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Home > धर्म > Sawan 2026: सावन में प्याज, लहसुन और कढ़ी से क्यों किया जाता है परहेज? जानिए धर्म और आयुर्वेद कारण

Sawan 2026: सावन में प्याज, लहसुन और कढ़ी से क्यों किया जाता है परहेज? जानिए धर्म और आयुर्वेद कारण

Sawan 2026: सावन में प्याज, लहसुन, दही और कढ़ी से परहेज केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. बरसात में कमजोर पाचन शक्ति को ध्यान में रखते हुए सात्विक और हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है.

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Last Updated: August 7, 2026 18:56:36 IST

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Sawan 2026: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना, व्रत और सात्विक जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है. इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिव पूजा के साथ खानपान में भी विशेष सावधानी बरतते हैं. कई घरों में पूरे सावन प्याज, लहसुन, दही और कढ़ी का सेवन नहीं किया जाता. अधिकतर लोग इसे धार्मिक नियम मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद भी मानसून के मौसम में इस तरह के खानपान को लेकर खास सलाह देता है.

सावन में सात्विक भोजन को क्यों दिया जाता है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना मन, वचन और शरीर की शुद्धि का समय माना जाता है. इस दौरान सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और पूजा-पाठ में एकाग्रता बढ़ती है. हल्का और सुपाच्य भोजन शरीर को भी संतुलित रखता है, इसलिए इस महीने में खानपान पर विशेष ध्यान देने की परंपरा है.

प्याज और लहसुन से परहेज क्यों किया जाता है?

धार्मिक दृष्टि से प्याज और लहसुन को तामसिक प्रकृति का माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इनका अधिक सेवन मन में आलस्य, उत्तेजना और चंचलता बढ़ा सकता है. इसलिए व्रत और पूजा के दौरान इनसे दूरी बनाई जाती है. आयुर्वेद के अनुसार भी बरसात के मौसम में पाचन शक्ति सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर रहती है. ऐसे समय में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में गैस, एसिडिटी, अपच और पित्त संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति और स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है.

सावन में कढ़ी और दही खाने से क्यों बचते हैं?

कई लोगों के मन में सवाल आता है कि सावन में कढ़ी से भी परहेज क्यों किया जाता है. दरअसल, कढ़ी का मुख्य आधार दही होता है. आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने से पाचन तंत्र धीमा हो जाता है. इस समय दही का सेवन कुछ लोगों में पाचन पर अतिरिक्त भार डाल सकता है और कफ संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है. इसी वजह से दही और उससे बनी कई चीजों को सीमित मात्रा में लेने या परहेज करने की सलाह दी जाती है.

बरसात में क्यों जरूरी है हल्का भोजन?

मानसून के दौरान संक्रमण, पेट खराब होने और पाचन संबंधी दिक्कतों का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है. ऐसे में हल्का, ताजा और स्वच्छ भोजन शरीर के लिए अधिक लाभदायक माना जाता है. सात्विक भोजन न केवल आसानी से पचता है, बल्कि शरीर पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं डालता.

सावन में क्या खा सकते हैं?

सावन के दौरान ताजे फल, मौसमी सब्जियां, मूंग दाल, लौकी, तोरी, कद्दू, सिंघाड़ा, साबूदाना, दूध, सूखे मेवे और घर का ताजा बना हल्का भोजन अच्छा विकल्प माना जाता है. पर्याप्त पानी पीना और स्वच्छ भोजन करना भी इस मौसम में बेहद जरूरी है.

धर्म और स्वास्थ्य का संतुलन

सावन में खानपान से जुड़े नियम केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं. इनमें मौसम के अनुसार शरीर को स्वस्थ रखने का संदेश भी छिपा हुआ है. संतुलित और सात्विक भोजन अपनाकर व्यक्ति पूजा-पाठ के साथ अपने स्वास्थ्य का भी बेहतर ध्यान रख सकता है.

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Sawan 2026: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना, व्रत और सात्विक जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है. इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिव पूजा के साथ खानपान में भी विशेष सावधानी बरतते हैं. कई घरों में पूरे सावन प्याज, लहसुन, दही और कढ़ी का सेवन नहीं किया जाता. अधिकतर लोग इसे धार्मिक नियम मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद भी मानसून के मौसम में इस तरह के खानपान को लेकर खास सलाह देता है.

सावन में सात्विक भोजन को क्यों दिया जाता है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना मन, वचन और शरीर की शुद्धि का समय माना जाता है. इस दौरान सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और पूजा-पाठ में एकाग्रता बढ़ती है. हल्का और सुपाच्य भोजन शरीर को भी संतुलित रखता है, इसलिए इस महीने में खानपान पर विशेष ध्यान देने की परंपरा है.

प्याज और लहसुन से परहेज क्यों किया जाता है?

धार्मिक दृष्टि से प्याज और लहसुन को तामसिक प्रकृति का माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इनका अधिक सेवन मन में आलस्य, उत्तेजना और चंचलता बढ़ा सकता है. इसलिए व्रत और पूजा के दौरान इनसे दूरी बनाई जाती है. आयुर्वेद के अनुसार भी बरसात के मौसम में पाचन शक्ति सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर रहती है. ऐसे समय में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में गैस, एसिडिटी, अपच और पित्त संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति और स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है.

सावन में कढ़ी और दही खाने से क्यों बचते हैं?

कई लोगों के मन में सवाल आता है कि सावन में कढ़ी से भी परहेज क्यों किया जाता है. दरअसल, कढ़ी का मुख्य आधार दही होता है. आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने से पाचन तंत्र धीमा हो जाता है. इस समय दही का सेवन कुछ लोगों में पाचन पर अतिरिक्त भार डाल सकता है और कफ संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है. इसी वजह से दही और उससे बनी कई चीजों को सीमित मात्रा में लेने या परहेज करने की सलाह दी जाती है.

बरसात में क्यों जरूरी है हल्का भोजन?

मानसून के दौरान संक्रमण, पेट खराब होने और पाचन संबंधी दिक्कतों का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है. ऐसे में हल्का, ताजा और स्वच्छ भोजन शरीर के लिए अधिक लाभदायक माना जाता है. सात्विक भोजन न केवल आसानी से पचता है, बल्कि शरीर पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं डालता.

सावन में क्या खा सकते हैं?

सावन के दौरान ताजे फल, मौसमी सब्जियां, मूंग दाल, लौकी, तोरी, कद्दू, सिंघाड़ा, साबूदाना, दूध, सूखे मेवे और घर का ताजा बना हल्का भोजन अच्छा विकल्प माना जाता है. पर्याप्त पानी पीना और स्वच्छ भोजन करना भी इस मौसम में बेहद जरूरी है.

धर्म और स्वास्थ्य का संतुलन

सावन में खानपान से जुड़े नियम केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं. इनमें मौसम के अनुसार शरीर को स्वस्थ रखने का संदेश भी छिपा हुआ है. संतुलित और सात्विक भोजन अपनाकर व्यक्ति पूजा-पाठ के साथ अपने स्वास्थ्य का भी बेहतर ध्यान रख सकता है.

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