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Amrish Puri Biography: राज कपूर को क्यों बैठना पड़ा फर्श पर? होटल मैनेजर ने क्यों नहीं लिया बिल; जानें अमरीश पुरी के 15 अनसुने किस्से

Amrish Puri Biography: अमरीश पुरी बॉलीवुड के उन चुनिंदा और मशहूर खलनायकों में से एक थे, जिन्होंने अपने दौर में किसी को टिकने नहीं दिया. दूसरे विलेन उनसे कई कदम पीछे ही रहे. इस स्टोरी में पढ़िये अमरीश पुरी के बारे में अनसुने किस्से.

Amrish Puri Biography: डरावने गेटअप, भावपूर्ण चेहरा और बुलंद आवाज से दर्शकों के दिलों में खौफ पैदा करने वाले महान कलाकार अमरीश पुरी भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जमाना सदियों तक उनके अभिनय का दीवाना रहेगा. फिल्मों में हीरो बनने की चाहत लेकर मुंबई आए अमरीश पुरी ना चाहते हुए विलेन बन गए. उन्होंने ‘मिस्टर इंडिया’ में खूंखार विलेन ‘मोगैंबो’ से डराया तो पॉजिटिव भूमिकाएं निभाकर रुलाया भी. इसके अलावा, ‘चाची 420’ जैसी फिल्मों में कॉमेडी करके हंसाया भी. विलेन के रोल छोड़े तो कैरेक्टर रोल में भी खूब जमे. अमरीश पुरी ने 3 दशकों से भी अधिक समय तक फिल्मों में काम किया. 70 प्रतिशत से अधिक फिल्मोंं में उन्होंने नेगेटिव रोल ही किए हैं. यह अमरीश पुरी के भीतर छिपा सच्चा कलाकार ही था कि वह नकारात्मक भूमिकाओं को भी इस प्रभावी ढंग से निभाते थे कि हिंदी फिल्मों में वे एक बुरे आदमी का प्रतीक बन गए. करीबी रिश्तेदारों और परिवार के लोगों का कहना था कि अमरीश पुरी बेहद शांत इंसान थे. 12 जनवरी, 2005 को दुनिया को अलविदा कहने वाले महान कलाकार के बारे में यहां बता रहे हैं कुछ दिलचस्प बातें. 

1.बनने आए थे हीरो बन गए विलेन

बेटे राजीव पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि राज कपूर, दिलीप कुमार और धर्मेंद्र को बहुत पसंद करने वाले अमरीश पुरी को कॉलेज के दिनों से ही एक्टिंग का शौक हो गया था. राजीव के मुताबिक, पापा जवानी के दिनों में हीरो बनने के लिए मायानगरी मुंबई पहुंचे थे. उनके लिए एक प्लस प्वाइंट यह ता कि उनके बड़े भाई मदन पुरी और चमन पुरी पहले से ही फिल्मों में थे और अच्छा खासा रोल कर रहे थे. ‘गीत गाता चल’ को छोड़ दें तो भाई मदनपुरी ने करीब-करीब हर फिल्म में नेगेटिव रोल किए, वहीं चमनपुरी का भी ठीकठाक नाम था. मदनपुरी के सहारे अमरीश पुरी मुंबई आ तो गए पर फिल्म निर्माताओं ने उनसे कहा कि तुम्हारा चेहरा हीरो की तरह नहीं है. यह सुनकर काफी निराश हो गए थे. 

2.कौन सी थी अमरीश पुरी की पहली फिल्म

22 जून, 1932 को पंजाब के नवांशहर में जन्में अमरीश पुरी की सबसे पहली फिल्म ‘धुंध’ (Dhund) मानी जाती है. 1973 में रिलीज हुई इस फिल्म में जया भादुड़ी और संजीव कुमार लीड रोल में थे. इस फिल्म में अमरीश पुरी ने भी एक छोटा सा रोल किया था, लेकिन लोगों ने इसे नोटिस नहीं किया. इस फिल्म का निर्देशन देव आनंद ने किया था. फिल्म बड़े बैनर की थी, लेकिन इसका कोई खास फायदा नहीं मिला. इसके बाद भी उनका संघर्ष जारी रहा. 

3. एक्टिंग के फैन थे कई दिग्गज प्रॉड्यूसर-डायरेक्टर

अमरीश पुरी के पोते वर्धन पुरी की मानें तो उनके दादा ने थिएटर करने के दौरान ही अच्छा-खासा नाम कमा लिया था. नाटक मंचन के दौरान उनकी एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आती थी. वह पृथ्वी थिएटर से जुड़े हुए थे. उनका नाटक होता तो थिएटर हॉल पूरी तरह भर जाता था.  बताया जाता है कि उस दौरान सभी प्रॉड्यूसर-डायरेक्टर अमरीश पुरी की एक्टिंग के फैन थे. जब भी मुंबई के पृथ्वी थिएटर में शो होता तो आम लोगों के साथ दिग्गज निर्माता-निर्देशक और एक्टर भी अमरीश पुरी की एक्टिंग देखने जाते थे.

