आयुष्मान खुराना ने अपनी सुपरहिट फिल्म 'Andhadhun' की अनोखी Script के लिए केवल 1 रुपया फीस ली थी. श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म के लिए उन्होंने कड़ी Practice की और अंधे व्यक्ति का किरदार जिया था. उनकी यह Hard work रंग लाया और फिल्म ने National Award जीतकर इतिहास रच दिया.
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The Untold story : बॉलीवुड में आज आयुष्मान खुराना एक ऐसे कलाकार बन चुके है जो अपनी हर फिल्म के लिए करोड़ों रुपये चार्ज करते है. लेकिन उनके करियर में एक मोड़ ऐसा भी आया था जब उन्होंने पैसों से ज्यादा अपनी कला और एक बेहतरीन कहानी को महत्व दिया था. साल 2018 में जब फिल्म ‘अंधाधुन’ बन रही थी तब इस फिल्म के लिए आयुष्मान ने सिर्फ 1 रुपया फीस ली थी, और इसके पीछे की वजह वाकई आप सब को आपको हैरान कर देगी.
अंधाधुन की कहानी एक ऐसे पियानो बजाने वाले की थी जो अंधे होने का नाटक करता है. जब आयुष्मान ने यह सुना कि मशहूर डायरेक्टर श्रीराम राघवन एक ऐसी फिल्म बना रहे है, तो उन्होंने खुद डायरेक्टर से बात कि देगा जाए तो डायरेक्टर्स खुद हीरो के पास जाते है, लेकिन आयुष्मान इस कहानी को लेकर इतने उत्साहित में थे कि वह खुद डायरेक्टर्स के पास काम मांगने पहुंच गए. श्रीराम राघवन पहले तो आयुष्मान को इस रोल के लिए नहीं लेना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगा था कि आयुष्मान एक ‘चॉकलेट बॉय’ इमेज वाले एक्टर है. जब आयुष्मान ने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी, तो उन्हें समझ आ गया कि यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे अनोखी फिल्मों में से एक होने वाली है. उन्होंने डायरेक्टर से साफ कह दिया कि उन्हें पैसों की कोई परवाह नहीं है. फिल्म के बजट को सही रखने के लिए और अपनी मेहनत का सबूत देने के लिए आयुष्मान ने यह फिल्म केवल 1 रुपये में साइन कर ली. उनका मानना था कि एक अच्छी फिल्म का हिस्सा बनना किसी भी मोटी फीस से ज्यादा बड़ा इनाम होता है.
आयुष्मान ने इस फिल्म के लिए काफी मेहनत भी की थी. उन्होंने हफ्तों तक पियानो बजाना सीखा और अंधे व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज को समझने के लिए कड़ी प्रैक्टिस भी की. उन्होंने कई दिनों तक अपनी आंखों पर काली पट्टी बांधकर रहने की कोशिश की ताकि वह उस किरदार को असलियत में महसूस कर सके. आयुष्मान कि यह सादगी और मेहनत रंग भी लाई. जब ‘अंधाधुन’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इसने कमाई के सारे रिकॉर्ड तक तोड़ दिए. इस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया, बल्कि आयुष्मान खुराना को उनके करियर का पहला ‘नेशनल अवॉर्ड’ (National Award) भी दिलाया था. आज जब लोग ‘अंधाधुन’ को देखते है, तो उन्हें एहसास होता है कि आयुष्मान का वह फैसला कितना सही था.
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