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Asha Bhosle ने किस गाने से किया था हिंदी फिल्मों में डेब्यू? पहले गाने का नाम जानकर रह जाएंगे हैरान

Asha Bhosle debut song | Asha Bhosle first song:इस महान सिंगर को बॉलीवुड के 50, 60 और 70 के दशक के म्यूज़िक के सुनहरे दौर के आइकॉन में से एक माना जाता था जिसे खास तौर पर उनकी बहन लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश, मन्ना डे और खुद भोसले ने गाया था.वह अपनी सोप्रानो आवाज़ और वर्सेटिलिटी, और फिल्म म्यूज़िक, पॉप, क्लासिकल म्यूज़िक, भजन, ग़ज़ल, फोक, कव्वाली और रवींद्र संगीत जैसे जॉनर में अपनी मास्टरी के लिए मशहूर थीं.

Asha Bhosle debut song | Asha Bhosle first song: प्लेबैक आइकन आशा भोसले का रविवार, 12 अप्रैल, 2026 को मुंबई में निधन हो गया. वह 92 साल की थीं. भोसले को शनिवार शाम को ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.खबर को कन्फर्म करते हुए भोसले के बेटे आनंद भोसले ने कहा “मेरी मां का आज निधन हो गया. लोग कल सुबह 11 बजे लोअर परेल के कासा ग्रांडे में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं, जहां वह रहती थीं. उनका अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा.” ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के डॉ. प्रतीत समदानी ने भी भोसले के निधन की पुष्टि की.

शनिवार को भोसले के हॉस्पिटल में भर्ती होने के तुरंत बाद शेयर किए गए एक X पोस्ट में उनकी पोती जनई भोसले ने लिखा था “मेरी दादी आशा भोसले बहुत ज़्यादा थकान और सीने में इन्फेक्शन की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती हुई हैं और हम आपसे रिक्वेस्ट करते हैं कि हमारी प्राइवेसी का ध्यान रखें. ट्रीटमेंट चल रहा है और उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा और हम आपको पॉज़िटिव अपडेट देंगे.”

म्यूजिक में जन्म

भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली के गोअर में पंडित दीनानाथ मंगेशकर और उनकी पत्नी शेवंती के घर हुआ था. पंडित दीनानाथ एक क्लासिकल सिंगर और एक्टर थे जिनका निधन तब हुआ जब आशा भोसले नौ साल की थीं.इसके बाद परिवार कोल्हापुर और फिर मुंबई चला गया, जहां भोसले और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने सिंगर और एक्टर के तौर पर फ़िल्मों में करियर शुरू किया. 1943 तक वह मराठी फ़िल्म माझा बल के लिए हिट नंबर चला चला नव बाला रिकॉर्ड कर रही थीं.

इस गाने से किया हिंदी फिल्मों में डेब्यू

भोसले ने हिंदी फिल्मों में सिंगर के तौर पर 1948 में फिल्म चुनरिया के गाने ‘सावन आया’ से डेब्यू किया, हालांकि फिल्म ‘अंधों की दुनिया’ में उनके गाने उसी साल चुनरिया से पहले रिलीज़ हुए थे. उनका पहला सोलो हिंदी फिल्म गाना 1949 में ‘रात की रानी’ के लिए था.

बॉलीवुड के सुनहरे दौर की आवाज

इस महान सिंगर को बॉलीवुड के 50, 60 और 70 के दशक के म्यूज़िक के सुनहरे दौर के आइकॉन में से एक माना जाता था जिसे खास तौर पर उनकी बहन लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश, मन्ना डे और खुद भोसले ने गाया था.

वह अपनी सोप्रानो आवाज़ और वर्सेटिलिटी, और फिल्म म्यूज़िक, पॉप, क्लासिकल म्यूज़िक, भजन, ग़ज़ल, फोक, कव्वाली और रवींद्र संगीत जैसे जॉनर में अपनी मास्टरी के लिए मशहूर थीं. अपनी ज़िंदगी में, भोसले ने 20 से ज़्यादा भारतीय और विदेशी भाषाओं में रिकॉर्डिंग की. 2006 में, उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने करियर में 12,000 से ज़्यादा गाने रिकॉर्ड किए हैं.

