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Home > धर्म > हाथ में बंधा कलावा दे रहा है अशुभ संकेत? जानिए कब बदलना चाहिए वरना किस्मत पड़ सकती है भारी

हाथ में बंधा कलावा दे रहा है अशुभ संकेत? जानिए कब बदलना चाहिए वरना किस्मत पड़ सकती है भारी

Kalava Ke Niyam: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ के बाद अक्सप रक्षा-सुत्र कलाई में बांधा जाता है,जिसे कलावा भी कहते हैं,इसके पहनने के भी नियम होते हैं,लेकिन बहुत सारे लोग जाने-अनजाने में इसको लंबे समय तक धारण किए रहते हैं,आइए जानते हैं इसके सही नियम के बारे में.

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Last Updated: April 27, 2026 17:41:34 IST

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Kalava Upay: हिंदू धर्म में कलावा, मौली या रक्षासूत्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन, व्रत, शुभ कार्य या किसी मांगलिक अवसर पर कलाई पर कलावा बांधने की परंपरा बहुत पुरानी है. इसे सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि सुरक्षा, शुभता और संकल्प का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शक्ति और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है.

अक्सर लोग पूजा के समय कलावा बंधवाने के बाद उसे कई महीनों तक हाथ में बांधे रखते हैं. कई लोग तब तक नहीं उतारते, जब तक वह अपने आप टूटकर गिर न जाए. लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंबे समय तक पुराना कलावा पहनना उचित नहीं माना जाता. समय-समय पर इसे बदलना जरूरी बताया गया है. आइए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण हैं और कब बदलना चाहिए.

 क्यों जरूरी है समय पर कलावा बदलना?

जब पूजा या अनुष्ठान के दौरान पंडित मंत्रोच्चारण के साथ कलाई पर कलावा बांधते हैं, तो उसे एक शुभ संकल्प और सकारात्मक भावना से जोड़ा जाता है. इसी वजह से यह केवल धागा नहीं, बल्कि धार्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.

आध्यात्मिक प्रभाव सीमित समय तक माना जाता है

मान्यता है कि कलावे का प्रभाव एक निश्चित अवधि तक अधिक सक्रिय रहता है. कुछ परंपराओं के अनुसार लगभग 21 दिन तक इसका शुभ प्रभाव माना जाता है. इसके बाद धागा पुराना होने लगता है और उसका महत्व धीरे-धीरे कम माना जाता है.

धागा अपवित्र हो सकता है

कलावा सामान्यतः सूती धागे से बना होता है. रोजमर्रा के काम, पसीना, धूल, स्नान और बाहरी संपर्क के कारण यह गंदा या कमजोर हो सकता है. ऐसे में पुराना और मैले रूप में इसे पहनना शुभ नहीं माना जाता.

 टूटा या फटा कलावा शुभ संकेत नहीं

यदि कलावा टूट जाए, बिखर जाए या बहुत खराब हो जाए तो इसे बदल लेना बेहतर माना जाता है. धार्मिक दृष्टि से खराब अवस्था में रक्षासूत्र धारण करना उचित नहीं माना जाता.

 कलावा बदलने का सही समय क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ दिन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं, जिनमें नया कलावा धारण किया जा सकता है.

  • मंगलवार – हनुमान जी और मंगल ग्रह से जुड़ा दिन माना जाता है.
  • शनिवार – शनि देव की कृपा और नकारात्मकता दूर करने का दिन माना जाता है.
  • संक्रांति – सूर्य के राशि परिवर्तन का दिन भी शुभ माना जाता है.
  • मासिक पूजा या व्रत के बाद – यदि किसी विशेष संकल्प से कलावा बांधा गया हो.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

 

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Last Updated: April 27, 2026 17:41:34 IST

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Kalava Upay: हिंदू धर्म में कलावा, मौली या रक्षासूत्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन, व्रत, शुभ कार्य या किसी मांगलिक अवसर पर कलाई पर कलावा बांधने की परंपरा बहुत पुरानी है. इसे सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि सुरक्षा, शुभता और संकल्प का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शक्ति और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है.

अक्सर लोग पूजा के समय कलावा बंधवाने के बाद उसे कई महीनों तक हाथ में बांधे रखते हैं. कई लोग तब तक नहीं उतारते, जब तक वह अपने आप टूटकर गिर न जाए. लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंबे समय तक पुराना कलावा पहनना उचित नहीं माना जाता. समय-समय पर इसे बदलना जरूरी बताया गया है. आइए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण हैं और कब बदलना चाहिए.

 क्यों जरूरी है समय पर कलावा बदलना?

जब पूजा या अनुष्ठान के दौरान पंडित मंत्रोच्चारण के साथ कलाई पर कलावा बांधते हैं, तो उसे एक शुभ संकल्प और सकारात्मक भावना से जोड़ा जाता है. इसी वजह से यह केवल धागा नहीं, बल्कि धार्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.

आध्यात्मिक प्रभाव सीमित समय तक माना जाता है

मान्यता है कि कलावे का प्रभाव एक निश्चित अवधि तक अधिक सक्रिय रहता है. कुछ परंपराओं के अनुसार लगभग 21 दिन तक इसका शुभ प्रभाव माना जाता है. इसके बाद धागा पुराना होने लगता है और उसका महत्व धीरे-धीरे कम माना जाता है.

धागा अपवित्र हो सकता है

कलावा सामान्यतः सूती धागे से बना होता है. रोजमर्रा के काम, पसीना, धूल, स्नान और बाहरी संपर्क के कारण यह गंदा या कमजोर हो सकता है. ऐसे में पुराना और मैले रूप में इसे पहनना शुभ नहीं माना जाता.

 टूटा या फटा कलावा शुभ संकेत नहीं

यदि कलावा टूट जाए, बिखर जाए या बहुत खराब हो जाए तो इसे बदल लेना बेहतर माना जाता है. धार्मिक दृष्टि से खराब अवस्था में रक्षासूत्र धारण करना उचित नहीं माना जाता.

 कलावा बदलने का सही समय क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ दिन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं, जिनमें नया कलावा धारण किया जा सकता है.

  • मंगलवार – हनुमान जी और मंगल ग्रह से जुड़ा दिन माना जाता है.
  • शनिवार – शनि देव की कृपा और नकारात्मकता दूर करने का दिन माना जाता है.
  • संक्रांति – सूर्य के राशि परिवर्तन का दिन भी शुभ माना जाता है.
  • मासिक पूजा या व्रत के बाद – यदि किसी विशेष संकल्प से कलावा बांधा गया हो.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

 

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