करीब तीन दशक पहले, जब 'बॉर्डर' सिनेमाघरों में धमाल मचा रही थी, तो सनी देओल की दहाड़ और युद्ध के धमाकों के बीच एक शांत, कोमल उपस्थिति ने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली थी. इस गाने ने शर्बनी मुखर्जी को रातोंरात नेशनल क्रश बना दिया था.
sharbani mukherjee
बॉर्डर 2 फिल्म सिनेमाघरों में आने वाली है. इस फिल्म पर बॉर्डर फिल्म की सफलता का अकथित दबाव भी है. आज भी देशभक्ति वाली फिल्मों में बॉर्डर का नाम सर्वोपरि है. लेकिन क्या आपको इस फिल्म का वो हिट गाना याद है, जो शायद हर फौजी की पत्नी से बिछड़ते समय की भावनाओं को अपने में समेटे हुए है.
हां, मैं ‘ऐ जाते हुए लम्हों’ गाने की ही बात कर रही हूं. इस गाने में सुनील शेट्टी अपनी नवविवाहिता पत्नी को छोड़कर वापस ड्यूटी पर जा रहे हैं और उनकी पत्नी की हालत देखकर हर किसी के मन में एक तीस उठती है, लेकिन सुनील शेट्टी की फिल्म में इन पत्नी का नाम क्या था? क्या वो और किसी फिल्म में नजर आईं हैं? ऐसे बहुत से सवाल हैं, जिनके जवाब ज्यादातर लोगों के पास नहीं हैं. ये एक्ट्रेस हैं शरबनी मुखर्जी. ‘ऐ जाते हुए लम्हों’ गाने ने शर्बनी मुखर्जी को रातोंरात नेशनल क्रश बना दिया था.
करीब तीन दशक पहले, जब ‘बॉर्डर’ सिनेमाघरों में धमाल मचा रही थी, तो सनी देओल की दहाड़ और युद्ध के धमाकों के बीच एक शांत, कोमल उपस्थिति ने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली थी. इस फिल्म में शर्बनी मुखर्जी ने सुनील शेट्टी की पत्नी फूलवती का किरदार निभाया था. सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद, उन्होंने युद्ध में पीछे छूट गई महिलाओं की चुपचाप ताकत को बखूबी बयां किया था.
कुछ ही सीनों में उनकी भावुक आंखें, संयमित अभिनय और शालीनता ने सभी के दिल को छू लिया था. पुरुष वीरता और देश प्रेम से ओतप्रोत इस फिल्म में उन्होंने प्रेम, विरह और खोने का दर्द बिना आवाज ऊंची किए व्यक्त किया. उस दौर में जब चमक-दमक भारी पड़ती थी, शर्बनी की सादगी बेहद ताजगी भरी लगी.
शर्बनी मुखर्जी बॉलीवुड की दो बड़ी एक्ट्रेस रानी मुखर्जी और काजोल के परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन वे उनकी तरह फिल्म इंडस्ट्री में ज़्यादा बड़ा नाम नहीं कमा सकीं. 1997 में ‘बॉर्डर’ डेब्यू के समय काजोल स्टार थीं और रानी अपना फ़िल्मी सफर शुरू ही कर रही थीं.
‘बॉर्डर’ की सफलता के बाद शरबनी समीर सोनी संग म्यूजिक वीडियो ‘घर आजा सोनिया’ में नजर आईं, जो लोकप्रिय हुआ, लेकिन हिंदी फिल्मों में उन्हें खास स्थिरता नहीं मिली. इसके बाद ‘मिट्टी’, ‘अंश’, ‘कैसे कहूं के… प्यार है’ और ‘अंजाने’ जैसी कुछ फिल्मों में वो नजर आईं, लेकिन ये फ़िल्में ज्यादा हिट नहीं हुईं.
बॉलीवुड से भले ही शरबनी को खास प्यार नहीं मिला हो लेकिन मलयालम फिल्मों में उन्हें खूब पसंद किया गया. ‘राक्कीलिपट्टू’ फिल्म के साथ उन्होंने मलयाली सिनेमा में डेब्यू किया. इस फिल्म में वो ज्योतिका-तबू संग सहायक भूमिका में थी, लेकिन 2010 में ‘सूफी परांजा कथा’ ने किस्सा बदल दिया. केपी रमणुन्नी के उपन्यास पर बनी इस फिल्म में उन्होंने ऊंची जाति हिंदू वाली महिला कार्ती का रोल किया, जो मुस्लिम पुरुष संग भाग जाती है. इस फिल्म में उनके संवेदनशील अभिनय की काफी तारीफ हुई. उसी साल उनकी फिल्म ‘आत्मकथा’ आई, जो केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल जूरी अवॉर्ड और रामू करियाट डायरेक्शन अवॉर्ड जीती.
Kal ka Panchang 6 August 2026: कल 6 अगस्त 2026, गुरुवार का दिन है, हिंदू…
अगर आप ट्रेन से ट्रेवल करने जा रहे हैं, तो ये खबर खास आपके लिए…
Salman Khan Jail Story: सलमान खान Amazon Prime Video के शो 'अलायंस' में उनकी गेस्ट…
Madhya Pradesh Gold Price Today: सोने की कीमतों में आज-कल काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल…
Himachal Pradesh Gold Price Today: बाजार के लोग अब अमेरिका के आने वाले डेटा पर…
Jantar Mantar Protest Terror Plot: पंजाब पुलिस ने आईएसआई से जुड़े दो मॉड्यूल का पर्दाफाश…