? इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
इस बार होली पर चंद्रग्रहण और भद्रा का साया... तो कब होगा होलिका दहन. (Canva)
Chantra Grahan on Holika 2026: होली हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है. यह त्योहार पूरी निष्ठा और परंपरा के साथ मनाया जाता है. माना जाता है कि, होलिका दहन के साथ सभी बुराइयों का नाश हो जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात को लोग मिलकर होलिका जलाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन से दुख, तनाव और बुरी ऊर्जा दूर हो जाएं. ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार होलिका दहन 3 मार्च होगा. इसलिए होली 4 मार्च को होगी. ध्यान देने की बात यह है कि, होली के दिन ही चंद्र ग्रहण भी लगेगा. ऐसे में लोगों का सवाल है कि, चंद्र ग्रहण होने के कारण होली पर पूजन का समय क्या रहेगा? ग्रहण का समय क्या रहेगा? सूतक कब से शुरू हो जाएगा? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, साल 2026 में होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी. वहीं, होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को अर्धरात्रि में किया जाएगा. बता दें कि, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर हो जाएगी. फिर इस तिथि का समापन 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में तिथि की गणना के अनुसार, 3 मार्च 2026 को होलिका दहन किया जाएगा. इसी दिन चंद्र ग्रहण लगेगा, जोकि भारत में देखा जा सकेगा. इसके बाद 4 मार्च 2026 को रंगों की होली खेली जाएगी.
खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए होली का दिन बेहद खास होने वाला है. यानी होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण का साया बना रहेगा. ग्रहण का समय 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे पूरे एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा सकता है. इसके अलावा पैसिफिक द्वीपों और उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका में भी यह नजर आ सकता है.
होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा. इस ग्रहण को ब्लड मून कहा जाएगा. भारत में सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले, यानी सुबह लगभग 06:20 बजे से ही शुरु हो जाएगा. सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और किसी भी प्रकार की नई शुरुआत या पूजा-पाठ की मनाही होती है. क्योंकि ग्रहण शाम 06:47 बजे समाप्त हो रहा है, इसलिए होलिका दहन का कोई भी विधान इस समय के बाद ही किया जाना चाहिए.
इस साल पंचांग के अनुसार, 3 मार्च 2026 को भद्रा का समय सुबह 1 बजकर 25 मिनट से सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. ज्योतिष मत के अनुसार, भद्रा में होलिका दहन करना वर्जित माना गया है. इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ रहेगा. फाल्गुन पूर्णिमा की रात 2 मार्च को भद्रा से पहले होलिका दहन किया जाएगा.
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