सुनील शेट्टी ने उस काली रात का जिक्र करते हुए बताया कि जब राजस्थान और दिल्ली के बॉर्डर पर इस गाने की शूटिंग चल रही थी, तब उनकी नन्ही बेटी अथिया को बेहद तेज बुखार था. उस समय वह मात्र तीन साल की थी
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Border shooting : हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी देशभक्ति फिल्मों का जिक्र होता है, तो 1997 में आई जेपी दत्ता की फिल्म 'बॉर्डर' का नाम सबसे ऊपर आता है . इस फिल्म का हर सीन और हर गाना आज भी दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता सुनील शेट्टी ने फिल्म के मशहूर गाने 'ऐ जाते हुए लम्हों' की शूटिंग से जुड़ा एक ऐसा भावुक किस्सा साझा किया है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं. सुनील शेट्टी ने याद किया कि कैसे पर्दे पर विदाई का दर्द दिखाते समय वह असल जिंदगी में अपनी तीन साल की बेटी अथिया शेट्टी की जान के लिए दुआएं मांग रहे थे.
सुनील शेट्टी ने उस काली रात का जिक्र करते हुए बताया कि जब राजस्थान और दिल्ली के बॉर्डर पर इस गाने की शूटिंग चल रही थी, तब उनकी नन्ही बेटी अथिया को बेहद तेज बुखार था. उस समय वह मात्र तीन साल की थी और उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत थी सुनील ने बताया कि उस रात दिल्ली का मौसम बहुत खराब था और एक भयानक तूफान आने की चेतावनी दी गई थी .काम की प्रतिबद्धता ऐसी थी कि सुनील शूटिंग छोड़कर नहीं जा सकते थे, इसलिए भारी मन से उन्होंने अपनी बीमार बेटी को अकेले ही दिल्ली से मुंबई के लिए फ्लाइट में रवाना करने का कठिन फैसला लिया.
सुनील शेट्टी ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा, वह मेरे जीवन की सबसे कठिन रातों में से एक थी. कैमरे के सामने मुझे अपनी ऑन-स्क्रीन पत्नी (शरबानी मुखर्जी) को अलविदा कहते हुए भावुक होना था, लेकिन असल में मेरा पूरा ध्यान अपने फोन पर था मैं बार-बार सेट से हटकर फोन चेक कर रहा था कि क्या अथिया सुरक्षित मुंबई पहुंच गई है .उस काली रात और तूफान के बीच एक पिता का दिल पूरी तरह टूट चुका था. जब तक मुझे फोन पर यह खबर नहीं मिली कि अथिया घर पहुंच गई है और डॉक्टर ने उसका इलाज शुरू कर दिया है, तब तक मेरे लिए एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा था .
दिलचस्प बात यह है कि इस गाने के अंत में जो भावुकता सुनील के चेहरे पर नजर आती है, उसमें उनकी असल जिंदगी का डर भी कहीं न कहीं छिपा था. इसी गाने के दौरान निर्देशक जेपी दत्ता ने एक ऐतिहासिक फैसला भी लिया था .पहले यह तय नहीं था कि सैनिक अपनी पत्नी को मुड़कर देखेगा या नहीं, लेकिन तभी अचानक वहां से एक फाइटर जेट (MIG) गुजरा . उस तेज आवाज ने जेपी दत्ता को प्रेरित किया कि जब देश पुकारता है, तो सैनिक पीछे मुड़कर नहीं देखता. सुनील शेट्टी का यह खुलासा बताता है कि एक कलाकार को पर्दे पर हमें रुलाने के लिए खुद किन व्यक्तिगत संघर्षों से गुजरना पड़ता है. आज भी जब यह गाना बजता है, तो सुनील को वह डरावनी रात और अपनी बेटी का चेहरा याद आ जाता है.
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