4. फर्श पर बैठकर राज कपूर ने देखा था नाटक

अमरीश पुरी के पोते वर्धन पुरी ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बार मुंबई में उनका प्ले देखने के लिए राज कपूर भी पहुंचे थे. राजकपूर बिना किसी पूर्व सूचना के आए. ऑडिटोरियम खचाखच भरा था. हालांकि उन्हें सीट ऑफर की गई, लेकिन राज कपूर ने जमीन पर बैठकर ही अमरीश पुरी का प्ले देखा था.  इतना ही नहीं जब प्ले खत्म हुआ तो अमरीश पुरी की पीठ थपथपाई और कहा कि एक दिन इंडस्ट्री में नाम कमाओगे. 

5.पहले ही ऑडिशन में मिला रिजेक्शन तो टूट गया था दिल

22 साल की उम्र में ऑडिशन में पहला रिजेक्शन मिलने के बाद अमरीश पुरी ने बॉलीवुड में जाने का सपना छोड़ दिया था. रिजेक्शन के बाद उन्होंने एक सरकारी इंश्योरेंस कंपनी में क्लर्क के तौर पर काम करना शुरू कर दिया. इंश्योरेंस कंपनी में क्लर्क के तौर पर काम करते हुए अमरीश की मुलाकात मशहूर थिएटर डायरेक्टर और ड्रामा टीचर इब्राहिम अल्काज़ी से हुई, जिन्होंने उन्हें थिएटर में अपनी किस्मत आज़माने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने मुंबई में थिएटर करके अपना अभिनय भी तराशा.

6.3 घंटे आवाज के लिए करते थे रिहर्सल

अपने गेटअप के साथ-साथ फिल्मों में अपनी बुलंद आवाज के चलते भी अमरीश पुरी दर्शकों के दिलों में उतर गए. अमरीश पुरी की आवाज काफी बुलंद  और अलग तरह की थी. अमरीश पुरी का गेटअप और आवाज ने उन्हें अच्छा विलेन बनाया. इन्हीं दो वजहों के चलते दर्शक भी उन्हें विलेन की भूमिका में देखना पसंद करते थे. पोते वर्धन पुरी का कहना है कि दादू अपनी आवाज पर रोज 3 घंटे का अभ्यास करते थे. इसी कारण फिल्मों में उनकी आवाज कठोर और कभी-कभी तो डरावनी लगती थी. 

7.होटल के मैनेजर ने नहीं लिया बिल

अमरीश पुरी निजी जिंदगी में बेहद शांत थे. वह फुर्सत के पल में किताबे बढ़ते और थिएटर भी देखने जाया करते थे. पोते वर्धन ने इंटरव्यू में बताया था कि एक बार दादू मुंबई के ताज होटल में डिनर करने के लिए गए थे. मैनेजर और होटल का बाकी स्टाफ उनके आसपास तब तक खड़ा रहा जब तक डिनर करके बाहर नहीं निकल आए. अमरीश पुरी के साथ मौजूद पोते वर्धन ने कहा कि दादू की खातिरदारी किसी राजा की तरह हो रही थी. डिनर के बाद दादू ने बिल मांगा तो मैनेजर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया. बहुत कहने के बावजूद दादू से बिल नहीं लिया. यहां तक कि हमें केक पैक करके दिए. यह रुतबा उन्होंने अपनी एक्टिंग से कमाया था. 

8.स्कूल के दोस्तों को पैरेंट्सी नहीं आते थे घर

पोते वर्धन पुरी की मानें तो फिल्मों में भले ही दादू खूंखार विलेन लगते थे, लेकिन वह घर में बहुत ही साधारण तरीके से रहते थे. उनका खौफ इस कदर था कि स्कूल के बच्चों के पेरेंट्स उन्हें मेरे घर आने से मना करते थे. फिल्मों में बनी छवि की वजह से दोस्तों के पैरेंट्स अपने बच्चों से कहते सिर्फ वर्धन से स्कूल में दोस्ती करना, लेकिन उनके घर मत जाना. पता नहीं घर में कैसा माहौल होगा? 

9.बिना कहे ब्लड किया डोनेट

अमरीश पुरी हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे. खासकर करीबी लोगों के लिए हमेशा हाजिर रहते थे. मशहूर फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि जानकार के परिवार के साथ दुर्घटना हो गई.  जानकार का दोस्त और उसका बेटा क्रिटिकल थे. रेयर ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़ी, जो कि अमरीश का ग्रुप भी था. जैसे ही उन्हें पता चला अस्पताल पहुंच गए और बोले- जितनी जरूरत हो ले लीजिए. उन्हें ब्लड डोनेट किया, लेकिन उस शख्स को बचाया नहीं जा सका.

