Cervical Cancer Vaccine: भारत ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भारत में विकसित CERVAVAC को प्रीक्वालिफिकेशन दे दिया है. WHO के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस वैक्सीन की प्रीक्वालिफिकेशन की प्रभावी तारीख 25 सितंबर 2026 दर्ज है. इसे पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने तैयार किया है. अब संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए इस भारतीय HPV वैक्सीन की खरीद का रास्ता आसान होगा.
CERVAVAC को क्यों माना जा रहा है बड़ी उपलब्धि?
CERVAVAC एक क्वाड्रिवैलेंट HPV वैक्सीन है, यानी यह ह्यूमन पैपिलोमावायरस के चार प्रकारों के खिलाफ सुरक्षा देती है. WHO के आधिकारिक उत्पाद रिकॉर्ड में इसके निर्माता के तौर पर Serum Institute of India का नाम दर्ज है और भारत इसकी नियामक निगरानी करने वाला देश है. यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि WHO प्रीक्वालिफिकेशन किसी वैक्सीन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीद कार्यक्रमों में शामिल होने की दिशा में अहम कदम माना जाता है. WHO के अनुसार किसी वैक्सीन को प्रीक्वालिफिकेशन के लिए राष्ट्रीय नियामक की मंजूरी और निर्धारित गुणवत्ता, सुरक्षा तथा कार्यक्रम संबंधी मानकों को पूरा करना होता है.
HPV के चार स्ट्रेन से बचाव देती है वैक्सीन
CERVAVAC HPV के चार प्रकारों यानी 16, 18, 6 और 11 के खिलाफ काम करती है. HPV के उच्च जोखिम वाले प्रकार, खासकर 16 और 18, सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों से जुड़े माने जाते हैं. भारत सरकार के अनुसार देश में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है और लगातार हाई-रिस्क HPV संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में शामिल है. HPV संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण को बीमारी से बचाव की अहम रणनीति माना जाता है. इसी वजह से कम उम्र में वैक्सीनेशन पर जोर दिया जाता है, ताकि HPV के संभावित संपर्क से पहले सुरक्षा मिल सके.
अब दूसरे देशों में खरीद आसान होगी
WHO की प्रीक्वालिफिकेशन के बाद CERVAVAC को संयुक्त राष्ट्र से जुड़े खरीद तंत्र और दूसरे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए हासिल करना आसान हो सकता है. इसका सीधा फायदा उन देशों को हो सकता है जो कम लागत में गुणवत्तापूर्ण HPV वैक्सीन की तलाश में हैं. हालांकि, किसी देश में वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने का फैसला उस देश की अपनी स्वास्थ्य नीति, नियामकीय प्रक्रिया और बजट पर निर्भर करेगा. WHO प्रीक्वालिफिकेशन अपने आप किसी देश के राष्ट्रीय कार्यक्रम में वैक्सीन शामिल होने का आदेश नहीं है.
भारत में पहले ही शुरू हो चुका HPV टीकाकरण अभियान
भारत सरकार ने 28 फरवरी 2026 को 14 साल की करीब 1.15 करोड़ लड़कियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मुफ्त HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया था. सरकार ने इस अभियान को सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम से जोड़ते हुए देशभर में लागू किया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024 में भारत में सर्वाइकल कैंसर के अनुमानित 78,499 नए मामले और 42,000 से ज्यादा मौतें दर्ज हुई थीं. ऐसे में HPV संक्रमण को रोकने वाली वैक्सीन को सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भारत की पहली स्वदेशी HPV वैक्सीन के तौर पर पहचान
CERVAVAC को 2022 में भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित HPV वैक्सीन के रूप में पेश किया गया था. उस समय सरकार ने इसे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए भारत के स्वदेशी वैक्सीन विकास में महत्वपूर्ण कदम बताया था. WHO की ताजा प्रीक्वालिफिकेशन के बाद इस वैक्सीन की पहचान अब केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगी. वैश्विक स्वास्थ्य खरीद व्यवस्था में इसके लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं और विकासशील देशों में HPV टीकाकरण की पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में क्यों अहम है HPV वैक्सीन?
सर्वाइकल कैंसर का बड़ा हिस्सा हाई-रिस्क HPV संक्रमण से जुड़ा है. WHO और भारत सरकार की ओर से HPV वैक्सीनेशन को रोकथाम के महत्वपूर्ण उपायों में शामिल किया गया है. भारत में महिलाओं में यह दूसरा सबसे आम कैंसर है, इसलिए शुरुआती उम्र में टीकाकरण और समय पर जांच दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है. CERVAVAC की WHO प्रीक्वालिफिकेशन ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया के कई देशों में HPV वैक्सीन की राष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे में भारतीय वैक्सीन को मिली यह मान्यता देश के वैक्सीन निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर की वैश्विक रोकथाम की कोशिशों के लिए भी अहम मानी जा रही है.