मिले सिनेमा के कई बड़े सम्मान

भोसले को भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए 2000 में सिनेमा के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. उन्होंने कई लोकप्रिय पुरस्कारों के अलावा, 1981 में दिल चीज़ क्या है (उमराव जान) और 1987 में मेरा कुछ सामान (इजाज़त) के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के रूप में दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते. संगीत प्रेमियों और संगीत उद्योग द्वारा भारत में लोकप्रिय संगीत की सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में से एक के रूप में पहचाने जाने वाले, भोसले का करियर आठ दशकों से ज़्यादा लंबा था.

भावपूर्ण गजलों से लेकर कैबरे एंथम तक

भोसले के करियर की पहचान उनकी व्यापक रेंज से थी, भावपूर्ण ग़ज़लों से लेकर धड़कन देने वाले कैबरे नंबरों तक. ओपी नैयर के साथ उनके कोलेबोरेशन से आओ हुज़ूर तुमको (किस्मत) जैसे शानदार गाने बने, जबकि आरडी बर्मन के साथ उनका टाइमलेस हिट गाना चुरा लिया है तुमने जो दिल को (यादों की बारात) आज भी एक रोमांटिक एंथम है.

उन्होंने पिया तू अब तो आजा (कारवां) और यह मेरा दिल (डॉन) जैसे ट्रैक में सेंसुअलिटी लाई, जिसने हिंदी सिनेमा के साउंड को प्रभावित किया. उन्होंने इन आँखों की मस्ती और दिल चीज़ क्या है (दोनों उमराव जान से) जैसे गानों में अपनी आवाज़ की गहराई भी दिखाई, जिससे क्लासिकल म्यूज़िक पर उनकी पकड़ का पता चलता है.

मॉडर्न बीट्स को अपनाना

1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में भोसले ने उस ज़माने के मॉडर्न, पॉप-इन्फ़्यूज़्ड स्टाइल को अपनाकर अपनी रफ़्तार बनाए रखी. एआर रहमान के साथ उनके काम में तन्हा तन्हा और रंगीला रे (दोनों रंगीला से) जैसे हिट गाने शामिल थे. ज़रा सा झूम लूँ मैं (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे) जैसे हिट गाने चार्ट पर सफल रहे. उन्होंने अदनान सामी के साथ कभी तो नज़र मिलाओ जैसे मशहूर इंडीपॉप ट्रैक भी रिलीज़ किए.

ब्रिटिश ऑल्टरनेटिव रॉक बैंड कॉर्नरशॉप ने 1997 का इंटरनेशनल हिट गाना ब्रिमफुल ऑफ़ आशा उन्हें डेडिकेट किया, जो फरवरी 1998 में UK सिंगल्स चार्ट में टॉप पर रहा. इस गाने के कई रीमिक्स हुए हैं, जिसमें फैटबॉय स्लिम का एक रीमिक्स भी शामिल है.

2013 में, उन्होंने फ़िल्म माई में एक एक्टर के तौर पर मुख्य भूमिका निभाई थी. इस फ़िल्म में पद्मिनी कोल्हापुरी और राम कपूर भी थे, और इसे महेश कोडियाल ने डायरेक्ट किया था. भोसले की परफ़ॉर्मेंस को क्रिटिक्स की तारीफ़ मिली थी.

आशा भोसले म्यूज़िक में मेलोडी और ओरिजिनैलिटी के एक ऐसे दौर को रिप्रेज़ेंट करती हैं जिसे बॉलीवुड ने फिर कभी एक्सपीरियंस नहीं किया. वह अपने गानों के ज़रिए अनगिनत फ़ैन्स के दिलों में ज़िंदा रहेंगी.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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