Saharanpur Kanwar Camp: कांवड़ यात्रा आस्था, भक्ति और कठिन तपस्या का सफर मानी जाती है. कांवड़िए कई-कई किलोमीटर तक पैदल चलकर भगवान शिव के लिए गंगाजल लेकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हैं. कंधे पर कांवड़ का भार, लगातार पैदल चलने से पैरों में दर्द, छाले और शरीर में थकान के बावजूद शिव भक्त अपनी यात्रा जारी रखते हैं. ऐसे में रास्ते में मिलने वाले सेवा शिविर कांवड़ियों के लिए बड़ी राहत बनते हैं. सहारनपुर से गुजरने कांवड़ियों के लिए इस बार ऐसा ही एक खास मेडिकल कैंप चर्चा में है, जहां इलाज और प्राथमिक चिकित्सा के साथ थके हुए पैरों को आराम देने के लिए मशीनों से मसाज की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है. खास बात यह है कि कैंप में एक-दो नहीं, बल्कि कुल 21 फुट और थाई मसाज मशीनें लगाई गई हैं.
जूते उतारते ही शुरू हो जाती है थके पैरों की मसाज
लंबी दूरी तक लगातार पैदल चलने का सबसे ज्यादा असर कांवड़ियों के पैरों पर पड़ता है. कई कांवड़ियों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं, तो कई के पैरों में दर्द और सूजन की शिकायत होती है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए कैंप में फुट मसाज और थाई मसाज मशीनों की व्यवस्था की गई है. कांवड़िए यात्रा के बीच कैंप में पहुंचते हैं, जूते-चप्पल उतारकर कुछ देर आराम करते हैं और फिर मसाज मशीन की मदद से अपने थके पैरों को राहत देते हैं. जरूरत पड़ने पर हाथ से भी मालिश की जाती है. यानी कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद जब पैरों की थकान यात्रा में बाधा बनने लगती है, तो यहां कुछ देर रुककर कांवड़िए आराम कर सकते हैं और फिर दोबारा अपनी मंजिल की ओर बढ़ सकते हैं. यह कैंप केवल थके हुए पैरों को आराम देने तक सीमित नहीं है. यहां छह डॉक्टरों की टीम भी तैनात है, जो कांवड़ियों को जरूरत पड़ने पर प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करा रही है.
इस बार बढ़ाई गई मसाज मशीनों की संख्या
कैंप के चेयरमैन दीपक खेड़ा के मुताबिक, कांवड़ियों की सेवा का यह सिलसिला अब 20वें साल में पहुंच चुका है. हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान कैंप में आने वाले शिव भक्तों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं में बदलाव और विस्तार किया जाता है. पिछले साल कैंप में छह मसाज मशीनें लगाई गई थीं. लेकिन इस बार कांवड़ियों की जरूरत को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाकर 21 कर दी गई है. कैंप संचालकों का मानना है कि कांवड़ यात्रा में भोजन और पानी जैसी सुविधाएं तो जगह-जगह मिल जाती हैं, लेकिन कई दिनों तक लगातार पैदल चलने वाले कांवड़ियों के लिए पैरों को आराम देना भी उतना ही जरूरी है. इसी सोच के साथ इस बार मसाज सुविधा को पहले के मुकाबले काफी बड़ा किया गया है.
खाना-पानी से आगे बढ़कर सेवा का नया तरीका
कांवड़ यात्रा के रास्ते में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए जाते हैं. इन शिविरों में कांवड़ियों के लिए भोजन, पानी, शरबत और आराम की व्यवस्था की जाती है. लेकिन सहारनपुर के इस कैंप में सेवा को एक कदम आगे ले जाने की कोशिश की गई है. यहां कांवड़ियों के लिए सिर्फ भोजन या पानी की व्यवस्था नहीं है, बल्कि उनके शरीर की थकान और यात्रा के दौरान होने वाली छोटी-बड़ी परेशानियों का भी ध्यान रखा जा रहा है. पैरों में छाले हैं तो ड्रेसिंग की सुविधा है, दर्द है तो दवा और मसाज है, रैशेज हैं तो इलाज है और मोबाइल की बैटरी खत्म है तो चार्जिंग स्टेशन भी मौजूद है.
मकसद एक ही, कांवड़ियों की आगे की यात्रा हो आसान
कैंप के चेयरमैन दीपक खेड़ा के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य कांवड़ियों की यात्रा को ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित बनाना है. कांवड़िए यहां कुछ देर के लिए रुकते हैं, अपने शरीर को आराम देते हैं और फिर दोबारा यात्रा पर निकल जाते हैं. उनका कहना है कि कांवड़िए की मंजिल अभी दूर होती है, इसलिए जरूरी है कि उसे रास्ते में ऐसी सुविधाएं मिलें, जिससे वह थकान और छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद अपनी यात्रा सुरक्षित तरीके से पूरी कर सके. सहारनपुर का यह कैंप इसी भावना के साथ कांवड़ियों की सेवा में जुटा है. एक तरफ शिव भक्ति में डूबे कांवड़िए लगातार अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ सेवा में जुटे लोग उनके सफर को थोड़ा आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. 21 मसाज मशीनों, डॉक्टरों की टीम और सैकड़ों मोबाइल फोन चार्ज करने की सुविधा वाला यह कैंप कांवड़ यात्रा के दौरान सेवा का एक अलग ही रूप सामने ला रहा है.