मंसूर अली खान पटौदी जिन्होंने न केवल एक आंख खोने के बावजूद क्रिकेट की दुनिया पर राज किया, बल्कि बॉलीवुड की शर्मिला टैगोर के साथ प्यार की कहानी लिखी. एक राजसी परिवार में जन्मे मंसूर अली खान पटौदी बचपन से ही क्रिकेट के असाधारण खिलाड़ी थे. लेकिन 1 जुलाई 1961 को इंग्लैंड में एक कार दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया कांच का एक टुकड़ा उनकी दाहिनी आंख में धंस गया था.
Love story : भारतीय क्रिकेट और बॉलीवुड के इतिहास में कुछ कहानियां फिल्मी से भी ज्यादा रोमांचक होती है यह कहानी है ‘नवाब ऑफ पटौदी’ यानी मंसूर अली खान पटौदी की, जिन्होंने न केवल एक आंख खोने के बावजूद क्रिकेट की दुनिया पर राज किया, बल्कि बॉलीवुड की ‘बंगाली ब्यूटी’ शर्मिला टैगोर के साथ प्यार की एक नई कहानी लिखी.
21 की उम्र में खोई एक आंख की रोशनी
एक राजसी परिवार में जन्मे मंसूर अली खान पटौदी बचपन से ही क्रिकेट के असाधारण खिलाड़ी थे. लेकिन 1 जुलाई 1961 को इंग्लैंड में एक कार दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया कांच का एक टुकड़ा उनकी दाहिनी आंख में धंस गया था. डॉक्टरों ने उनकी जान तो बचा ली, लेकिन उनकी उस आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई अब उन्हें सब कुछ ‘दो’ दिखाई देता था .किसी भी अन्य व्यक्ति के लिए यह करियर का अंत होता, लेकिन पटौदी ने हार नहीं मानी. उन्होंने एक आंख से ही अभ्यास किया और दुर्घटना के महज 6 महीने बाद भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया.
भारत के सबसे युवा कप्तान
मार्च 1962 में महज 21 साल की उम्र में टाइगर पटौदी भारतीय टीम के कप्तान बने। वह लगभग 40 साल तक दुनिया के सबसे युवा कप्तान रहने का रिकॉर्ड अपने नाम रखे रहे . उन्होंने भारतीय क्रिकेट को ‘जीतना’ सिखाया. उनकी कप्तानी में ही भारत ने 1968 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी पहली विदेशी सीरीज जीती. उन्होंने ही भारतीय टीम में स्पिन चौकड़ी (बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर और वेंकटराघवन) को बढ़ावा दिया, जिसने क्रिकेट इतिहास में भारत का दबदबा बनाया.
नवाब और अदाकारा का बेमिसाल इश्क
टाइगर पटौदी और शर्मिला टैगोर की पहली मुलाकात 1965 में कोलकाता में एक पार्टी के दौरान हुई थी कहा जाता है कि शर्मिला का दिल जीतने के लिए नवाब साहब ने उन्हें चार साल तक गुलाब के फूल और पत्र भेजे थे उस दौर में एक मुस्लिम नवाब और एक हिंदू अभिनेत्री का मिलन आसान नहीं था .समाज और परिवारों के विरोध के बावजूद, दोनों ने 1969 में शादी की उनकी शादी आधुनिक भारत के लिए साम्प्रदायिक सद्भाव की एक मिसाल बन गई, जो 2011 में पटौदी के निधन तक यानी 42 वर्षों तक अटूट रही.
टाइगर पटौदी का जीवन सिखाता है कि ‘विजन’ आंखों से नहीं, बल्कि इरादों से होता है अपनी मृत्यु के बाद भी उन्होंने अपनी काम करने वाली आंख दान कर दी थी, ताकि जाते-जाते भी वह किसी को दुनिया दिखा सके. मंसूर अली खान पटौदी, जिन्हें दुनिया ‘टाइगर पटौदी’ के नाम से जानती है, का सफरनामा साहस और असाधारण उपलब्धियों की मिसाल है उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मात्र 21 साल की उम्र में वे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने, जो उस समय एक विश्व रिकॉर्ड था. उनकी कप्तानी में ही भारत ने 1968 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी पहली विदेशी जीत दर्ज कर इतिहास रचा था खेल के मैदान के बाहर उनकी निजी जिंदगी भी किसी फिल्म से कम नहीं थी. उन्होंने 1969 में मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से विवाह किया, जो उस दौर की सबसे चर्चित और खूबसूरत जोड़ियों में से एक मानी गई.
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