मयूर वर्मा कभी बॉलीवुड के मशहूर "टीन अमिताभ" थे और अपने दौर के सबसे अधिक कमाई करने वाले बाल कलाकारों में से एक थे. कई साल बाद, उन्होंने शोहरत को पीछे छोड़ दिया, वेल्स चले गए और अपनी पत्नी नूरी के साथ मिलकर एक रेस्तरां व्यवसाय शुरू किया.
मयूर वर्मा
आपने अगर अमिताभ बच्चन की 70 के दशक की फिल्में देखीं हों तो कई फिल्मों में उनको छोटे बच्चे से बड़े होता हुआ दिखाया गया है. इन फिल्मों में जिस बच्चे ने छोटे बिगबी का किरदार निभाया, उनका नाम था मयूर वर्मा.
कुछ साल पहले मयूर वर्मा बॉलीवुड के सबसे जाने-माने बाल कलाकारों में से एक थे, जिन्हें ‘मास्टर मयूर’ के नाम से जाना जाता था. उन्होंने ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’ और ‘बेमिसाल’ जैसी फिल्मों में अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाकर प्रसिद्धि हासिल की. कहा जाता है कि मयूर उन दिनों के सबसे अधिक फीस लेने वाले बाल कलाकारों में से एक थे और बाद में उन्होंने बीआर चोपड़ा की फिल्म ‘महाभारत’ में अभिमन्यु का किरदार निभाया.
मयूर ने बहुत कम उम्र में ही मनोरंजन जगत में अपना करियर शुरू कर दिया था. रंगमंच से जुड़े परिवार में जन्मे मयूर ने बहुत कम उम्र में ही मंच पर अभिनय करना शुरू कर दिया था और फिर फिल्मों में काम करने लगे. उन्हें 1978 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ में अमिताभ बच्चन के युवा साथी के रूप में अपने अभिनय से पहचान मिली.
इस प्रदर्शन के बाद उन्हें पहचान मिली और इसी वजह से बिग बी के बचपन का किरदार के लिए कास्टिंग करते समय वे सभी निर्देशकों के पसंदीदा बन गए. बाद में उन्होंने लावारिस और बेमिसाल जैसी फिल्मों में अमिताभ बच्चन के किशोर रूप में अभिनय किया. लेकिन मयूर सबको यह साबित करना चाहते थे कि वे अमिताभ बच्चन से मिलते-जुलते एक बाल कलाकार से कहीं बढ़कर हैं.
कई अन्य स्टार किड्स की तरह, जिन्होंने अपने करियर में बड़ी सफलता हासिल की, मयूर ने भी बाल कलाकार से वयस्क अभिनेता बनने तक का सफर तय किया. 1983 में, उन्होंने ‘लव इन गोवा’ नामक फिल्म में एक किशोर की भूमिका निभाई, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. उम्र के साथ, उन्हें प्रसिद्धि दिलाने वाली भूमिकाएँ उनसे दूर होती गईं क्योंकि वे अब इतने छोटे नहीं थे कि प्रसिद्ध अभिनेताओं के बचपन के किरदार निभा सकें, लेकिन अभी भी उन्हें इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनानी बाकी थी.
इस समय कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन ने उन्हें कुछ सलाह दी थी. जब उनकी मां ने मयूर के करियर के बारे में बच्चन से बात की, तो उन्होंने उनसे कहा कि उन्हें फिल्म उद्योग में पर्दे के पीछे की बातों को समझकर इसमें बने रहने की कोशिश करनी चाहिए. मयूर ने निर्देशक प्रकाश मेहरा के साथ काम किया और टेलीविजन पर शो निर्देशित और निर्मित करने में रुचि विकसित की.
ऐसा नहीं है कि मयूर ने अपने करियर में सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित रखा. उन्होंने बीआर चोपड़ा के सबसे यादगार नाटक महाभारत में अभिमन्यु का किरदार निभाया. दिलचस्प बात यह है कि मयूर के अनुसार, पहले गोविंदा को और फिर चंकी पांडे को यह किरदार निभाने के लिए चुना गया था, लेकिन अंत में उनसे संपर्क किया गया.
लगभग 2007 की बात है जब मयूर ने अपने जीवन के सबसे बड़े फैसलों में से एक लिया. हालाँकि वे ब्रिटेन में रहने वाले दक्षिण एशियाई लोगों के बीच लोकप्रिय थे, फिर भी उन्होंने चकाचौंध से दूर रहने और अपनी पत्नी नूरी, बच्चों और माँ के साथ वेल्स में बसने का फैसला किया. इस फैसले के पीछे का कारण बहुत सरल था. मयूर का अगला कदम भी अपनी पत्नी को एक अलग पहचान दिलाने की ज़रूरत से प्रेरित था. नूरी को हमेशा से खाना पकाने में रुचि थी और वह शेफ बनने का सपना देखती थी. वेल्स में उन्होंने इंडियाना कुज़ीन नाम का भारतीय रेस्तरां खोला. नूरी का रेस्तरां खोलने का सपना धीरे-धीरे पारिवारिक व्यवसाय में बदल गया. दंपति ने अपने रेस्तरां व्यवसाय को और भी बढ़ाया और चस्का नाम से एक और रेस्तरां खोला.
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