10.मुंहमांगी फीस ना मिली तो छोड़ दी थी फिल्म

कई सालों तक और विलेन का रोल करने वाले अमरीश पुरी ने एक उम्र के बाद कैरेक्टर रोल करने शुरू कर दिए. 1990 के दशक में उन्होंने पॉजिटिव रोल करने शुरू किए थे. ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म याद होगी, जिसमें उन्होंने नायिका के पिता का रोल किया था जो विदेश में रहकर भारतीय परंपराओं को पसंद करता है. 1998 के एक इंटरव्यू में अमरीश पुरी ने खुद कबला था कि एनएन सिप्पी की एक फिल्म उन्होंने सिर्फ इसलिए छोड़ दी थी, क्योंकि उन्हें मांग के मुताबिक 80 लाख रुपये नहीं दिए जा रहे थे. वह कहते थे कि जो उनका हक है उन्हें मिलना चाहिए. 

11. नहीं देते थे वीडियो-ऑडियो इंटरव्यू

अमरीश पुरी ने इंडस्ट्री में आने के साथ ही नियम बना लिया था कि  वो वीडियो-ऑडियो इंटरव्यू नहीं देंगे. यहां तक कि अखबारों या मैगजीन को इंटरव्यू देते वक्त भी वो अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे. इंटरव्यू लेने वाले से वो साफ कह देते थे. बताया जाता है कि मैगजीन से उन्हें इंटरव्यू के लिए फोन आता था, तो वो कहते थे कि अगर कवर स्टोरी में जगह मिलेगी तभी इंटरव्यू दूंगा. 

12. उर्मिला दिवेकर से की थी लव मैरिज

एक बीमा कंपनी में बतौर क्लर्क काम करने के दौरान अमरीश पुरी की पहली मुलाकात उर्मिला दिवेकर से हुई. पहली ही नजर में उर्मिला दिवेकर उन्हें पसंद आ गईं. कुछ वक्त साथ में बिताने के बाद दोनों को प्यार हो गया. अलग प्रदेश और कल्चर के चलते परिवार राजी नहीं था. उस दौर में तो लव मैरिज इतनी आम नहीं हुआ करती थी और ना ही आसान. दोनों की जिद के आगे परिवार को झुकना ही पड़ा और शादी हुई.

13. केएल सहगल के चचेरे भाई थे अमरीश

बताया जाता है कि अमरीश पुरी दरअसल, आइकॉनिक सिंगर केएल सहगल से जुड़े थे. केएल सहगल ने उस दौर में अपने संगीत से कई पीढ़ियों को प्रेरित किया. अमरीश सिंगर केएल सहगल के चचेरे भाई थे. केएल सहगल की मां अमरीश के पिता  एस निहाल सिंह पुरी की रिश्ते में बहन थीं. माना जाए तो अमरीश और केएल सहगल फर्स्ट कज़िन थे.

14. पैर में अलग-अलग साइज़ के जूते पहनते थे

अमरीश पुरी की लंबाई सिर्फ़ 5 फीट 10 इंच थी, लेकिन वह स्क्रीन पर हमेशा अपनी असली हाइट से ज़्यादा लंबे दिखते थे. इसकी भी वजह है. उनके पैरों के बारे में एक दिलचस्प बात है, जिसका खुलासा सालों बाद हुआ. अमरीश पुरी एक पैर में साइज़ 11 के जूते पहनते थे, और दूसरे पैर में साइज़ 12 के. उनके डिज़ाइनर उनके जूतों के लिए खास इंतज़ाम करते थे.

15. हॉलीवुड में किया काम

सिर्फ़ बॉलीवुड में ही नहीं अमरीश ने हॉलीवुड में भी एक कलाकार के तौर पर अपनी कला और हुनर ​​को साबित किया. एक्टर ने दिग्गज फिल्ममेकर स्टीवन स्पीलबर्ग के साथ काम किया था और फिल्म इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ़ डूम में मोला राम का किरदार निभाया था. उस समय स्टीवन ने माना था कि अमरीश पुरी उनके पसंदीदा विलेन थे.

JP YADAV

जेपी यादव डेढ़ दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में समान रूप से पकड़ रखते हैं. मनोरंजन, साहित्य और राजनीति से संबंधित मुद्दों पर कलम अधिक चलती है. अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान, लाइव टाइम्स, ज़ी न्यूज और भारत 24 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.कई बाल कहानियां भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं. सामाजिक मुद्दों पर 'रेडी स्टडी गो' नाटक हाल ही में प्रकाशित हुआ है. टीवी और थिएटर के प्रति गहरी रुचि रखते हुए जेपी यादव ने दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक 'गागर में सागर' और 'जज्बा' में सहायक लेखक के तौर पर योगदान दिया है. इसके अलावा, उन्होंने शॉर्ट फिल्म 'चिराग' में अभिनय भी किया है. वर्तमान में indianews.in में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत हैं.

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