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Home > धर्म > Panchmukhi Hanuman Ji Story: आखिर क्यों बने पंचमुखी हनुमान? जानिए अहिरावण वध की पूरी रहस्यमयी कहानी व पौराणिक कारण

Panchmukhi Hanuman Ji Story: आखिर क्यों बने पंचमुखी हनुमान? जानिए अहिरावण वध की पूरी रहस्यमयी कहानी व पौराणिक कारण

Panchmukhi Hanuman Ji Story: आपके मन में भी कभी न कभी ये बात जरुर आयी होगी की आखिर हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार  क्यों लिया था? आइए जानते हैं इस बात को विस्तार से

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Last Updated: August 5, 2026 12:36:03 IST

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Panchmukhi Hanuman Ji Story in Hindi: लंका युद्ध के दौरान एक ऐसा समय भी आया था, जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण सबसे बड़े संकट में घिर गए थे. रावण ने उन्हें हराने के लिए अपने मायावी भाई अहिरावण का सहारा लिया. इसके बाद जो हुआ, उसने रामायण की सबसे रहस्यमयी कथाओं में जगह बना ली. अपने आराध्य की रक्षा के लिए हनुमान जी को पंचमुखी स्वरूप धारण करना पड़ा. आखिर इस दिव्य अवतार की जरूरत क्यों पड़ी और इसके पीछे क्या मान्यता है, आइए जानते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब लंका में श्रीराम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था, तब रावण ने पाताल लोक के राजा और अपने मायावी भाई अहिरावण को सहायता के लिए बुलाया. अहिरावण तंत्र-मंत्र और मायावी शक्तियों का बड़ा ज्ञाता था.एक रात उसने अपनी माया से पूरी वानर सेना को गहरी नींद में सुला दिया और छल से श्रीराम व लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया. उसका उद्देश्य दोनों भाइयों की बलि देकर अपनी तांत्रिक शक्तियों को और अधिक बढ़ाना था.

 हनुमान जी ने कैसे बचाए श्रीराम और लक्ष्मण के प्राण?

जब हनुमान जी को इस घटना की जानकारी मिली, तो वे तुरंत पाताल लोक पहुंचे. वहां उन्हें पता चला कि अहिरावण को साधारण तरीके से मारना संभव नहीं है.कथा के अनुसार, अहिरावण की मृत्यु तभी हो सकती थी, जब पांच अलग-अलग दिशाओं में जल रहे पांच दीपकों को एक साथ बुझाया जाए. यदि एक भी दीपक जलता रहता, तो वह फिर जीवित हो जाता.इसी कठिन परिस्थिति में हनुमान जी ने अपना पंचमुखी स्वरूप धारण किया. इस दिव्य रूप की मदद से उन्होंने पांचों दिशाओं की ओर एक साथ मुख करके सभी दीपकों को एक ही समय में बुझा दिया. इसके बाद अहिरावण का वध किया और श्रीराम-लक्ष्मण को सुरक्षित पाताल लोक से वापस ले आए.

 पंचमुखी हनुमान के पांच मुखों का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख अलग-अलग शक्तियों का प्रतीक माने जाते हैं.

  • हनुमान मुख (पूर्व दिशा)- साहस, बल और शत्रुओं पर विजय का प्रतीक.
  • नरसिंह मुख (दक्षिण दिशा)- भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक.
  • गरुड़ मुख (पश्चिम दिशा)- सर्प दोष और विष संबंधी कष्टों से सुरक्षा का प्रतीक.
  • वराह मुख (उत्तर दिशा)- स्थिरता, समृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है.
  •  हयग्रीव मुख (आकाश दिशा)-  ज्ञान, बुद्धि और विवेक का प्रतीक माना जाता है.

 पंचमुखी हनुमान की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यता है कि पंचमुखी हनुमान की आराधना करने से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है. श्रद्धालु मानते हैं कि इस स्वरूप की पूजा से आत्मविश्वास बढ़ता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है. खासतौर पर मंगलवार और शनिवार को पंचमुखी हनुमान की पूजा करना शुभ माना जाता है.

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Last Updated: August 5, 2026 12:36:03 IST

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Panchmukhi Hanuman Ji Story in Hindi: लंका युद्ध के दौरान एक ऐसा समय भी आया था, जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण सबसे बड़े संकट में घिर गए थे. रावण ने उन्हें हराने के लिए अपने मायावी भाई अहिरावण का सहारा लिया. इसके बाद जो हुआ, उसने रामायण की सबसे रहस्यमयी कथाओं में जगह बना ली. अपने आराध्य की रक्षा के लिए हनुमान जी को पंचमुखी स्वरूप धारण करना पड़ा. आखिर इस दिव्य अवतार की जरूरत क्यों पड़ी और इसके पीछे क्या मान्यता है, आइए जानते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब लंका में श्रीराम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था, तब रावण ने पाताल लोक के राजा और अपने मायावी भाई अहिरावण को सहायता के लिए बुलाया. अहिरावण तंत्र-मंत्र और मायावी शक्तियों का बड़ा ज्ञाता था.एक रात उसने अपनी माया से पूरी वानर सेना को गहरी नींद में सुला दिया और छल से श्रीराम व लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया. उसका उद्देश्य दोनों भाइयों की बलि देकर अपनी तांत्रिक शक्तियों को और अधिक बढ़ाना था.

 हनुमान जी ने कैसे बचाए श्रीराम और लक्ष्मण के प्राण?

जब हनुमान जी को इस घटना की जानकारी मिली, तो वे तुरंत पाताल लोक पहुंचे. वहां उन्हें पता चला कि अहिरावण को साधारण तरीके से मारना संभव नहीं है.कथा के अनुसार, अहिरावण की मृत्यु तभी हो सकती थी, जब पांच अलग-अलग दिशाओं में जल रहे पांच दीपकों को एक साथ बुझाया जाए. यदि एक भी दीपक जलता रहता, तो वह फिर जीवित हो जाता.इसी कठिन परिस्थिति में हनुमान जी ने अपना पंचमुखी स्वरूप धारण किया. इस दिव्य रूप की मदद से उन्होंने पांचों दिशाओं की ओर एक साथ मुख करके सभी दीपकों को एक ही समय में बुझा दिया. इसके बाद अहिरावण का वध किया और श्रीराम-लक्ष्मण को सुरक्षित पाताल लोक से वापस ले आए.

 पंचमुखी हनुमान के पांच मुखों का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख अलग-अलग शक्तियों का प्रतीक माने जाते हैं.

  • हनुमान मुख (पूर्व दिशा)- साहस, बल और शत्रुओं पर विजय का प्रतीक.
  • नरसिंह मुख (दक्षिण दिशा)- भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक.
  • गरुड़ मुख (पश्चिम दिशा)- सर्प दोष और विष संबंधी कष्टों से सुरक्षा का प्रतीक.
  • वराह मुख (उत्तर दिशा)- स्थिरता, समृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है.
  •  हयग्रीव मुख (आकाश दिशा)-  ज्ञान, बुद्धि और विवेक का प्रतीक माना जाता है.

 पंचमुखी हनुमान की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यता है कि पंचमुखी हनुमान की आराधना करने से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है. श्रद्धालु मानते हैं कि इस स्वरूप की पूजा से आत्मविश्वास बढ़ता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है. खासतौर पर मंगलवार और शनिवार को पंचमुखी हनुमान की पूजा करना शुभ माना जाता है.

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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