The Real 'Ikkis' Story: 1 जनवरी को रिलीज हो रही फिल्म 'इक्कीस' 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है. इस फिल्म में अगस्त्य नंदा परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाएंगे. जिन्होंने 1971 के युद्ध में अद्भुत वीरता दिखाई थी. आइये जानते हैं यहां अरुण खेत्रपाल की कहानी.
The Real 'Ikkis' Story
The Real ‘Ikkis’ Story: अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य नंदा की फिल्म ‘इक्कीस’ 1 जनवरी को रिलीज होने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर तगड़ा बज बना हुआ, कई लोग फिल्म का बेस्ब्री से इंतेजार कर रहे हैं. इस फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है और इस फिल्म में अगस्त्य नंदा परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल का किरदार निभा रहे हैं., जिन्होंने 1971 के युद्ध में अद्भुत वीरता दिखाई थी. चलिए आज जानते हैं असली इक्कीस की कहानी यानी अरुण खेत्रपाल की कहानी
1971 के दौरान हुए भारत-पाकिस्तान के युद्ध पर आधारित फिल्म ‘इक्कीस’ भारत के बहादुर सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के वास्तविक जीवन पर अधारित है, जिन्होंने युद्ध के मैदान में अपने देश के लिए जान तक कुर्बान कर दी थी वो बसंतर की लड़ाई में अरुण खेत्रपाल शहीद हो गए थे, तब वो केवल 21 साल के थे.भारतीय सैन्य अधिकारी सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल को सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था, वो परमवीर चक्र के सबसे कम उम्र के प्राप्तकर्ता थे. अरुण खेत्रपाल को दुश्मन के सामने अपनी वीरता दिखाने के लिए यह सम्मान दिया गया था.
अरुण खेत्रपाल का जन्म 14 अक्टूबर 1950 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था और वो पंजाबी हिंदू खत्री परिवार से थे. अरुण खेत्रपाल की रगों में सेना का खून बहता था, क्योंकि वह अपने परिवार से चौथी पीढ़ी के अधिकारी होने जा रहे थे. उनका परिवार पाकिस्तान के सरगोधा से ताल्लुक रखता था और वो विभाजन के बाद भारत आ गया थे. अरुण खेत्रपाल के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल एम.एल. खेत्रपाल भारतीय सेना में सेवारत एक कोर ऑफ़ इंजीनियर्स अधिकारी थे. वही उनके परिवार का सैन्य सेवा का लंबा इतिहास रहा है, उनके दादा भी प्रथम विश्व युद्ध में लड़े थे और परदादा सिख खालसा सेना में सेवा कर चुके थे.
1971 के दौरान हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध, 17 पूना हॉर्स को भारतीय सेना की 47वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान सौंपी गई थी. जिसके बाद अरुण खेत्रपाल पाकिस्तानी सेना से लड़ने के लिए दौड़े और सीधे पाकिस्तानी हमले में शामिल हो गए. वो अपनी पूरी सेना और टैंकों के साथ दुश्मन को कुचलने में सफल रहे. हालांकि, इस हमले में दूसरे टैंक के कमांडर की मौत हो गई. अकेले कमाड संभालते हुए,अरुण खेत्रपाल ने दुश्मन के गढ़ों पर हमला जारी रखा. अरुण ने दुश्मन से बहुत बहादुरी से लड़ाई लड़ी और नुकसान उठाने के बाद भी हार नहीं मानी और पीछे नहीं हटे. वोपाकिस्तानी सैनिकों और टैंकों पर लगातार हमला करते रहे और पाकिस्तानी टैंक को मार गिराया. वहीं पाकिस्तानी सेना ने भी जवाबी हमला किया. लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने दो बचे हुए टैंकों के साथ लड़ाई लड़ी और युद्ध में शहीद होने से पहले 10 पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट कर दिया. अरुण खेत्रपाल गोलीबारी में घायल हो गए, लेकिन टैंक को छोड़ने के बजाय उन्होंने एक आखिरी टैंक को नष्ट करने की लड़ाई लड़ी. जब युद्ध के अंत में जलते हुए टैंक को वरिष्ठ अधिकारी ने छोड़ने का आदेश दिया तो रेडियो पर अरुण खेत्रपाल ने आखिरी खब्दों में कहा, ‘नहीं, सर, मैं अपना टैंक नहीं छोड़ूंगा. मेरी लीड बंदूक अभी भी काम कर रही है और मैं इन कमीनों को पकड़ लूंगा.’ और उन्होंने युद्ध पाकिस्तान से लड़ते लड़ते शहिद हो गए. ये है फिल्म ‘इक्कीस’ के बहादूर की असली कहानी हैं.
UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने कमर कसनी शुरू…
Snake Viral Video: सोशल मीडिया पर आपको ऐसे कई रूह कंपा देने वाले वीडियो मिल…
Iran Hormuz Strait Tax: ईरान का एक बड़ा फैसला और पूरी दुनिया में मचेगा हाहाकार!…
census 2027 Question List: 2027 की जनगणना का पहला चरण यानी, घर-घर जाकर गिनती करना…
Gujarat Hailstorm Alert: गुजरात में मौसम का खौफनाक रूप! जामनगर में पल भर में गिरा…
Delhi Water Supply: दिल्ली जल बोर्ड ने गुरुवार (19 मार्च, 2026) को घोषणा करते हुए…