Shivling Or Jyotirlinga Me Kya Antar Hota hai: सावन का महीना आते ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है. कोई घर के मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक करता है तो कोई 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए लंबी यात्रा पर निकल पड़ता है. लेकिन बहुत से लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में अंतर क्या है? क्या दोनों एक ही हैं या इनके धार्मिक महत्व में कोई फर्क है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक समय भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ. उसी दौरान भगवान शिव अनंत प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए. उन्होंने दोनों देवताओं से उस प्रकाश का आरंभ और अंत खोजने को कहा, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाया. तब दोनों ने शिव की महिमा स्वीकार की. कहा जाता है कि इसी दिव्य ज्योति के स्वरूप से पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए, जिन्हें भगवान शिव का स्वयंभू रूप माना जाता है.
सामान्य शिवलिंग क्या होता है?
देश के अधिकांश मंदिरों और घरों में स्थापित शिवलिंग सामान्य शिवलिंग होते हैं. इन्हें पत्थर, संगमरमर, धातु, मिट्टी, स्फटिक या अन्य सामग्री से बनाया जाता है. स्थापना के समय वैदिक मंत्रों के साथ प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है. इसके बाद नियमित पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप के जरिए इनकी आराधना की जाती है.
ज्योतिर्लिंग क्यों माने जाते हैं खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग किसी इंसान द्वारा निर्मित नहीं हैं. इन्हें भगवान शिव का स्वयं प्रकट स्वरूप माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इन स्थानों पर भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा हमेशा विद्यमान रहती है. इसलिए यहां दर्शन और जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है.
दोनों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग दोनों भगवान शिव के पूजनीय स्वरूप हैं, लेकिन दोनों की उत्पत्ति अलग मानी जाती है.
- सामान्य शिवलिंग का निर्माण मनुष्य करता है.
- ज्योतिर्लिंग स्वयंभू माने जाते हैं.
- सामान्य शिवलिंग में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पूजा की जाती है.
- ज्योतिर्लिंग को पहले से ही जाग्रत और दिव्य स्वरूप माना जाता है.
- दोनों की पूजा का धार्मिक महत्व है, लेकिन ज्योतिर्लिंगों को विशेष तीर्थ माना गया है.
भारत के 12 प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग
भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग बताए गए हैं. इनमें सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर शामिल हैं. हर ज्योतिर्लिंग का अपना अलग धार्मिक महत्व और इतिहास माना जाता है.
सावन में क्यों बढ़ जाता है महत्व?
सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है. इस दौरान भक्त जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर शिव का अभिषेक करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.